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अमरनाथ यात्रा पर आतंकी हमला, पाकिस्तान की बौखलाहट: प्रभुनाथ शुक्ल
By Deshwani | Publish Date: 12/7/2017 11:30:39 AM
अमरनाथ यात्रा पर आतंकी हमला, पाकिस्तान की बौखलाहट: प्रभुनाथ शुक्ल

अमरनाथ तीर्थ यात्रियों पर अनंतनाग नाग के बटेंगू में हुए आतंकी हमले से पूरा देश स्तब्ध है। पाकिस्तान पोषित आतंकियों की कायराना हमले की देश भर में कड़ी भर्त्सना हो रही है। इस हमले में जहां सात श्रद्धालुओं की मौत हुई है वहीं 22 लोग घायल हुए हैं। मरने वालों में सबसे अधिक पांच महिलाएं हैं। यह हमला रात 8:20 मिनट पर अमरनाथ यात्रा से लौट रहे यात्रियों पर किया गया। आतंकियों ने पहले पुलिस की गाड़ी को निशाना बनाया| बाद में यात्रियों पर फायरिंग की। आतंकियों ने धार्मिक आस्था पर चौथी बार बड़ा हमला किया है। पाकिस्तान की पनाह में सुरक्षित बैठे आतंकी आका अपने मंसूबे को अंजाम देने में सफल हुए हैं। हमारी सुरक्षा एजेंसियों से पूरी सतर्कता के बाद चूक हुई है। हमले के बाद कई तथ्य सामने आए जिस पर विचार करना आवश्यक है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा ने इस हमले की जहां कड़ी निंदा की है, वहीं विपक्ष दलों के साथ फिल्मी हस्तियां और कश्मीरी अलगाववादी संगठनों ने इसे कश्मीरियत के खिलाफ बताया है। आतंकवादियों का आखिर मकसद क्या है? इस्लाम कभी भी अतिवाद को बढ़ावा नहीं देता है। दुनिया का हर धर्म एक दूसरे का सम्मान करते हैं। इस्लाम जेहाद और खत्ल की अनुमति कभी नहीं देता है। हिंदू और इस्लाम धर्म का मूल अतिवाद कभी नहीं हो सकता है। धर्म हिंदू हो या इस्लाम वह गलत रास्ते कभी नहीं दिखाता है। उसके मूल में लोगों का कल्याण छिपा है। लेकिन इस हमले के जरिए चरमपंथियों ने यह साबित कर दिया है कि उनका कोई धर्म नहीं होता है। उनका मकसद सिर्फ आतंक और दहशत फैलाना है।

इसके पूर्व अगस्त 2000 में पहलगाम के बेस कैंप पर हुए आतंकी हमले में 32 तीर्थयात्रियों की मौत हुई थी। दूसरा हमला जुलाई 2001 में शेषनाग गुफा पर हुआ था जिसमें 12 से अधिक लोगों की जान गई थी। जिसमें तीन महिलाएं और दो पुलिस अफसर मारे गए थे। हमले को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी, बावजूद 2002 में पहलगाम में हुए चरमपंथी हमले में जहां नौ श्रद्धालुओं की मौत हुई जबकि 30 भक्त घायल हुए। इस बार के हमले में सात यात्रियों में पांच महिलाओं की मौत हुई है। इस हमले को हिंदू और इस्लाम की आस्था में विभाजित कर नहीं देखा जाना चाहिए। यह सिर्फ आतंकी हमला है| इसके पीछे का मकसद भारत को अस्थिर करने की साजिश है।

अमरनाथ यात्रा पूरे 45 दिन चलती है। इस बार सुरक्षा के खास प्रबंध किए गए थे, क्योंकि आतंकवादियों की तरफ से अमरनाथ यात्रा को लेकर लगातार मिल रही धमकियों को लेकर सुरक्षा को लेकर केंद्रीय गृहमंत्रालय काफी सतर्क था। लेकिन आतंकियों की साजिश के आगे हमारी सुरक्षा व्यवस्था नाकाम रही है। 15 साल बाद चौथी बार यह हमला हुआ है। पूरे 300 किमी लंबे यात्रा मार्ग इस बार सेना भी लगाई गई थी। 

इसके अलावा पैरामिलिटी फोर्स के जवानों के अलावा जम्मू-कश्मीर राज्य के 14 हजार जवान यात्रियों की सुरक्षा में तैनात किए गए थे। सीआरपीएफ और बीएसएफ की 100 टुकडिय़ों को तैनात किया गया है। ड्रोन कैमरों से पूरे यात्रा की निगरानी की जा रही है। उस स्थिति में आतंकी हमला हमारी सुरक्षा चूक की तरफ इशारा करता है। खुफिया एजेंसियों की लाख चेतावनी के बाद इस पर गौर नहीं किया गया। कहा यह जा रहा है कि जिस बस पर आतंकी हमला हुआ है वह श्राइन बोर्ड में पंजीकृत नहीं थी। इसलिए यात्रियों के जत्थे को जिस तरह सुरक्षा प्रदान की जाती है वह नहीं मिल पाई। लेकिन सुरक्षा में लगे अधिकारी और जवानों में उस पर ध्यान क्यों नहीं दिए? सात बजे के बाद यात्रा के रास्ते किसी वाहन को गुजरने की अनुमति नहीं रहती है उस स्थिति बस कैसे अमरनाथ से वैष्णों देवी जा रही थी। यह बात आ रही है कि बस यात्रियों के जत्थे में शामिल थी लेकिन का टायर पंचर हो जाने की वजह से वह वक्त से नहीं निकल पाई थी। अगर ऐसी बात थी उसे वहीं रोक क्यों नहीं दिया गया?

आतंकी हमला पुलिस टीम पर हुआ है| इसके बाद बस को निशाना बनाया गया है। फिर सुरक्षा में लगे जवानों ने यह जानने की कोशिश क्यों नहीं किया कि, वक्त गुजने के बाद भी बस आगे कैसे निकल रही है। क्या सिर्फ पंजीकृत वाहनों को ही सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है बाकि को भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है। उस स्थिति में जब पूरा इलाका आतंकी जोन की जद में हो। यह जांच का विषय है सुरक्षा एजेंसियां अपनी जबाबदेही से बच नहीं सकती हैं। घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जिसकी वजह से निर्दोष यात्री आतंक की वलि चढ़े हैं उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। 

आतंकी हमले के खिलाफ पूरा देश एकजुट है। पाकिस्तान भारत की बढ़ती ताकत से बौखलाया है। पीएम मोदी की अमेरिका और इजराइल यात्रा से वह हिल गया है। आतंकवाद पर ग्लोबल स्तर पर भारत को मिलते समर्थन से उसकी हवा गुल हो गई है। दूसरी वजह मालाबार तट पर अमेरिका, जापान और भारत के संयुक्त सैन्य अभ्यास से भी पाकिस्तान और चीन की जमीन हिल गई है। जिसकी वजह भारत को आतंकी हमले से अस्थिर करने की नापाक कोशिश की जा रही है। भारत से सीधा मुकाबला करने में पाकिस्तान सक्षम नहीं है। घाटी में बुरहानवानी की बरसी में कोहराम मचाने की साजिश को सुरक्षा बलों की तरफ से नाकाम करने के बाद उसने अमरनाथ यात्रियों को निशाना बनाया है। बुरहानवानी की बरसी और आतंकी चेतावनियों के बाद अमरनाथ यात्रा को 07-08 जुलाई को रोक दिया गया था। 09 जुलाई को कड़े सुरक्षा बंदोबस्त में यात्रा शुरु की गई। इस यात्रा में गुजरात के यात्री मारे गए हैं। बस में 50 से अधिक तीर्थयात्री सवार थे, लेकिन बस चालक की दिलेरी से काफी लोगों की जान बच गई। क्योंकि आतंकी हमले के वक्त चालक ने बस की गति बढ़ा दी थी, जिसकी वजह से दूसरे लोगों की जान बच गई। पाकिस्तान इस धार्मिक हमले के जरिए कश्मीर के लोगों की धार्मिक भावनाएं भडक़ा अलगाववाद को हवा देना चाहता है। 

(ये लेखक के अपने विचार हैं| )

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