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आखिर लोगों को कितनी अभिव्यक्ति की आजादी चाहिए ?
By Deshwani | Publish Date: 5/3/2017 3:54:27 PM
आखिर लोगों को कितनी अभिव्यक्ति की आजादी चाहिए ?

मृत्युंजय दीक्षित 

आईपीएन। काफी लम्बे समय से शांत पडे़ आजादी चाहिये के नारे, राष्ट्रवाद पर नये सिरे से बहस का विचार और असहिष्णुता जैसे मुददे एक बार फिर वापस आ गये हैं। अबकी बार इसका स्वरूप और भी बेहद खतरनाक तरीके से सामने आया है। जिसकी पृष्ठभूमि तो दिल्ली विश्वविद्यालय में लिखी गयी लेकिन असली जंग रामजस कालेज में हो गयी और इसका केंद्र बिंदु गुरमेहर नाम की एक लड़की बन गयी है। अभी तक जो बात समझ मंे आ रही है। वह यह है कि यह पूरा का पूरा मामला एक सुनियोजित  भारत विरोधी राजनैतिक साजिश के तहत तैयार किया गया है। साथ ही एक बात और है कि इस मामले में वे सभी लोग शमिल हो गये है जो नोटबंदी का विरोध करने के नाम पर पीएम मोदी से अपनी लड़ाई को एक तरह से हार चुके हंै। गुरमेहर के समर्थन में वे सभी लोग शामिल हैं जिन्होनें नोटबंदी व कालेधन के खिलाफ लड़ाई का विरोध किया। इस भारत विरोधी आंदोलन व गतिविधियों का वे सभी लोग समर्थन कर रहे है जो मोदी जी की लोकप्रियता के आगे हार चुके हैं। 

रामजस कालेज की छात्रा  गुरमेहर ने विद्यार्थी परिषद के खिलाफ सोशल मीडिया में रेप करने की धमकी देने का सनसनीखेज आरोप सोशल मीडिया में एक वीडियों के माध्यम से लगाया और फिर जब पूरे देशभर के विवि व शिक्षण संस्थानों में आग लग गयी उसके बाद उसने अपने आप को सुनियोजित साजिश के तहत आंदोलन से अलग भी कर लिया। इस विषय पर देश में दो प्रकार की धारायें चल पड़ी हैं। 

आज छात्रा के समर्थन में वे सभी तथाकथित लोग खडत्रे हो गये हैं जो कैराना व कालेज जाती छात्राओं के साथ प्रतिदिन हो रही छेड़छाड़ व बर्बर बलात्कार की वारदातों पर तो कोई टिप्पणी नहीं करते लेकिन याकूब मेनन को फासी से कैसे रोका जाये इसके लिए अभियान छेड़ देते है। भारत में अभिव्यक्ति की ही आजादी है तभी तो सब लोग देश के प्रधानमंत्री को अपमानित करने वाली गालियां प्रतिदिन दे रहे हैं। यह अभिव्यक्ति की आजादी ही है कि जेएनयू जैसे विश्वविद्यालयों में कश्मीर की आजादी वाले पोस्टर चिपक जाते हैं। उमर खालिद जैसे लेगा नारे लगाकर चले जाते हैं कि  भारत तेरे टुकड़ें होंगे हजार। भारत तेरी बर्बादी तक जारी रहेंगी यह जंग आदि आदि।

आज देश के विश्वविद्यालयों में जो वातवारण तैयार किया जा रहा है उसके पीछे देशद्रोही विश्वासघाती परम्परा के वाहक तत्व वामपंथियांे व अब उसमें कांग्रेस के नौसिखिये विदेशी महिला के गर्भ से पैदा हुए राहुली गांधी भी शामिल हो गये हैं। ऐसी साजिशे रचनें में अब आम आदमी पार्टी का नेता अरविंद केजरीवाल भी शामिल हो गया है। अब तक जो फुटेज प्राप्त हई है उससे साफ पता चल रहा है कि गुलमेहर की पटकथा पूरी तरह से आम आदमी पार्टी ने ही लिखी थी। अभिव्यक्ति की आजादी वाले आखिर चाहते क्या हंै। इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया से लेकर टी वी चैनलों में तो खूब जोरदार बहस प्रारम्भ हो गयी है। देश के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को भी अपना संदेश देना पड़ गया। उन्होनें सही कहा है कि देश के विश्वविद्यालयों में तार्किक बहसें होनी चाहिये वहां पर हिंसा का कोई स्थान नहीं है। 

राष्ट्रवाद व आजादी पर केंद्रीय मंत्रियांे के बयान भी आ गये हैं व आ रहे हैं लेकिन इन बयानों के पिवरोध में कुछ फिल्मी हस्तियों ने जिस प्रकार से बयान बाजी के हैं वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। फिल्म अभिनेता जावेद अख्तर व नसीरूददीन शाह जैसे दो टके के अभिनेताओं ने अभिव्यक्ति की सीमाओं की हदें पार कर दी हैं। यह वही लोग हंै जो अफजल गुरू की मौत व याकूब मेनन की फांसी पर रोंक लगाने के लिए देश का माहौल तक खराब करने के लिए तैयार हो जाते है। यह लोग भारत का नमक खाते है। यहां से पैसा कमाते है। अपना नाम कमाते है और यही लोग देशद्रेही हरकतों पर उतर आये हैं। गुलमेहर की बातों में यदि जरा सा भी सच्चाई है तो वह आरोपयिों पर अदालत में आरोप सिद्ध करके दिखा दें वह  तो आरोप लगाकर भाग खड़ी हुई है। पूरे देश में आग लगाकर। सबसे पहले तो गुलमेहर को ही देश में अशांति और युद्ध का वातावरण पैदा करने के लिए देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिये। आज जो अरविंद केजरीवाल इस लड़की के समर्थन में खड़े दिखलायी पड़ रहे हैं उन्हें पहले अपने गिरेबान में झंाकना चाहिये क्योंकि उन्हीं के मंत्री सैक्स स्केंडल में फंसंे, महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करते हैं। अभी सोमनाथ भारती का कोई भूला नहीं है। अरविंद केजरीवाल आज बेंपेदी का लोटा हो गया है। आम आदमी पार्टी दिल्ली विश्वविद्यालय का चुनाव हार चुकी है। वह वहां पर अपनी पैठ बनाना चाह रही है तो उसने विद्यार्थी परिषद का चरित्र हनन करने की साजिश रच डाली। 

यह देश का एक बेहद कठिन व दुर्भाग्यपूर्ण दौर है कि वर्तमान में भारत में देशविरोधी नारे लगाने वालों व की भीड़ लग गयी है। ऐसे तत्वों को राजनैतिक समर्थन भी हासिल हो रहा है। यह लोग आतंकियों के प्रति हमदर्दी दिखाते हैं और उनके पीछे उने समर्थकों की फौज खड़ी हो जाती है। खबरें यह भी हैं कि आने वाले दिनों में आतंकवादी समर्थक सांसदों ने गुलमेहर  की आड़ में पीएम मोदी की सरकार को घेरने के लिए संसद ठप करने की भी निर्लज्ज योजना बना ली है। आज यह सब लोग केवल भाजपा व हिंदूवादी संगठनों की देशभर में पराजय देखना चाहते हैं। यह सभी वही लोग है। जिन्हांेनें 2014 के लोकसभा चुनावों में पीएम मोदी का विरोध किया था। दुख की बात है कि जब आतंकवादी हमला करते हैं या फिर सेना के जवान को शहीद कर देते है। तो कोई नहीं बोलता लेकिन देश में पहली बार एक ऐसी सरकार आयी है जो  देश के जवानों के साथ खड़ी हुई है। इन असामाजिक तत्वों को यह सरकार रास नहीं आ रही है। इन तत्वों को एक सनातनी पीएम स्वीकार नहीं है। आज जो लोग हमको चाहिये आजादी के नारें लगा रहे है। वे लोग केवल इसलिए बोल पा रहे हंैं क्योेकि हमारे देश का जवान सीमा पर चैबीसांे घंटे पहरा दे रहा है। आज जो तथाकथित लोग शांति के नाम पर आजादी चाहिये के नारे लगा रहे है। वे अपने राजनैतिक आकाओं की हसरतांे को ही पूरा कर रहे हैं।  आज गुरमेहर जैसी लड़कियां केवल डिजाइनर नेताआंें की रखैल बनकार ही रह गयी हंै। जब केजरीवाल जैसे आका से आदेश मिला तो वह अपने काम में लग गयीं और जब देश में आग लग गयी तो अपने कदम वापस खींच लिये। पूरे प्रकरण में गुरमेहर ने जिस प्रकार से अपने कदम वापस खीचे है। वह एक प्रकार से सुनियोजित साजिश व भविष्य के ड्रामे का हिस्सा भर है। जिस प्रकार से हैदराबाद के रोहित वेमुला कांड का हश्र हो रहा है उसी प्रकार गुलमेहर का होना तय है। 

आज गुलमेहर की आढ़ में भारत  विरोधी ताकतों ने जो अपना रूप दिखाया है उसका अंत ही होने वाला है। ऐसी विकृत ताकतें भरत का माहौल तो खराब कर सकती है। लेकिन भारत को महाशक्ति बनने से नहीं रोक सकती। इस बात कोई मतलब ही नहीं है कि हमारे  पिता को पाकिस्तान ने नहीं युद्ध ने मारा। अभी गुरमेहर बहुत नादान बच्ची है। वह बस केवल बने बनाये राजनैतिक खेल का शिकार हो गयी है। उसे अभी सही इतिहास नहीं मालूम। उसे नहीं पता कि बिना युद्ध के शांति नहीं कायम की जा सकती। गुरमेहर की हरकतों से आज दिवंगत जाबांज सैनिकों की आत्मायें रो रही होंगी। 

आज दिल्ली विवि व रामजस कालेज में एक के बाद एक मार्च निकाले जा रहे हंै। वामपंथी व व विद्यार्थी परिषद के नेतृत्व मंे छात्रों के दो धड़े आमने-सामने हो गये हैं। विद्यार्थी परिषद के प्रवक्ता का मानना है कि दिल्ली विवि  के रामजस कालेज में हाल की हिंसा बाहरी तत्वों के बहकावे का परिणाम है और राष्ट्रविरोधी तत्वांें ने सारा दोष हमारे ऊपर मढ़ दिया है। सोशल मीडिया मंे जिस प्रकार से राष्ट्रवाद व देशद्रोह पर संग्राम छिड़ गया है वह भी निंदनीय व दुर्भाग्यपूर्ण है। इस घटना के बाद देश के सभी असमाजिक तत्व एक बार फिर एक्सपोज हो गये हैं। अब समय आ गया है कि जो देशद्रोही असामाजिक तत्व बार-बार इन हरकतों कोे अंजाम दे रहे हैं व माहौल खराब कर रहे हैं उन सभी तत्वों को पूरी तरह से कुचल दिया जाये। आज देश में जिस प्रकार के देशद्रोहियों की भारी भरकम फौज खड़ी हो गयी हैं उससे पाकिस्तानी खुफिया एजंेसी आईएसआई भी चकित हो रही होगी कि अब भारत में अपना एजेंडा आगे बढ़ाने का उसका काम कितना आसान हो गया है।

(उपुर्यक्त लेख लेखक के निजी विचार हैं। आवश्यक नहीं है कि इन विचारों से आईपीएन भी सहमत हो।)

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