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दुनिया वैसी है जैसा हम उसके बारे में विचार रखते हैं!
By Deshwani | Publish Date: 3/3/2017 11:56:12 AM
दुनिया वैसी है जैसा हम उसके बारे में विचार रखते हैं!

प्रदीप कुमार सिंह 

आईपीएन। यह एक शैक्षिक जगत की अच्छी खब़र है कि अब काॅलेज बीटेक छात्रों को मुफ्त में पीजी और पीएचडी कराएंगे और नौकरी की गारंटी देंगे। पढ़ने के दौरान छात्रवृत्ति भी दी जाएगी। योजना इसी साल से शुरू हो जाएगी। इंजीनियरिंग संस्थानों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने नई योजना तैयार की है। वहीं दूसरी ओर अगले महीने से चुनिंदा शहरों के लोग पासपोर्ट बनवाने के लिए डाकघरों में आवेदन कर सकेंगे। यह विदेश मंत्रालय की महत्वकांक्षी योजना के अन्तर्गत किया जा रहा है। आज की युवा पीढ़ी सारी दुनिया में घूम-घूमकर अपनी प्रतिभा का सर्वोच्च प्रदर्शन करना चाहती हैं। युवा पीढ़ी को देशों की सीमाओं से आजाद करना चाहिए। 

एक रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है कि 89 प्रतिशत लोग अपने आॅफिसों में रोबोट की मदद चाहते हैं ऐसे लोग रोबोट को नौकरियां खत्म होने का कारण नहीं मानते हैं, बल्कि वो इस कदम को सकारात्मक मानते हैं खास बात यह है कि ऐसा मानने वाले लोगों में भारतीय भी शामिल हैं। साॅफ्टवेयर डवलपमेंट कंपनी एडोब द्वारा जारी की गई फ्यूचर आॅफ वर्क स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक, लोग काम के फायदे के लिए आदमी और मशीन की मदद के लिए तैयार हैं। रोबोट तथा आधुनिक मशीनों को अब अत्यधिक श्रम से तथा जोखिम से भरे कामों में लगाना चाहिए। इंसान को कला, संगीत, इनोवेशन तथा मानवीय गुणों को विकसित करने वाले कार्यों को करने के लिए स्वतंत्र छोड़ देना चाहिए। रोटी के लिए इंसान को कठिन श्रम करने की शर्त से अब मुक्त करना चाहिए। 

गुड़गांव के 13 वर्षीय अवी दयानी और 12 वर्षीय नक्ष कोहली स्कूल जाने वाले ये दो बच्चे एप कंपनी के मालिक हैं। सुनकर थोड़ी हैरानी होती है, लेकिन इस देश में सच में ऐसे कुछ होनहार बच्चे हैं, जो पढ़ाई के साथ अपनी कंपनियां चलाते हैं। इन बच्चों ने एक काॅल पर घर में काम करने वाली नैनी से लेकर ट्रैफिक कम करने तक के लिए अनोखे एप बना डाले हैं। आज छोटे-छोटे बच्चों में अपनी प्रतिभा दुनिया को दिखाने की गजब का जज्बा है। संचार तथा सूचना क्रान्ति इन बच्चों को आगे बढ़ने में भरपूर सहयोग कर रही है। कुदरत में इंसान को देने के लिए भरपूर है। आवश्यकता है हम जो भी दिल से चाहते हैं उससे मानव जाति का भला हो। ऐसे भले इंसान की मदद करने के लिए कुदरत भी व्याकुल रहती है। 

चीन ने भारत के रिकाॅर्ड सैटेलाइट लाॅन्चिंग की जमकर तारीफ की है। चीनी स्टेट मीडिया ने कहा है कि भारत ने रिकाॅर्ड सैटेलाइट लाॅन्च करके उससे बेहतर काम को अंजाम दिया है। इस टेक्नोलाॅजी से चीन के स्पेस प्रोग्राम में तेजी आएगी। साथ ही भारत का ये कदम स्पेस में छोटे सैटेलाइट भेजने में मील का पत्थर साबित होगा। बता दें कि 15 जनवरी को इसरो ने 104 सैटेलाइट भेजकर वल्र्ड रिकाॅर्ड कायम किया था। भारत चांद पर दो अंतरिक्षयान भेज चुका है। भारत अबकी बार चांद पर रोबोट भेजकर रिकाॅर्ड बनायेगा। 

लोगों को भूलने की बीमारी होती है। यह एक ऐसी बीमारी है, जिसमें लोग चेहरे को भी नहीं पहचान पाते। कहा जाता है कि इस दुनिया में याद रखने वाले भी मिलते हैं और भूल जाने वाले भी। वैसे यह एक नैतिक वाक्य है, जो याद रखने और भूलने वालों को अच्छे और बुरे की नजर से देखता है। इस नैतिकता से अलग याद रखने व भूलने के अपने तर्क होते हैं और अपना एक जीव विज्ञान होता है। आपको ऐसे बहुत से लोग मिलेंगे, जो बातों को भूलते ही हैं। लोगों की चेहरा भूलने की समस्याओं को हम अक्षमता की तरह देखने लगते हैं, जबकि वह अक्षमता नहीं, भिन्नता है और एक अलग तरह की क्षमता है। कुदरत ने प्रत्येक इंसान को यूनिक बनाया है। आवश्यकता है अपनी उस खूबी को पहचानकर उसका भरपूर उपयोग करने की। 

रिसर्च से खुलासा हुआ है कि नींद के दौरान हमारा दिमाग बीस प्रतिशत तक सिकुड़ जाता है ताकि जागने के बाद यह नई चीजें सीखने की क्षमता को बनाए रखे। हम अपने जीवन का एक तिहाई हिस्सा नींद में सोते हुए ही गुजार देते हैं। नीद के दौरान हमारा दिमाग अगले दिन के लिए खुद को तैयार कर रहा होता है। दिमाग को रीसेट करने के लिए इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। यह जरूरी है ताकि दिमाग पर सूचनाओं, घटनाओं का ज्यादा भार ना पड़ सके और यह बिगड़ ना सके।

गर्थ डेविस को डेब्यू फिल्म ‘लायन’ से अंतरराष्ट्रीय स्तर की ख्याति मिल रही है। इस साल के आॅस्कर के लिए लाॅयन को छह नाॅमिनेशन मिले हैं। फिल्म के ज्यादातर हिस्से भारत में ही फिल्माये गए हैं। कनाडा और सिंगापुर समेत कई देशों में रिलीज के बाद 24 फरवरी को फिल्म भारत में रिलीज हुई है। इसी को लेकर गर्थ चर्चाओं में हैं। यह फिल्म सारू ब्रियरली की किताब ‘अ लाॅन्ग वे होम’ पर आधारित है। फिल्म में एक ऐसे बच्चे की कहानी को दिखाया गया है जो कोलकाता की सड़कों पर खो जाता है और उसे आॅस्ट्रेलियाई दंपत्ति गोद ले लेता है। वहीं दूसरी ओर अमित मासुरकर निर्देशित राजनीतिक व्यंग्य फिल्म न्यूटन को यहां इण्टरनेशनल फेडरेशन आॅफ आर्ट सिनेमाज सीआईसीएई पुरस्कार बर्लिन, जर्मनी में दिया गया। इस फिल्म में राजकुमार राव और अंजलि पाटिल ने अभिनय किया है। ज्यूरी ने न्यूटन को अद्भुत फिल्म करार दिया।

सांसद और अभिनेत्री हेमामालिनी लखनऊ में बिल्कुल आध्यात्मिक स्वभाव में थी। हेमा लखनऊ शहर में शहीद पथ स्थित इस्काॅन के मंदिर का उद्घाटन करने आयी थी। उन्होंने कहा कि मनुष्य का शरीर पंच तत्व से मिलकर बना है। जिसमें सारे देवी-देवता मौजूद हैं लेकिन नर से नारायण का शरीर में प्रवेश तभी हो सकता है, जब उसे प्रेरणा मिले। जो मंदिर से मिलती है। मां-बाप को चाहिए कि बच्चों को बचपन से ही मंदिरों में लेकर जाएं। जिससे वो संस्कारी हो सके।    

पहली बार सरकार ने पद्मश्री जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों के लिए आवेदन की प्रक्रिया को आॅनलाइन और पारदर्शी बनाया, और कई योग्य लोग सामने आए। किसी खास राजनीतिक विचारधारा की तरफ झुकाव को किनारे करके योग्य और मेधावी लोगों को राष्ट्रीय सम्मान या पुरस्कार देना किसी भी सरकार के कामकाज का हिस्सा होना चाहिए। मगर अतीत में हमने गणतंत्र दिवस से जुड़े सम्मानों व पुरस्कारों के राजनीतिकरण पर तमाम तरह के सवाल उठते देखे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह प्रयास सराहनीय है जिसने इस सम्मानों के लिए योग्यता को एकमात्र कसौटी बना दिया।  

एक सफल जीवन के लिए हार और जीत, दोनों अनिवार्य हैं। आप कभी भी लगातार नहीं हार सकते और न ही आपको लगातार जीत ही हासिल होगी। विख्यात मनोविज्ञानी अल्बर्ट बेंडुरा कहते हैं कि हम हारने के बाद भी हार को लेकर खुद पर तरस खाने में व्यस्त रहते हैं और यह दौर जैसे ही थोड़ा लंबा खिंचता है, हमारे अवचेतन में ये चीजें पैठ जाती हैं। आगे हम हार को टालने की जुगत में काम ही अधूरे छोड़ने लगते हैं। आप सहन करने की ताकत बढ़ाएं, तो आपके अंदर जीत की ताकत खुद-ब-खुद बढ़ जाएगी। 

उत्तर प्रदेश की बेटियों ने जूडो में शानदार कामयाबी हासिल की है। एक-दो नहीं बल्कि नौ लड़कियों ने जूडो की उच्च बेल्ट यानी ब्लैक बेल्ट हासिल की है। यह पहला मौका है जब रज्य की इतनी सारी लड़कियों को एक साथ ब्लैक बेल्क मिली है। दिग्गज टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस डेविस कप में सर्वाधिक जीत हासिल करने का विश्व रिकाॅर्ड बनाने के रिकाॅर्ड से एक कदम दूर हैं। उनके पास यह मौका न्यूजीलैंड के खिलाफ शुरू होने वाले ओसनिया ग्रुप डेविस कप में होगा। महान खिलाड़ी लिएंडर पेस के विश्व के महानतम बनने के जज्बे को लाखों सलाम। 

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के कथन है कि ‘सही उद्देश्य की प्राप्ति के लिए किया गया कार्य कभी विफल नहीं होता’। ‘इस मोड़ पर ना घबरा कर थम जाइए आप, जो बात नई है उसे अपनाइए आप, डरते हैं नई राह पर क्यों चलने से, हम आगे-आगे चलते हैं, आ जाइए आप।’ एक प्रेरणादायी शेर इस प्रकार है- ‘नई दुनिया है, नया दौर है, नई है उमंग। कुछ थे पहले के तरीके तो हैं कुछ आज के ढंग। रोशनी आकर अंधेरों से जो टकराई है। अधेरे को भी बदलना पड़ा है आज अपना रंग।’

तापमान बढ़ने से ओड़िसा की चिल्का झील से विदेशी पक्षी लौटने लगे। हिमालय के पार उत्तरी यूरेशिया, कैस्पियन क्षेत्र, साइबेरिया, कजाखस्तान, लेक बैकाल, रूस के उत्तरी क्षेत्रों और उसके पड़ोसी देशों के पक्षी हर साल सर्दी में यहां आ जाते हैं और ग्रीष्म ऋतु के आने से पहले लौट जाते हैं। वहीं जयपुर स्थित जलमहल के मानसागर झील में सैकड़ों किलोमीटर दूर से आए प्रवासी पक्षियों ने डेरा डाल दिया है। यूरोप और एशिया के कुछ भागों में पाए जाने वाले रोजी पेलिकन्स पक्षियों का ये झुंड फरवरी से अपै्रल तक भारत में प्रवास करता है। पक्षियों को पूरी धरती में बेरोक-टोक घूमने की आजादी को देखकर एक गीत की पंक्ति गुनगुनाने का मन कर रहा है। पक्षी, नदिया, हवा के झोंके कोई सरहद न इन्हें रोके, सोचे हमने क्या खोया, क्या पाया इंसा होके? दुनिया ऐसी नहीं है जैसी दिखती है वरन् दुनिया वैसी है जैसा हम उसके बारे में विचार रखते हैं! आगे हमें यह भी समझना है कि इस धरती पर केवल मनुष्य का ही अधिकार नहीं है वरन् धरती पर पलने वाले प्रत्येक जीव का इस पर बराबर का अधिकार है। यह कैसा न्याय है कि हमें धरती अच्छी हालत में मिले लेकिन हम उसे आने वाली पीढ़ियों तथा जीवों के लिए खराब हालत में छोड़कर संसार से चले जाये?

(उपर्युक्त लेख लेखक के निजी विचार हैं। आवश्यक नहीं है कि इन विचारों से आईपीएन भी सहमत हो।)

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