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मजदूरों के सम्मान के लिए नरेश सीजापति 51 हजार किमी की पदयात्रा पर, मोतिहारी में अपर समहर्ता से की मुलाकात
By Deshwani | Publish Date: 2/8/2022 5:44:38 PM
मजदूरों के सम्मान के लिए नरेश सीजापति 51 हजार किमी की पदयात्रा पर, मोतिहारी में अपर समहर्ता से की मुलाकात

23 हजार किमी यात्रा पूरी कर मोतिहारी पहुंचे सीजापति। फोटो- देशवाणी।

मोतिहारी।  नरेश सीजापति 10 राज्यों में 51 हजार की पैदल यात्रा के दौरान समाहरणालय मोतिहारी में अपर समाहर्ता आपदा अनिल कुमार से मिलने पहुंचे।

 
अपर समाहर्ता ने नरेश सीजापति के पैदल यात्रा की सफलता हेतु शुभकामना देते हुए कहा कि वे अपने मिशन में कामयाब हो।

 नेरेश सीजापति ने अबतक अपनी आधी यात्रा पूरी कर चुके हैं। उन्होंने 48 दिनों में 6 राज्यों के 23 हजार किमी की यात्रा पूरी कर ली है।

प्रवासी मजदूर की सम्मानजनक जीवन के संदेश के साथ नरेश सीजापति भारत के 10 राज्यो में पैदल यात्रा कर रहे है। 

प्रवासी मजदूरों के सम्मानजनक जीवन की मकसद को लेकर 10 राज्यों के 5100 किमी के पदयात्रा के लक्ष्य को लेकर निकले गुजरात के नरेश सिजापति महाराष्ट्र से गुजरात मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ झारखंड बिहार उत्तरप्रदेश हरियाणा राजस्थान गुजरात की पैदल यात्रा पर है। वो भारत अति प्रवासी मजदूर वाले राज्यो में पैदल यात्रा कर उन राज्यों में प्रवासी मजदूरों को करीब से जानना चाहते है। 
 

नरेश ने बताया 150 दिनों में 10 राज्यों के लक्ष्य को लेकर वह अभी तक 48 दिनों में वह अभी तक 6 राज्यों के लगभग 2300 किमी तक पदयात्रा कर चुके है। 
नरेश सीजापति ने बताया वह मुंबई से अपनी पदयात्रा शुरू कर गुजरात के 9 जिला, मध्यप्रदेश के 13 जिला, छत्तीसगढ़ के जंगल के साथ 5 जिला, झारखंड के 4 जिला होते हुए बिहार में प्रवेश किया था.
नरेश बिहार के चार जिला होते हुए मोतिहारी पहुंचे है.नरेश ने बताया कि कल गोपालगंज  होते हुए वह उत्तरप्रदेश के बाद दिल्ली पहुंचेने वाले है. दिल्ली में वह धरना पर बैठ प्रवासी मजदूरों की समस्या से प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को अवगत कराना चाहता है. नरेश ने कहा  कि हिंदुस्तान के दिल बनाने वाले राज्यो में मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ झारखंड बिहार उत्तरप्रदेश हरियाणा राजस्थान आदि राज्यो में प्रवासी मजदूरों की संख्या ज्यादा है। 
इन्ही राज्यो से प्रवासी मजदूर गुजरात, महाराष्ट्र,दिल्ली जैसे बड़े राज्यों में अपनी आजीविका की खोज में प्रवास पर जाते है। इस लिए सभी राज्य के जिलों का पदयात्रा करते हुए फिर वहीं पर अपनी पदयात्रा गुजरात में खत्म करेंगे।

 48 दिनों के अपनी पदयात्रा को सफल बताते हुए नरेश ने बताया कि इस बीच वह कई मंत्री, जनप्रतिनिधि और बुद्धिजीवियों से मिलकर उनको प्रवासी मजदूरों की समस्या को उनके सामने रखा। साथ ही जिस जिले में जाते है उस जिलों से आरटीआई के माध्यम से मजदूरों के लिए बनाए गए सरकारी योजना और प्रवासी मजदूरों की जानकारी की मांग करते है. रास्ते में मिलने वाले मजदूरों के साथ अनुभव शेयर करते है उनको प्रवास में जाते समय ध्यान रखने वाली बाते और  प्रवास में न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक , शारीरिक और मानसिक हिंसा से खुद को जागृत रखने के लिए बता रहे  है। सुबह मजदूर चौक पर जाकर मजदूरों को उनके हक अधिकार के प्रति भी जागृत करते है  और डिस्ट्रिक्ट के जिला अधिकारी से मिलकर समस्या की जानकारी देने की कोशिश करते है। 

नरेश सीजापति का परिचय
मूल रूप से नेपाल के  कर्णाली प्रदेश के दैलेख जिला के रहने वाले नरेश सीजापति के माता पिता कई साल पहले सपरिवार गुजरात के अहमदाबाद में जाकर बस गए.नरेश का बचपन बहुत ही विकट परिस्थितियों में गुजरा. वह बचपन से ही होटल और कंपनी  में काम करते करते हुए एक स्वयंसेवी संस्था में डाटा एंट्री का काम करना चालू  किया. लेकिन पढ़ने की ललक के कारण उनने 2018 में उद्यमिता में पोस्ट ग्रेजुएट किया. इसी बीच 2015 में वह प्रवासी मजदूरों की समस्या को देखते हुए पनाह फाउंडेशन नामक संस्था भी बनाया. यह संस्था लगातार प्रवासी मजदूरों के समस्या के समाधान के लिए प्रयासरत रहता है.साथ ही यह संस्था जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा और कानूनी सहायता प्रदान करती है.दो बच्चियों के पिता नरेश सीजापति का मजदूरों के लिए बहुत बड़ा सपना है. लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों के लिए फ्लाइट टिकट , ऑक्सीजन, राशन , ऑटो एंबुलेंस जैसी बहोत सारी सेवा प्रदान कर लगभग 2.25 करोड़ से ज्यादा के का रिलीफ वर्क प्रवासी मजदूरों के लिए किया था।  

पदयात्रा का उद्देश्य
#walkformigrant पर निकले नरेश सीजापति ने कहा कि प्रवासी मजदूरों का सूची किसी राज्य के पास मौजूद नही रहता है.नरेश ने कहा मजदूर किस राज्य से मजदूरी करने किस राज्य में जा रहा है इसकी सूची दोनों राज्यों से किसी राज्य के पास नही होता है.जिससे ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा मिल रहा है.बड़े बड़े कार्पोरेट घरानों के द्वारा ठेकेदारों से मिल प्रवासी मजदूरों का शोषण किया जा रहा है.मजदूरों को कंपनी द्वारा मिलने वाली सुविधा से वंचित होना पड़ता है. प्रवासी मजदूरों के लिए ज्यादातर राज्यो में प्रवासी मजदूरों के लिए सरकारी योजना या सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध नहीं है। 
 
 
नरेश सीजापति ने बताया कि वह प्रवासी मजदूरों की सूची बनाना चाहते हैं जिससे उनको कार्य करने वाली जगहों पर सारी सुविधा मिल सके और  प्रवासी मजदूरों का शोषण बंद हो ये उनका मुख्य उद्देश है। भारत के दस राज्यो में घूम कर अलग अलग प्रकार के प्रवासी मजदूरों से मिलकर गांव में जाकर प्रवासी मजदूरों और उनके रहन सहन और उनके अनुभव के बारे में जानना और समझना उनका एक उद्देश्य है।
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