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कुशीनगर सीट पर जातिवाद का मुद्दा हावी, विकास का मुद्दा गौड़
By Deshwani | Publish Date: 29/4/2019 7:20:25 PM
कुशीनगर सीट पर जातिवाद का मुद्दा हावी, विकास का मुद्दा गौड़

 कुशीनगर। भानु तिवारी। कुशीनगर संसदीय क्षेत्र मे गौतम जी की और महावीर स्वामी की महापरिनिर्वाण स्थली के साथ साथ गन्ना ,गुंडा और गंडक के लिए पहचानी जाने वाली कुशीनगर लोकसभा सीट से चुनी गई कई हस्तियां की ख्यात राष्ट्रीय फलक तक पहुंच चुकी हैं। वह भी अपने कार्यों की बदौलत यहां से चुने गए कई सांसद में केवल केंद्र की राजनीति में सक्रिय रहे बल्कि केंद्रीय मंत्री और केंद्रीय राज्यमंत्री की पदवी को भी सुशोभित किया। 

 
यही नहीं कुछ ऐसे भी रहे जिन्होंने संसद पहुंचने में हैट्रिक लगाई। किन्तु इस बार कांग्रेस, गठबंधन और भाजपा के बीच होने जा रहा है। ऊंट किस करवट बैठेगा यह किसी को मालूम नहीं है। लेकिन जातिवाद की राजनीति इस चुनाव में हावी हो रही है। विकास का मुद्दा गौड़ हो चुका है। 
 
कुशीनगर गौतम बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली होने के कारण चीन जापान म्यामार सहित अन्य बौद्धिक राशियों में ख्यात प्राप्त है। जहां से हजारों सैलानी प्रत्येक वर्ष यहां दर्शन पूजन के लिए आते हैं। लेकिन 1952 से अब तक के लोकसभा चुनाव में चुने गए कई सांसद भी राष्ट्रीय फलक पर अपना और जनपद का नाम रोशन कर चुके हैं।  वर्ष 1971 में कांग्रेसी सांसद चुने गए गेदासिंह  केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री बनने के बाद जिले के तमकुहीराज तहसील के बभनौली में एशिया स्तर के केदार सिंह गन्ना प्रजनन केंद्र अनुसंधान संस्थान की स्थापना कराई। 1980 और 1984 में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीतने वाली सीपीएम सिंह केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री रहे । इसके पूर्व विधानसभा सीट से 1969 में बीकेडी से विधायक चुने गए थे।  उनके पुत्र आरपीएन सिंह वर्ष 2009 में कांग्रेसी निर्वाचित होने के बाद केंद्रीय पेट्रोलियम राज्यमंत्री और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री तथा  सड़क परिवहन राज्य मंत्री बनाए गए थे। जबकि वह पडरौना विधानसभा से 1996 से 2007 तक लगातार तीन बार विधायक भी रह चुके हैं ।पूर्व में पढ़ना और वर्तमान में कुशीनगर लोकसभा सीट पर अब तक 7 बार कांग्रेस को जीत मिली है जबकि इस सीट पर 5 बार भाजपा के खाते में संसद रहे हैं अन्य दलों के प्रत्याशियों को एक से दो बार ही संसद में जाने का मौका मिला है। और पूर्व में पडरौना लोकसभा संसदीय सीट के नाम से जाने जाने वाली पर 1952 में सोशलिस्ट पार्टी से रामजी वर्मा, इंडियन नेशनल कांग्रेस के काशी नाथ पांडे वर्ष 1957 ,1962 और 1967 में सांसद रहे। फिर कांग्रेस के ही गेंदा सिंह 1971 में सांसद चुने गए थे।
 
1977 में चुनाव हारने के बाद 1980 में हुए चुनाव में फिर कांग्रेस के कुंवर चंद्र प्रताप नारायण सिंह निर्वाचित हुए थे । बाद मे 2009 में कुशीनगर संसदीय सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार रंजीत प्रताप नारायण सिंह सांसद चुने गए और केंद्रीय राज्य मंत्री बनाए गए । इस तरह कांग्रेस को 1957,1962 ,1967 ,1971,1977 ,1984 व 2009 में जीत मिल चुकी है । हालांकि वर्ष 2014 में हुए 16वीं लोकसभा के चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार राजेश पांडे इस सीट पर भाजपा का कमल खिला पाने में सफल रहे । इसके पूर्व भाजपा से ही राम नगीना मिश्र 1991 , 1996 ,1998 और 1999 में यहां के सांसद चुने गये। यहां की जनता ने संग्राम सेनानी रह रहे रामधारी शास्त्री पर भी अपना एतबार जताया था। उन्हें जनता दल के टिकट पर वर्ष 1979 में यहां का सांसद चुना गया था । इसके अलावा बालेश्वर यादव ने वर्ष 1989 में जनता दल और 2004 में निर्दल के टिकट पर संसद का सफर किया था । उनहोंने विधानसभा चुनाव में पडरौना विधानसभा सीट से 1985 में लोक दल और 1993 में सपा से निर्वाचित हुए हैं। इस बार लोक सभा चुनाव में कांग्रेस से कुंअर आर पी एन सिंह का मुकाबला गठबंधन प्रतयाशी नथुनी कुशवाहा और भाजपा के विजय कुमार दूबे के बीच होने  वाला है।
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