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बिहार
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के अह्वान पर बैंक कर्मियों की दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन राज्यभर में प्रदर्शन
By Deshwani | Publish Date: 16/12/2021 11:49:44 PM
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के अह्वान पर बैंक कर्मियों की दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन राज्यभर में प्रदर्शन

पटना। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर बैंक कर्मियों की दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के कारण बिहार राज्य के विभिन्न जिलों में भी बैंकिंग कामकाज प्रभावित हुआ है। भारतीय स्टेट बैंक समेत विभिन्न सार्वजनिक बैंकों के कर्मी हड़ताल केबैंक ऑफ इंडिया की टीम दिशा मिल रही जिसमें मुख्य रुप से अभिषेक दुबे, मुख्य प्रबंधक अभिजीत तिवारी, अधिकारी खुशबू कुमारी, अधिकारी अभिजीत कुमारी, अधिकारी अंकुर श्रीवास्तव, अधिकारी सुबोध कुमार प्रधान, रोकडिया मुकेश कुमार, रंजीत कुमार, चंद्रभूषण तिवारी, शशि प्रभा ,सुकृति गोपाल शर्मा एवं सुरक्षा प्रभारी अशोक कुमार सिंह सहित सैकड़ों लोग धरना प्रदर्शन में मौजूद रहे। पहले दिन आज विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन किया।



मोतिहारी संवाददाता अमित कुमा गुड्डू के अनुसार यूएफबीयू की हड़ताल के प्रथम दिन पूर्वी चम्पारण जिले में  5500  करोड़ का बैक कारोबार प्रभावित। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और ग्रामीण  बैंक की 134 शाखाओ में लटके रहे ताले। 1500 बैंक ऑफिसर्स और कर्मचारी हुए हड़ताल में शामिल।  महिला बैंक कर्मियो ने रैली में बढ़चढ़ कर लिया।

 गुरुवार को हड़ताल के प्रथम दिन जिले में  1500  से अधिक बैंक ऑफिसर्स और कर्मचारी  हड़ताल में सामिल हुए जिसके कारण 5500 करोड़ के कारोबार प्रभावित हुए साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र व ग्रामीण बैंक  की 134 शाखाओ में पुरे दिन ताले लटके रहे। चेक क्लियरिंग भी नहीं हो सका। आज एटीएम में कैश फीड नहीं होने के कारण  शाम होते ही अधिकांश एटीएम के सामने 'नो कैश' की नोटिस लग गई।


 इस अवसर पर मुख्य मार्ग में रैली निकाली गई जो स्टेट बैंक  की बाजार शाखा से शुरु हुई और बापू धाम शाखा पहुँच कर सभा में परिवर्तित हो गई। जिसे सम्बोधित करते हुए यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के संयोजक ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक मास बैंकिंग और निजी बैंक क्लास बैंकिंग करते हैं। जिससे निजी बैंक अबतक आम आदमी से दूर हैं। जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक जन जन तक पहुंच कर देश के आर्थिक समाजिक विकास में बहुमूल्य योगदान किया है।



निजी बैंक का एक मात्र उद्देश्य मुनाफा कमाना है जिसके कारण बैंक कर्मियों के आन्दोलन को  जन समर्थन भी मिल रहा है। बैंक के निजीकरण  करने से गांव,गरीब, किसान, कारीगर, छात्र,  बेरोजगार और मजदूरों के आर्थिक सामाजिक विकास पर बहुत  ही बुरा असर पड़ेगा।
इसलिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंको का निजीकरण एक आत्मघाती कदम है। इसे रोकने के लिए बैंक यूनियन्स अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए तैयार हैं।



रैली का नेतृत्व मुख्य रूप से जिले की महिला बैंककर्मी निशा वर्मा, श्वेता और प्रियंका पाण्डेय  ने किया जिसमें  विभिन्न बैंको से  बैंक कर्मी पंकज कुमार श्रीवास्तव, सुरेन्द्र सिंह,  धनन्जय भारती ,विकास रंजन, अजय कुमार सिंह,  अमित कुमार, आदित्य कुमार, अभिजीत तिवारी, अशोक कुमार, नीतीश कुमार, अजित कुमार, निरज कुमार, गुड्डू कुमार,  एन के भट्ट, प्रेम कुमार,  सीपी यादव, विनोद कान्त सिंह, अजय वर्मा, कुन्दन कुमार, अमीत रंजन,कृष्णा, शैलेश कुमार और आलोक कुमार के नेतृत्व में भाग लिए।

 

 

बैंक ऑफ इंडिया की टीम दिशा मिल रही जिसमें मुख्य रुप से अभिषेक दुबे, मुख्य प्रबंधक अभिजीत तिवारी, अधिकारी खुशबू कुमारी, अधिकारी अभिजीत कुमारी, अधिकारी अंकुर श्रीवास्तव, अधिकारी सुबोध कुमार प्रधान, रोकडिया मुकेश कुमार, रंजीत कुमार, चंद्रभूषण तिवारी, शशि प्रभा ,सुकृति गोपाल शर्मा एवं सुरक्षा प्रभारी अशोक कुमार सिंह सहित सैकड़ों लोग धरना प्रदर्शन में मौजूद रहे।

 

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