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पटना
डॉ सम्पूर्णानंद बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी थे: राजीव रंजन
By Deshwani | Publish Date: 24/7/2022 11:59:12 PM
डॉ सम्पूर्णानंद बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी थे: राजीव रंजन

पटना जितेन्द्र कुमार सिन्हा। आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर जीकेसी (ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस) द्वारा कानपुर में यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय डॉ सम्पूर्णानंद की स्मृति में आयोजित व्याख्यानमाला का उद्घाटन करते हुए ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि साहित्यकार, शिक्षाविद एवं राजनेता डॉ सम्पूर्णान्द ने उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप अनेक असाधारण निर्णय लिए थे। उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉ सम्पूर्णानन्द जी का जन्म 1 जनवरी, 1890 को उत्तर प्रदेश के काशी में हुआ था। ये एक सम्भ्रान्त कायस्थ परिवार से थे | इनके पिता का नाम मुंशी विजयानन्द और माता का नाम आनन्दी देवी था। इन्होंने बीएससी की परीक्षा क्वींस कॉलेज, वाराणसी से पास करने के बाद ट्रेनिंग कॉलेज, इलाहाबाद से एल०टी० किया और एक अध्यापक के रूप में प्रेम महाविद्यालय, वृंदावन में इनकी नियुक्ति हुई। कुछ दिन बाद बीकानेर के डँगूर कॉलेज में प्रिंसपल के पद पर इनकी नियुक्ति हुई।

 
 
 
 
 
उन्होंने कहा कि महात्मा गाँधी के राष्ट्रीय आन्दोलन से प्रेरित होकर 1921 में ये काशी लौट आये और 'ज्ञानमण्डल' में काम करने लगे। 'मर्यादा',  टुडे पत्रिकाओं का सम्पादन भी इसी समय किया। इन्होंने राष्ट्रीय स्वतन्त्रता संग्राम में प्रथम पंक्ति के सेनानी के रूप में भी कार्य किया। कांग्रेस के टिकट पर 1936 में विधान सभा के सदस्य चुने गये।  1937 में शिक्षा मंत्री बने और 1955 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री। 1962 में राजस्थान के राज्यपाल के रूप में इनकी नियुक्ति हुई थी।
 
 
 
 
 
उक्त अवसर पर डॉ सम्पूर्णानंद  के प्रपौत्र डॉ शेखरानंद वर्मा ने कहा कि राज्यपाल पद से मुक्त होने पर 1967 में काशी लौट आये और अन्तिम सांस तक काशी विद्यापीठ के कुलपति पद पर बने रहे। पूर्व विधायक सतीश निगम ने कहा कि 10 जनवरी, 1969 को काशी में यह दुनिया से विदा हो गए।
 
 
 
 
 
प्रबंध न्यासी रागिनी रंजन ने कहा कि डॉ सम्पूर्णानन्द एक मर्मज्ञ साहित्यकार होने के साथ-साथ प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री और कुशल राजनीतिज्ञ भी थे। वरिष्ठ उपाध्यक्ष अखिलेश श्रीवास्तव ने कहा कि सम्पूर्णानन्द का संस्कृत, अंग्रेजी और  हिन्दी तीनों भाषाओं पर समान अधिकार था। महासचिव अनुराग सक्सेना ने जानकारी दी कि  डॉक्टर सम्पूर्णानंद फारसी और उर्दू के भी ज्ञाता थे। इन्होंने ज्योतिष, इतिहास एवं राजनीति का अध्ययन किया योग, विज्ञान एवं दर्शन सम्पूर्णानन्द का पसन्दीदा विषय था।
 
व्याख्यानमाला की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश मध्य के अध्यक्ष विवेक श्रीवास्तव ने की और संचालन प्रदेश महासचिव राजेश श्रीवास्तव ने किया। स्वागत राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष रितु खरे ने की।
 
 
 
 
 
उक्त अवसर पर ग्लोबल महिला संयोजिका मीना श्रीवास्तव, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील श्रीवास्तव, राष्ट्रीय संगठन सचिव शुभ्रांशु श्रीवास्तव, प्रदेश महिला अध्यक्ष लवली सक्सेना सहित अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।
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