ब्रेकिंग न्यूज़
कार और ट्रक की भीषण टक्कर में मुजफ्फरपुर के चार लोगों की मौत, एक अन्य घायलअमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने की प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री से की मुलाकातखुला विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ कामाख्या मंदिर का कपाट, श्रद्धालुओं ने किए मां के दर्शनअगस्ता वेस्टलैंड केस: राजीव सक्सेना को सुप्रीम कोर्ट से झटका, विदेश जाने पर लगा रोकऔषधीय गुणों से युक्त कालमेघ का करें खेती, आय के साथ रोगों के लिए नहीं जाना पड़ेगा अस्पतालबाॅलीवुड अभिनेत्री करिश्मा कपूर ने शेयर की ऐसी फोटो, इंटरनेट पर मचा धमालहाईटेंशन की चपेट में आयी बस, चार यात्रियों की मौत, 27 झुलसे, परिजनों ने की सरकार से मुआवजा की मांगगृहमंत्री शाह आज से दो दिवसीय कश्मीर दौरे पर, अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था का लेंगे जायजा
रांची
साल भर में रिम्स में मर गये 8982 मरीज
By Deshwani | Publish Date: 14/2/2018 3:34:48 PM
साल भर में रिम्स में मर गये 8982 मरीज

रांची। राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में मरीजों की मौत के आंकड़े चौंकानेवाले हैं। विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त होकर बेहतर इलाज के लिए रिम्स पहुंचे 8,982 मरीजों की वर्ष 2017 में मौत हो गयी। 

 
इनमें 5,513 पुरुष और 3,459 महिलाएं हैं. इस तरह देखा जाये, तो पिछले साल औसतन प्रतिमाह 749 और प्रतिदिन 24 मरीजों की मौत हुई है। रिम्स  के एमआरडी के आंकड़ों की मानें, तो सबसे ज्यादा मौतें मेडिसिन विभाग में हुई हैं।  यहां पिछले साल 4,657 लोगों  की मौत इलाज  के दौरान हुई। न्यूरो सर्जरी विभाग दूसरे नंबर पर आता है। इस विभाग में पिछले साल 1,633 मौतें हुई हैं। वहीं, सर्जरी विभाग में पिछले साल 997 मरीजों की  मौत हुई। 
 
रिम्स के ये आंकड़े चौंकानेवाले जरूर हैं, पर सच्चाई यह है कि यहां रेफर कर पहुंचनेवाले मरीजों की हालत काफी गंभीर होती है. कई मरीज गंभीर अवस्था में रिम्स में भर्ती कराये जाते हैं।
 
पर सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि एक साल में इतनी बड़ी संख्या में मरीजों की मौत हो जाती है, पर प्रबंधन व  रिम्स  के विभागों में इस पर चर्चा तक नहीं होती। यह जानने का प्रयास तक नहीं किया गया कि आखिर इतने  मरीज किस कारण मर रहे हैं। रिम्स प्रबंधन से जब इस बारे में पूछा गया, तो बताया गया कि इसमें आश्चर्य की बात नहीं है। 
 
मेडिकल कॉलेजों में जहां मरीजों का लोड़ रहता है, ऐसे आंकड़े आते हैं।  रिम्स राज्य का सबसे बड़ा अस्पताल है, जहां मरीजों की सबसे ज्यादा लोड़ होता है। 
 
किस महीने कितनी मौत 
 
जनवरी 711
फरवरी 640
मार्च 778
अप्रैल 707
मई 724
जून 631
जुलाई 727
अगस्त 873
सितंबर 800
अक्तूबर 801
नवंबर 776
दिसंबर 807
 
रिम्स में 2017 में  1,283 बच्चों की मौत हुई है. रिम्स के आंकड़ों की मानें, तो  शिशु विभाग में पिछले साल  7,877 बच्चों को इलाज के लिए भर्ती कराया गया था. इनमें से जनवरी में 93, फरवरी में  65, मार्च में 100, अप्रैल में 88, मई में 106, जून में 76, जुलाई में 124, अगस्त में 157, सितंबर में 143, अक्तूबर में 111, नवंबर में 103 और  दिसंबर में 117 बच्चों की मौत  हुई है. रिम्स के शिशु सर्जरी विभाग में 29 बच्चों की मौत हुई है. यहां 661 बच्चों को भर्ती कराया गया था. इनमेें 496 बच्चों की सर्जरी की गयी।
वार्षिक रिपोर्ट 2017 
विभाग भर्ती हुए मौत 
मेडिसिन 24,474 4,657
शिशु 7,877 1,283
सर्जरी 12,553 997
न्यूरो सर्जरी 8,357 1,633
कार्डियोलॉजी 3,618 161
स्त्री विभाग 10,806 105
हड्डी 4,686 89
शिशु सर्जरी 661 29
कैंसर 1,386 10
स्कीन वीडी एंड एसटीडी 566 5
यूरोलॉजी 559 5
टीबी एंड चेस्ट 312 3
इएनटी 855 5
 
देश के सबसे बड़े अस्पताल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में  प्रतिदिन औसतन 10 मरीजों की मौत होती है. वहीं, पीजीआइ चंडीगढ़ में  प्रतिदिन औसतन 13 मरीजाें की मौत होती है।
 
रिम्स में डॉक्टरों की संख्या करीब 430 है. इनमें 270 सीनियर डॉक्टर हैं. वहीं ट्यूटर व एसआर की संख्या 150 के करीब है. इसमें क्लिनिकल व नॉन-क्लिनिकल डॉक्टर दोनों है।
 
रिम्स में निजी अस्पतालों से गंभीर अवस्था में मरीज को रेफर कर भेज दिया जाता है। हम मरीज को लौटा नहीं सकते है, इसलिए भर्ती लेना पड़ता है. निजी अस्पतालों के कारण मौत का आंकड़ा सात फीसदी से ज्यादा रहता है। इसलिए रिम्स का आंकड़ा बढ़ता है. इस पर कोई बड़े फैसले की अावश्यकता है। 
 
-डॉ आरके श्रीवास्तव, निदेशक रिम्स
image
COPYRIGHT @ 2016 DESHWANI. ALL RIGHT RESERVED.DESIGN & DEVELOPED BY: 4C PLUS