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बसपा-सपा की दुर्गति में अधिकारियों का योगदान नीयत, नीति, नियम व नौकरशाह
By Deshwani | Publish Date: 14/4/2017 1:03:45 PM
बसपा-सपा की दुर्गति में अधिकारियों का योगदान नीयत, नीति, नियम व नौकरशाह

-डा. दिलीप अग्निहोत्री

उत्तर प्रदेश सरकार ने अभी कुछ चर्चित व चुनिंदा नौकरशाहों के ही स्थानान्तरण किए है। लेकिन इसे बानगी के रूप में देखा जा सकता है। इससे लगता है पिछली सरकारों में नजर के तारे रहे इन नौकरशाहों को इस बार जमीं पर रहना होगा।

किसी सरकार की छवि उसकी नीयत, नीति व क्रियान्वयन पर निर्भर होती है। नीयत व नीति का निर्धारण राजनीतिक सत्ता को करना होता है, जबकि क्रियान्वयन की जिम्मेदारी स्थायी सरकारी मशीनरी को संभालनी होती है। शासक किस प्रकार के अधिकारियों-नौकरशाहों पर विश्वास करते है, इसी से उनकी नीयत का खुलासा हो जाता है। नौकरशाहों को बहुत संरक्षण प्राप्त होता है। निर्वाचित सरकारों को इन्ही से काम लेना होता है। लेकिन इसमें भी ईमानदारी और बेईमानी की सीमारेखा होती है। खराब छवि वाले अधिकारियों को कोर ग्रुप में रखने में तात्कालिक लाभ भले दिखाई दे, लेकिन अन्ततः ऐसी सरकारों को नुकसान उठाना पड़ता है। उत्तर प्रदेश में बसपा और सपा का उदाहरण सटीक है। इन सरकारों की दुर्गति करने में कतिपय नौकरशाहों का योगदान कम नहीं था। अधिकारियों के मामले में इनकी पसन्द- नापसन्द, सहमति - असहमति सभी ने छवि बिगाड़ने का काम किया।

सपा व बसपा के बीच निजी कटुता जगजाहिर थी। लेकिन कुछ खास अधिकारियों पर इनकी सहमति चैकाने वाली थी। ये अधकारी दोनों सरकारों में समान रूप से पसन्द किए गए। मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर प्राधिकरणों तक पर इनका वर्चस्व था। जांच किस प्रकार की होगी, उसमें कौन कितना दोषी साबित होगा, यह अलग विषय है। जांच एजेन्सियाँ भले ही निष्कर्ष निकालने में वर्षों लगा दें, लेकिन आम जन बिना किसी जांच के सच्चाई समझता है। लेकिन सत्ता में बैठे लोगो को गलतफहमी होती है। उन्हे लगता है कि आम जन कुछ नहीं जानता। इसलिए वह दागी अधिकारियों को गले लगाकर घूमते रहते है। ऐसे कई अधिकारियों को लेकर बसपा व सपा सरकारों में गजब की सहमति थी। ऐसे सभी अधिकारियों की छवि लगभग एक जैसी थी। प्रत्येक अधिकारियों को कई-कई जिम्मेंदारियाँ सौंपी गयी थी। जूनियर इंजीनियर से चीफ इंजीनियर बने एक व्यक्ति खूब चर्चित हुए। सपा व बसपा दोनों कि लिए यह आपसी सहमति का विषय था। इस बात को दोनों ने कभी छिपाने का प्रयास नहीं किया। बसपा सरकार ने बेहिसाब मेहरबानियां दिखाई, तो सपा सरकार ने उनके खिलाफ सी.बी.आई. जांच रूकवाने में जमीन-आसमान एक कर दिया। एक प्राधिकरण की कैग जाँच हेतु राज्यपाल ने पिछली सरकार को लिखा था, लेकिन इसकी अनुमति नहीं प्रदान की गयी। वर्तमान सरकार ने एक महीनें के भीतर ही कैग जांच की अनुमति प्रदान कर दी। उत्तर प्रदेश के शासन संचालन में पंचम तल की खास भूमिका होती है। यहाँ भी कुछ ऊँचे कद वाले अधिकारियों पर बसपा-सपा की समान कृपा थी। तत्कालीन मुख्यमंत्रियों ने इन्हीं की नजरों से प्रदेश को देखने का प्रयास किया। इससे इन्हें उत्तर नहीं वरन् उत्तम प्रदेश दिखाई दे रहा था। यही कारण था कि दोनों सरकारों में प्रचार का तरीका व सामग्री भी बहुत कुछ एक जैसी थी। लेकिन जब चुनाव हुए तो सच्चाई सामने आ गयी। जिन कार्यों क बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रचारित किया जा रहा था, उनकी भी कलई खुलने लगी। क्योंकि जब भ्रष्टाचार पर सहमति का माहौल बन जाता है, तब इसमें माहिर अधिकारियों की ही लाटरी खुलती है। यह अच्छा है कि वर्तमान सरकार ऐसे सभी कार्यों की जांच कराऐगी। प्रारम्भिक अनुमान में सभी कार्यों में गड़बड़ी मिल रही है।

बसपा व सपा सरकारों में जिन अधिकारियों पर असहमति थी, वह भी इनकी नीयत को उजागर करने वाली थी। क्योंकि नापसन्दी का एकमात्र आधार जातीय था। बसपा व सपा के एक-एक जाति के अधिकारियों-कर्मचारियों पर शासन की विशेष कृपा होती थी। इनके गुणों की परख मात्र जातीय आधार पर होती थी। बसपा में जाति विशेष के लोगों को अच्छी तैनाती मिली । उनके प्रमोशन का रास्ता साफ किया गया। बताया जाता है कि अधिकांश विभागों में एक जाति विशेष के अधिकारियों को विभागाध्यक्ष बनाने की तैयारी की गयी थी। सपा की मेहरबानी दूसरी जाति विशेष पर थी। जातीय आधार पर पिछली सरकार के अधिकारी हटाए गए, दूसरी जाति के अधिकारी तैनात किए गए। इस प्रकार की तैनातियों में एक खास बात थी। जाति विशेष के जूनियर कर्मचारी का रुतबा कम नहीं होता था। वरिष्ठ अधिकारियों की भी क्या मजाल कि उनसे कुछ कह दे। इस प्रकार के प्रशासन से अच्छे कार्यों की ज्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती। बसपा-सपा सरकारों ने ऐसा ही प्रशासन पसन्द किया। उसे संरक्षण दिया। यही कारण था कि पूर्ण बहुमत से बनी इनकी सरकारें जनआकांक्षाओं को पूरा नहीं कर सकी। यह सराहनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुरू से सावधान है। बसपा-सपा का इतिहास इस बार दोहराया नहीं जाएगा। सरकार की नीयत, नीति को समझकर अधिकारियों को नियमानुसार कार्य करना होगा।

(लेखक हिन्दुस्थान समाचार से जुड़े हैं)

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