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बिहार
पानी के नल व कलों में बिजली का अर्थिंग कितना खतरनाक, मोतिहारी के पताही में पानी भरते महिला को लगी बिजली की करंट, मौत
By Deshwani | Publish Date: 21/2/2021 11:55:08 PM
पानी के नल व कलों में बिजली का अर्थिंग कितना खतरनाक, मोतिहारी के पताही में पानी भरते महिला को लगी बिजली की करंट, मौत

मोतिहारी। पानी के नलों में कई लोग बिजली की अर्थिंग जोड़ देते हैं। ऐसा वे अज्ञान के कारण करते हैं। उन्हें लगता है कि इससे बिजली का वोल्टेज बढ़ेगा। लेकिन यह खतरनाक व अवैज्ञानिक भी है। ऐसी ही घटना पताही के पंच गछिया गांव में घटी है।जहां एक महिला की जान चली गई है।

 

मिली जानकारी के अनुसार पंचगछिया गांव में रामकिशोर तिवारी की पत्नी रीमा देवी चापाकल से पानी से पानी भर रही थी। तभी उन्हें बिजली की करंट ने उन्हे अपनी चपेट में ले लिया। जिससे उनकी मौत हो गई।
संवाददाता ने बताया है कि उनके दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। जिन्हें वे निसहाय छोड़कर चली गई। उनका 6 वर्षीय पुत्र ऋतिक व 4 वर्षीय पुत्री वैष्णवी है।
 
 
बिजली विभाग के एक जानकार ने पूछने पर बताया कि कलों में बिजली के न्यूट्रल को जोड़ना अवैज्ञानिक है। ट्रांस्फर्मर से जो न्यूट्रल आता है। उसकी बराबरी कल से जोड़कर नहीं की जा सकती। यह अवैज्ञानिक व खतरनाक है। उन्होंने बताया कि लोगों को न्यूट्रल व अर्थिंग में भेद नहीं मालूम है।
 
 
बताया कि ट्रांस्फार्मर से प्लस व माइनस दो फेज आते हैं। जिन्हें प्लस को फेस व माइनस को न्यूट्रल बोला जाता है। कई अज्ञानी लोग वोल्टेज बढ़ाने के लिए न्यूट्रल के तार को अपने पानी के नल व चापाकल में जोड़ देते हैं। दरअसल इस न्यूटल से फेस यानी प्लस करंट का रिटर्निंग भी आते रहते है। जो जमीन के अंदर चला जाना चाहता है। लेकिन वह तार ढ़ीला होने पर वह जमीन के अंदर ठीक से नहीं जा पाता। जबक आदमी उस कल को छूता है तो फेज को जमीन के अंदर जाने का सुगम रास्ता मिल जाता है। जिससे फेस यानी प्लस का रिटर्निंग आदमी के शरीर से प्रवाहित होकर जमीन में जाने लगता है। जिससे वह करंट की चपेट में आ जाता है।
 
जब चापा कल में जोड़ा गया न्यूटल का तार टाइट कसा होता है तब रिटर्निंग का फेस यानी प्लस करंट जमीन के अंदर चली जाती है। जिससे लोग बच जाते हैं। दुर्भाग्य से अगर चापाकल में कसा गया न्यूट्रल का तार  लूस हो जाता है। कल चलाने वाला करंट की चपेट में आ जाता है। यहां इसतर कई लोगों की जान चली गई है। फिर भी लोग इससे सचेत नहीं होते।

अर्थिंग व न्यूट्रल दोनों अगल चीजें हैं-
बताया कि न्यूट्रल व अर्थिक दोनों अलग-अगल चीजे हैं। इसके भेद को जाने बिन अगर कोई अपना दिमाग लगाता है तो वह खतरे में पड़ जाएगा।
 
घरों में अर्थिंग अगल से कराई जाती है। लिहाजा वह बॉडी अर्थिेंग के लिए कराई जाती है। जिससे किसी इलेक्ट्रिक हेवी डिवास में करंट लिक हो तो वह अर्थिंग के माध्यम से जमीन में चला जाए। किसी को करंट न लगे। न कि वोल्टेज बढ़ाने के लिए ऐसा किया जाता है। वैसे डिवाइस के तारे में तीन तार होते हैं। लाल-हरा और काले रंग का। जिस डिवाइस जैसे बल्ब में दो ही तार होते हैं उसमें अर्थिंग की जरूरत नहीं होती।
 
 
कुछ इलेक्ट्रिक डिवाइस के लिए अर्थिंग लगाना पड़ता है।  वह भी नल या चापा कल से नहीं जोड़ जाता। इसके एक्सपर्ट लोगों से अलग जमीन में पाइपिंग करके कराई जाती है। और यह बॉडी अर्थिंग के तार को न्यूट्रल से नहीं जोड़ा जाता।
 
अर्थिंग का कनेक्शन फ्रिज, आइरन व बड़े मनीशों के बिजली करंट लिक होने पर जमीन में ग्राउंड करने के लिए की  जोड़ा जाता है। न कि बिजली का वोल्टेज बढ़ाने के लिए। ऐसे मशीनों में बिजली के कनेक्शन के लिए तीन  तार होते हैं। लाल वाला तार प्लस यानी फेज के लिए, हरा यानी न्यूट्रल के लिए और काला यानी अर्थिंग के लिए। अर्थिंग का प्ल्ग सौकेट सबसे मोटा और बीचो-बीच अवस्थित होता है।
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