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बिहार
किउल में नया ब्रिज तैयार होने पर सौ वर्षों से भी अधिक पुराना ब्रिज को किया गया बन्द
By Deshwani | Publish Date: 10/5/2020 10:56:06 PM
किउल में नया ब्रिज तैयार होने पर सौ वर्षों से भी अधिक पुराना ब्रिज को किया गया बन्द

समस्तीपुर उमेश काश्यप। ईसीआर के किउल में बना पुराना किऊल ब्रिज को दस मई से बंद कर दिया गया है तथा इसके बदले नया किऊल ब्रिज को रेल परिचालन के लिए चालू कर दिया गया है। ईसीआर के सीपीआरओ राजेश कुमार ने बताया कि आठ मई को नया किऊल ब्रिज पर ट्रायल रन किया गया था जो पूरी तरह सफल रहा। अब ट्रेनों के परिचालन के लिए पूरी तरह फिट पाते हुए नए किऊल ब्रिज पर रविवार को (10 मई 2020) से आधिकारिक रूप से ट्रेनों का परिचालन शुरू हो गया है। इस पुल से किऊल-लखीसराय के बीच अप एवं डाउन दिशा में प्रतिदिन 150 यात्री ट्रेनें तथा मालगाड़ियों का परिचालन किया जाता है। 

 
 
सीपीआरओ ने बताया कि हालांकि 17 मई तक सभी प्रकार की रेल सेवाएं स्थगित हैं, परंतु वर्तमान में इस रेलमार्ग पर चलने वाली मालगाड़ियां और कुछ श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का परिचालन नए किऊल रेल पुल से किया जाएगा। 17 मई के बाद जब भी ट्रेनों का परिचालन प्रारंभ होगा तो सभी ट्रेनों की आवाजाही नए रेल पुल से ही होगी। अब नए किऊल ब्रिज से ट्रेनों का संरक्षित परिचालन हो सकेगा। साथ ही ट्रेनों की अधिकतम गतिसीमा में वृद्धि का मार्ग प्रशस्त हो गया है। अब इस पुल से ट्रेनों का परिचालन अधिकतम 110 किलोमीटर प्रतिघंटा तक की गति से किया जा सकेगा । 
 
 
 
सौ वर्षों से अधिक था पुराना: किउल-लखीसराय ब्रिज होकर स्टाफ स्पेशल गुजरी। इस प्रकार इस ऐतिहासिक पुल से गुजरने वाली यह अंतिम रेल सेवा  बनी। सौ वर्षों से भी अधिक अवधि के दौरान इस पुल से अनगिनत यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों के गुजरने तथा करोड़ों यात्रियों के जीवन का छोटा सा हिस्सा बनने के साथ यह पुल रेलवे की लंबी विकास यात्रा का साक्षी रहा है। अपनी स्मरणीय यात्रा के बाद अब यह पुल भारतीय रेल के गौरवशाली अतित का एक हिस्सा बन जाएगा।  पुराना किऊल ब्रिज अपने आप में कई महत्वपूर्ण यादों को समेटे हुए है । पूर्वी भारत को पश्चिमी भारत से जोड़ने में अपना अहम योगदान देते हुए सौ वर्ष से भी अधिक इसपर सफलतापूर्वक ट्रेनों का परिचालन होता रहा। परंतु काफी पुराना ब्रिज हो जाने के कारण इसमें कई खामियां आ गई थीं जिसके फलस्वरूप संरक्षा के दृष्टिकोण से ट्रेनों की आवाजाही पर असर पड़ने लगा था।  इसी का परिणम था कि ट्रेनों का परिचालन नियंत्रित गति के साथ अत्यंत ही सावधानीपुर्वक किया जाने लगा । संरक्षा के दृष्टिकोण से बड़ी मालगाड़ियों का परिचालन स्थगित कर दिया गया था।
 
 
 
विदित हो कि कोरोना संक्रमण के दौरान भी रेलवे के इंजीनियर्स, कर्मचारियों तथा श्रमिकों के प्रयास से ही इतनी जल्दी ये महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हो पाई है । इस दौरान पूर्व मध्य रेल द्वारा सामाजिक दूरी के अनुपालन को सुनिश्चित करते हुए सभी कार्य सीमित कार्यबल द्वारा कराए गए। पुल को अंतिम रूप देने में जुड़े श्रमिकों की थर्मल स्क्रीनिंग के साथ ही कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए मास्क, हैंडवाश, सेनिटाइजर जैसी सामग्रियों के साथ-साथ भोजन भी पूर्व मध्य रेल की ओर से ही उपलब्ध कराया गया।
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