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बिहार
लालच नहीं किया तो मोतिहारी में बैंक के बाहर लुटने से बचे पति-पत्नी, नोट डबलर को भी पकड़वाया, दूसरा फरार
By Deshwani | Publish Date: 18/4/2019 11:12:24 PM
लालच नहीं किया तो मोतिहारी में बैंक के बाहर लुटने से बचे पति-पत्नी, नोट डबलर को भी पकड़वाया, दूसरा फरार

मोतिहारी। शहर के मधुबन छावनी स्थित बैंक ऑफ इंडिया के पास एक दम्पति ने अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई को लुट जाने से बचा लिया। दरअसल उन्होंने ज्यादा पैसे का लालच नहीं किया। जिससे वे लुटने से बच गए।

 ठगे जाने व जाल में फंसने का पहला कारण है लालच-

लिहाजा उन्हें बैंक से निकासी किए गए 12 हजार रुपये के बदले नोट डबलर 2 लाख रुपये देने का ऑफर दे रहा था। लेकिन उन्होंने लालच नहीं किया। सिर्फ हल्ला मचाया और लोगों ने नोट डबलर को पकड़कर छतौनी थाने को खबर कर दी। जिससे वह दबोच लिया गया।

केसरिया निवासी है नोट डबलर-

गिरफ्तार नोट डबर की पहचान केसरिया थाना क्षेत्र के चांद परसा गांव निवासी ललन सहनी के रूप में की गई है। हालांकि उसका एक अन्य साथी चांदपरसा का ही विक्की कुमार भागने में सफल रहा है। उसके पास से छतौनी पुलिस ने नकली नोटों के साथ रुपयों के साइज का कागज का बंडल और रूमाल भी जब्त किया है।

12 हजार के बदले दे रहा था दो लाख रुपये-

मिली जानकारी के अनुसार मुफस्सिल थाना क्षेत्र के रायसिंघा निवासी रमानाथ प्रसाद अपनी पत्नी के साथ बैंक आए हुए थे। उन्होंने बैंक से 12 हजार रुपयों की निकासी की। रुपये लेकर जब वे बाहर निकले तो गेट के पास कथित नोट डबलर ललन सहनी व विक्की कुमार मिल गए। दोनों ने रमानाथ प्रसाद से कहा कि वे गोरखपुर से दो लाख रुपये चोरी करके लाए हैं। इसे ले लिजिए। इसके बदले अपने 12 हजार रुपये दे दीजिए। हमलोग बाद में बाकी का हिसाब कर लेंगे। इसपर रमानाथ प्रसाद और उनकी पत्नी ने हल्ला मचाना शुरू किया और लोगों ने ललन सहनी को दबोच लिया और पुलिस को खबर की।

बैंकों में सीधे-साधे लोग व महिलाओं को बनाते हैं शिकार-

बैंको इस तरह के ठग अक्सर ग्राहकों को चूना लगाते हैं। कई लोग इनके झांसे में आ जाते हैं। वे नोटों के बंडल की तहर कागज को रूमाल में लपेट कर लाते हैंं। सीधे-साधे ग्रहकों को निशाना बनाकर उन्हें कहते हैं कि मेरा 2 लाख रुपयों का बंडल आप संभालिए। तबतक मैं आपके रुपये जमा करा देता हूं। लोग झांसे में आकर उन्हें 10-20 हजार रुपये जमा कराने को दे देते हैं। सोचते हैं कि वह भागेगा कैसे। उसके दो लाख रुपये तो मेरे पास है ही। इस बीच लाइन में रुपये जमा करने के लिए लगते भी है। जब रुपये के मालिक का ध्यान इधर-उधर होता है तो वे गायब हो जाते है। जब काफी देर हो जाती है। तो सीधे-साधे ग्राहक उन्हें बैंक में ढूढ़ने लगते है। वे नहीं मिलते। फिर जब रूमाल में दिए गए रूपये निकालते हैं। तब उन्हें पता चलता है कि वे ठगे जा चुके हैं।

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