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बिहार
सरिसवा नदी प्रदूषण मामले में नदी संरक्षण निदेशालय, केंद्रीय जल आयोग एवं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने संबंधित विभागों को भेजा पत्र
By Deshwani | Publish Date: 9/11/2023 8:02:14 PM
सरिसवा नदी प्रदूषण मामले में नदी संरक्षण निदेशालय, केंद्रीय जल आयोग एवं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने संबंधित विभागों को भेजा पत्र

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन और केंद्रीय जल आयोग द्वारा अनुमोदन के बावजूद अभी तक लंबित है ईटीपी का निर्माण

 
 
रक्सौल अनिल कुमार। सरिसवा नदी प्रदूषण समस्या के स्थायी समाधान के लिए रक्सौल में ईटीपी और एसटीपी लगाये जाने की मांग को लेकर शिक्षाविद डॉ. स्वयंभू शलभ द्वारा की गई अपील के आलोक में बीते  6 नवंबर को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन ने बोर्ड के सदस्य सचिव को आवश्यक कार्रवाई हेतु मेल भेजा है। वहीं नदी संरक्षण निदेशालय, केंद्रीय जल आयोग ने डॉ. शलभ को भेजे अपने पत्र में बताया है कि नदियों में अनुपचारित सीवेज से हो रहे प्रदूषण को कम करने के लिए जगह जगह पूरे भारत में नदियों के किनारे सीवेज ट्रीटमंट प्लांट लगाए जा रहे हैं I गंगा बेसिन में इसके लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) संस्था काम कर रही है I निदेशालय ने आगे बताया है कि डॉ. शलभ के सुझाव को आगे की कार्यवाही हेतु राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन तथा नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार सरकार को भेजा जा चुका है I 
 
 
 
 
अपने प्रतिवेदन में डॉ. शलभ ने बताया है कि रक्सौल में ईटीपी और एसटीपी का अनुमोदन राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा 22.7.2019 को एवं केंद्रीय जल आयोग द्वारा 18.9.2019 को किया जा चुका है पर अभी तक इसे कार्यान्वित नहीं किया जा सका। जन जीवन एवं पर्यावरण से जुड़ी यह समस्या वर्षों से इस सीमाई क्षेत्र की एक प्रमुख समस्या बनी हुई है। नदी मृतप्राय होकर नाले में तब्दील होती जा रही है।
 
 
 
 
गौरतलब है कि इस नदी को प्रदूषणमुक्त कराये जाने की कवायद भी लंबे समय से जारी है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त टीम ने मई 2011 में डॉ. शलभ की मौजूदगी में इस नदी के पानी का सैंपल लिया था। उसकी मुकम्मल जाँच कोलकाता लैब में करायी गई। नदी के पानी को जल मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। जाँच रिपोर्ट को विदेश मंत्रालय में भेजे जाने की अनुशंसा के साथ केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजा गया परंतु संबंधित विभाग द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लगातार नदी की हालत बद से बदतर होती गई।
 
 
 
 
जनवरी 2020 को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सरिसवा नदी को बिहार के अंदर प्रदूषित नदी की प्राथमिकता श्रेणी III में रखते हुए बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इसकी तत्काल जांच कर कार्रवाई रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया था। 
 
 
 
 
 
पीएचइडी द्वारा मार्च 2020 में नदी के पानी की जाँच की गई जिसमें पीएच लेवल, टरबीडीटी और आइरन डिजायरेबल लिमिट से अधिक पाया गया वहीं टोटल कोलाई पॉजिटिव पाया गया है। पीएचइडी अपनी रिपोर्ट में पानी में मौजूद हैवी मेटल्स का डेटा उपलब्ध नहीं करा पायी।
 
 
 
 
 
आगे बताया कि सरिसवा नदी गंगा के प्रदूषण का मुख्य स्रोत है। गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए इस स्रोत का स्वच्छ होना आवश्यक है। सरकार की नमामि गंगे योजना की सफलता भी इस नदी की स्वच्छता से जुड़ी है। डॉ. शलभ ने ईटीपी और एसटीपी की प्रस्तावित योजना का कार्यान्वयन शीघ्रातिशीघ्र किये जाने की मांग दुहरायी है। विदित है कि नेपाल से निकलकर यह नदी चंपारण में सिकरहना (बूढ़ी गंडक) में और आगे चलकर खगड़िया के समीप गंगा में मिल जाती है।
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