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रांची
13 वर्षों के बाद आ रहा ऐसा संयोग,नाग पंचमी 28 को
By Deshwani | Publish Date: 27/7/2017 12:00:18 PM
13 वर्षों के बाद आ रहा ऐसा संयोग,नाग पंचमी 28 को

रांची, (हि. स.)। नाग पंचमी 28 जुलाई को है। यह सुख, शांति, समृद्धि का प्रतीक है। नाग पंचमी पर सूर्य गुरु यूति ऐसा संयोग 13 वर्षों के बाद आ रहा है। यह संयोग सुख शांति और समृद्धि प्रदान करने वाला है। नाग पंचमी के दिन भगवान शिव के विधिवत पूजन से हर प्रकार का लाभ प्राप्त होता है।
विधिवत शिव पूजा करने से लाभ मिलेगा, जिसकी कुंडली में काल सर्प दोष के कारण जीवन में अनके प्रकार की परेशानियां आती हों, नौकरी और व्यापार में रुकावट हो, राहु के महादशा में केतु का अंतरदशा और केतु के महादशा में राहु की अंतरदशा हो, इसके कारण दुर्घटना, पति- पत्नी में वियोग हो तो बुधवार को राहु काल में शिव की आराधना करनी चाहिए। इस संबंध में पंडित रामदेव पांडेय का कहना है कि ऐसा संयोग बार-बार नहीं आता। ऐसा संयोग भक्तों के लिए वरदान के समान है। नागपंचमी के दिन तीन धातुओं से बना नाग- नागिन भगवान शिव पर चढ़ाकर पूजन करना शुभ रहेगा। प्रत्यक्ष नाग का पूजन एवं नाग को दूध पिलाना शास्त्र में वर्जित बताया है। अत: नाग-नागिन को दूध नहीं पिलाना चाहिए। नागदेवता को सर्प यज्ञ में भस्म होने का शाप मिला था। उन्होंने बताया कि भविष्य पुराण के अनुसार देवासुर संग्राम में हुए समुद्र मंथन से उच्चैश्रवा नामक अश्व (घोड़ा) निकला था। उसे देखकर नाग माता कद्रू ने अपनी सौत विनता से कहा, इस घोड़े का सफेद रंग है, किंतु बाल काले दिखलाई पड़ते हैं। विनता द्वारा यह बात स्वीकार न किए जाने पर दोनों में वाद-विवाद छिड़ गया।
कद्रू ने नागों से अश्व के बाल के समान सूक्ष्म होकर उच्चैश्रवा के शरीर पर लिपट जाने को कहा, ताकि वह काले रंग का दिखाई देने लगे। पुत्र नागों द्वारा विरोध करने पर कद्रू ने क्रोधित होकर उन्हें राजा जनमेजय द्वारा किए जाने वाले सर्प-यज्ञ के दौरान भस्म हो जाने का शाप दे दिया। तब ब्रह्माजी के वरदान से आस्तिक मुनि ने सर्प यज्ञ को रोककर नागों की प्राणरक्षा की।
मान्यता है कि ब्रह्माजी द्वारा पंचमी के दिन वरदान दिए जाने और पंचमी के दिन ही आस्तिक मुनि द्वारा नागों की रक्षा किए जाने के कारण पंचमी तिथि नागों को समर्पित है।
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