रांची
आरोपी अधिकारियों को हटाने को लेकर विधानसभा में हंगामा
By Deshwani | Publish Date: 19/1/2018 3:35:52 PM
आरोपी अधिकारियों को हटाने को लेकर विधानसभा में हंगामा

रांची (हि.स.)। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन शुक्रवार को भी राज्य के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को पदमुक्त करने की विपक्ष की मांग को लेकर सदन की कार्यवाही बाधित हुयी और प्रश्नकाल नहीं चला ।
कार्यवाही शुरू होते ही झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के स्टीफन मरांडी और झारखंड विकास मोर्चा के प्रदीप यादव समेत अन्य विपक्षी विधायकों ने मुख्य सचिव राजबाला वर्मा, पुलिस महानिदेशक डीके.पांण्डेय और एडीजी अनुराग गुप्ता के खिलाफ लगे पद से दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के आरोपों का मामला उठाते हुए इन तीनों अधिकारियों को अविलंब पद से हटाने की मांग की। विपक्षी विधायकों ने इन तीनों से वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यकाल की उच्चस्तरीय जांच की भी मांग की ।
नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने कहा कि जिस मुद्दे को विपक्ष लगातार उठा रहा है और सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं ,उस मुद्दे पर सदन में सवाल उठाने पर विपक्षी विधायकों को कहा जा रहा है कि यह उचित प्लेटफार्म नहीं है । उन्होंने कहा कि यदि विपक्षी विधायक इस मुद्दे को सदन में नहीं उठाएंगे तो अपनी बातों को कहां रखेंगे । उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष की ओर से यह बताया जा रहा है कि जो व्यक्ति सदन में मौजूद नहीं है उसके बारे में यहां कोई टिप्पणी उचित नहीं है लेकिन वे यह बताना चाहेंगे कि सदन में गरीबों को अनाज पेयजल और अन्य मुद्दों को लेकर चर्चा होती है ,वह भी सदन में मौजूद नहीं होते हैं लेकिन उनके बारे में चर्चा होती है ।
सोरेन ने कहा कि उन्हें किसी अधिकारी के रवैया से कोई लेना देना नहीं है, बल्कि वह सदन की गरिमा को बचाए रखने के लिए अपनी बातों को यहां रख रहे हैं ताकि व्यवस्था बेहतर हो सके । उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष को सदन में सवाल नहीं उठाने का कोई नियम है तो बताएं या ऐसा नियम बनाया जाए तो विपक्ष की ओर से कोई सवाल नहीं खड़ा किया जाएगा । झाविमो के प्रदीप यादव ने भी इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष की बातों का समर्थन करते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने राज्य सरकार को पिछले वर्ष ही पत्र लिखा है और पद के दुरुपयोग मामले में एडीजी अनुराग गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सरकार को पत्र लिखा है ,लेकिन राज्य सरकार की ओर से अब तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है, जबकि आयोग की ओर से यह भी बता दिया गया था कि आईपीसी की किन किन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए ।
इस बीच सत्ता पक्ष के भी कई विधायक प्रश्नोत्तर काल नहीं शुरू होने पर नाराजगी जताई और अपने स्थान पर खड़ा होकर वह हंगामा करने लगे | विधानसभा अध्यक्ष ने पक्ष-विपक्ष के सदस्यों को निर्देश दिया कि वह कोई कोई व्यक्तिगत लांछन ना लगाएं और प्रश्नोत्तर काल की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने में सहयोग करें ।
इसके बावजूद सदन को व्यवस्थित नहीं देख कर विधानसभा अध्यक्ष ने सभा की कार्यवाही 12:15 तक के लिए स्थगित कर दी और अपने अध्यक्षिय कार्यालय में विधायक दलों के नेताओं के साथ बैठक बुलाई ।


 

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