ब्रेकिंग न्यूज़
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने नागालैंड में मोन मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखीराष्ट्रपति ने गुरु रविदास जयंती की पूर्व संध्या पर देशवासियों को शुभकामनाएं दींनई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में खेलों को एक गौरवपूर्ण स्थान दिया गया है : प्रधानमंत्रीसीतामढ़ी के मेजरगंज में शहीद हुए सब इंस्पेक्टर दिनेश राम का मोतिहारी के बरनावाघाट पर राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कारकोई भी सरकार किसानों को नुकसान पहुंचाने वाले कानून बनाने की हिमाकत नहीं कर सकती- श्री तोमरपुद्दुचेरी में प्रधानमंत्री ने कई विकास परियोजनाओं की शुरूआत कीसमस्तीपुर: एक मार्च से कोविड-19 टीकाकरण के तीसरे फेज की होगी शुरुआतमोतिहारी के कई पुलिस पदाधिकारी इधर से उधर, छतौनी के नये एसएचओ विजय प्रसाद राय व नगर थानाध्यक्ष बने विजय प्रसाद राय,जबकि मधुबन एसएचओ पर हुई कार्यवाई
पलामू
पलामू में पिछड़ी खरीफ की खेती
By Deshwani | Publish Date: 28/7/2017 10:16:24 AM
पलामू में पिछड़ी खरीफ की खेती

मेदिनीनगर, (हि.स.)। पलामू में एक बार फिर खरीफ की खेती पिछड़ती नजर आ रही है।
कृषि विभाग के आकड़ों की मानें तो 28 जुलाई तक जिले में निर्धारित लक्ष्य से महज छह प्रतिशत धान की रोपनी के साथ दलहनी, तिलहनी फसलें तथा मक्का की बुआई में भी 50 प्रतिशत की कमी आई है। दलहनी, तिलहनी और मक्का की बुआई पूरी पिछड़ चुकी है। हालांकि अभी धान की रोपनी के लिए कुछ समय बचा है। 
जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में अगर किसान मक्का और दलहनी-तिलहनी फसलों की बुआई करते हैं तो भी पैदावार अपेक्षा से काफी कम ही रहेगी। विभाग के आकड़ों के मुताबिक चालू खरीफ फसल के सीजन में 47 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान उगाने के लक्ष्य के लिए पर्याप्त मात्रा में बिचड़े लगाए गए। लेकिन धान की रोपनी के लिए पर्याप्त वर्षा नहीं होने से फसल की विकास गति धीमी रही। अब तक जिले में लक्ष्य से महज 3183 हेक्टेयर में धान की रोपनी हुई जिसमें चैनपुर, पांकी और मनातू गावं सबसे आगे हैं। 
दलहनी फसलों की बुआई 49,300 हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाले महज 20,535 हेक्टेयर (41.7 प्रतिशत) और तिलहन की बुआई 2390 हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 982 हेक्टेयर(41.1 प्रतिशत) में हुआ। जिले की जरूरी फसल मकई की बुआई भी लक्ष्य से काफी पीछे है। आकड़ों से पता चला कि 27,520 हेक्टेयर में मक्का की फसल लगाने का लक्ष्य था लेकिन लक्ष्य से महज 18,614 हेक्टेयर में मक्के का अच्छादन हुआ, जो लक्ष्य से 67.6 प्रतिशत है। 
दो साल से लगातार अकाल और सूखे के बाद पिछले साल भी असमय बारिश होने की वजह से खरीफ की फसल की पैदावार प्रभावित हुई थी। इस साल भी खरीफ फसल प्रभावित होने की आशंका से जिले के किसानों में खलबली मची हुई है।
image
COPYRIGHT @ 2016 DESHWANI. ALL RIGHT RESERVED.DESIGN & DEVELOPED BY: 4C PLUS