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नेपाल में कम उम्र की लड़कियों का अधिक हो रहा गर्भपात
By Deshwani | Publish Date: 12/1/2017 4:29:27 PM

विजय कुशवाहा

Nepal
नेपाल में कम उम्र की लड़कियों का अधिक हो रहा गर्भपात

 काठमांडू । नेपाल के शहरी इलाकों में युवतियों और महिलाओं के गर्भपात की घटनाएं बढ़ रही हैं। चौकानेवाली बात यह है कि इनमें 20 साल से कम उम्र की लड़कियों की संख्या ज्यादा है। काठमांडू के सरकारी व निजी अस्पतालों के अलावा गर्भपात सेंटरों के आंकड़े चिंताजनक हैं। डॉक्टरों का मानना है कि अगर इसके लिए जागरूकता अभियान नहीं चलाया गया तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। इससे पता चलता है कि नेपाल के शहरी इलाकों में उन्मुक्त समाज और पश्चिमी सभ्यता की मानसिकता हावी हो रही है। असुरक्षित यौन संबंध और शिक्षा के अभाव में ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। गर्भपात की घटनाओं से मातृ मृत्यु दर में भी वृद्धि हो रही है। 

जिला नागरिक स्वास्थ्य कार्यालय (डीपीएचओ) के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2015-16 में सरकारी व निजी अस्पतालों के अलावा गर्भपात सेटरों में 15 हजार से अधिक सुरक्षित गर्भपात कराए गए। इनमें चार हजार से अधिक 20 साल से कम उम्र की लड़कियां व 10 हजार से अधिक 20 साल से ऊपर की महिलाएं शामिल हैं। वर्ष 2014-15 में तीन हजार से अधिक 20 साल से कम उम्र की लड़कियों का गर्भपात हुआ। वहीं 2015-16 में 20 साल से कम उम्र की दो हजार लड़कियों और 20 साल से ऊपर की छह हजार महिलाओं का ऑपरेशन से गर्भपात कराया गया। 

आंकड़ों में बताया गया है कि वर्ष 2015-16 में 43 हजार से अधिक लड़कियों व महिलाओं ने अपने गर्भ का इलाज कराया। हैरत की बात यह है कि 66 प्रतिशत गर्भपात सामाजिक लोकलाज के कारण मजबूरी में तो 33 प्रतिशत गर्भपात स्वेच्छा से कराए जा रहे हैं। यह रूझान इस बात का संकेत है कि नेपाल के शहरी इलाकों की अविवाहित लड़कियों में अवैध यौन संबंध की प्रवृति बढ़ रही है। खासकर स्कूल व कॉलेज की छात्राओं में। 

डॉक्टर नरेश प्रसाद केसी की माने तो यहां का युवा वर्ग उन्मुक्त समाज व पश्चिमी सभ्यता की गिरफ्त में है। गर्भपात की बढ़ती घटनाएं इस बात का संकेत है कि इस वर्ग में असुरक्षित यौन संबंध की प्रवृति बढ़ रही है। शिक्षा का भी अभाव इसका मुख्य कारण है। इसके लिए जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। उनका कहना है कि असुरक्षित यौन संबंध और बेवजह गर्भपात लड़कियों व महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। इससे कैंसर जैसी खतरनाक व जानलेवा बीमारी हो सकती है। इसके अलावा उनमें मानसिक रोग का भी खतरा बढ़ जाता है। 

इधर, वर्ष 1996 में हुए एक सर्वे के अनुसार नेपाल में मातृ मृत्यु दर एक लाख महिलाओं में 551 है। 2006 में यह संख्या बढ़कर 281 हो गई। विश्व स्वास्थ्य संगठन के वर्ष 2012 में आयी एक रिपोर्ट में यह आंकड़ा एक लाख में 170 का था। 

 
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