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नेपाल के सात प्रदेशों में मुख्यमंत्री का चयन चुनौती, भारत के इलाकों में भी असर
By Deshwani | Publish Date: 24/1/2018 8:44:16 PM
नेपाल के सात प्रदेशों में मुख्यमंत्री का चयन चुनौती, भारत के इलाकों में भी असर

सिद्धार्थनगर, (हि. स.)। पड़ोसी देश नेपाल में पहली बार बनने जा रही प्रदेश सरकार को लेकर जनता में चर्चा तेज हो गई है और इसका असर भारत के सीमावर्ती इलाके में भी दिख रहा है। इस चुनाव को लेकर नेताओं में चुनौती व अधिकारियों में जबरदस्त आपा-धापी है। सातों प्रदेशों में बनने वाले मुख्यमंत्रियों के नामों को लेकर भी आम लोगों में जिज्ञासा बनी है।

प्रदेश संख्या 5 में वाम घटक के शंकर पोखरेल तथा प्रदेश संख्या 7 में थारू समुदाय के सीएम का बनना करीब तय हो चुका है। संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य नेपाल में नवगठित 7 राज्यों में प्रदेश सभा के चुनाव एक माह पूर्व हुए थे। इसके बाद गत दिवस विधायकों का शपथ ग्रहण भी सम्पन्न हो गया। यह प्रक्रिया पूरी होते ही सभी प्रदेशों में मुख्यमंत्री के नामों की जोरदार रस्साकस्सी शुरू हो गयी है। 
 
वाम गठबंधन के सहयोगी दल नेकपा एमाले व माओवादी ने प्रदेश संख्या 2 के अलावा अन्य सभी राज्यों में मुख्यमंत्री के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। गठबन्धन ने प्रदेश संख्या 5 से एमाले नेता व विधायक शंकर पोखरेल को संसदीय दल का नेता चुन लिया है। प्रदेश के कुल 87 विधायकों में से एमाले के 41 व माओवादी के 20 सदस्य हैं। इसके अलावा कांग्रेस 19, फोरम 5, राजपा 1 तथा जनमोर्चा के 1 सदस्य हैं। गठबन्धन के सहज बहुमत से पोखरेल का रास्ता खुला हुआ है लेकिन दांग जिले से होने के कारण प्रदेश मुख्यालय भी उनके समक्ष बड़ी चुनौती है। फिलहाल बुटवल को अस्थायी मुख्यालय बनाया गया है।
 
इसी प्रकार प्रदेश संख्या 1 से एमाले नेता भीम आचार्य व शेरधन राई के नाम सुर्खियों में है। वहां एमाले प्रमुख केपी ओली व पूर्व प्रधान मंत्री माधव कुमार नेपाल के बीच संघर्ष की स्थिति है। एमाले वहां बहुमत में है और माओवादी को जोड़ने पर दो-तिहाई बहुमत में गठबंधन हो जायगा। प्रदेश संख्या 2 में मधेशी बोलबाला है, वहां संघीय समाजवादी फोरम तथा राजपा के बीच कुछ समझौता होने की बात है जिसके तहत सीएम पद पर फोरम के लालबाबू राऊत व विजय यादव की प्रबल उम्मीदवारी है। डिप्टी सीएम एवं सभाध्यक्ष पद पर राजपा आसीन होगी। वहां 64 सीटों में मधेश गठबंधन की 35 तथा वाम की 19 व कांग्रेस की एक सीट है।
प्रदेश तीन में एमाले बहुल के अष्टलक्ष्मी शाक्य, पशुपति चौलागाई व राजेन्द्र पांडे की जोरदार चर्चा है। वाम गठबन्धन के बहुमत वाले प्रदेश संख्या 4 में एमाले के किरण गुरुंग व पृथ्वी सुब्बा गुरुंग की चर्चा है। यहां 60 सांसद एमाले के हैं लेकिन यहां कांग्रेस के कृष्णचंद्र नेपाली व बिंदु कुमार थापा टक्कर दे रहे हैं।
प्रदेश संख्या 6 में एमाले नेता यमलाल कंडेल, प्रकाश ज्वाला तथा माओवादी के महेंद्र शाही व नरेंद्र भंडारी की प्रबल दावेदारी है। वहां संसदीय दल का नेता चुने जाने तक बेहद अनिश्चितता की स्थिति है। सर्वाधिक रोचक स्थिति वाम गठबंधन के बहुमत वाले प्रदेश संख्या 7 में दिख रही है जहां भूमि पुत्र कहे जाने वाले थारू समुदाय का ही मुख्यमंत्री चुना जाना लगभग तय है। यहां माओवादी के वीरभान चौधरी और झपट बोहरा का नाम सुर्खियों में है। वहां प्रत्यक्ष निर्वाचन में 10 व समानुपातिक के 4 सांसद माओवादी के हैं। प्रदेश के कैलाली, कंचनपुर जिले से 8 थारू सांसद हैं। एमाले भी थारू जाति के ही नेता को प्रदेश की कमान सौंपने की मंशा रखे हुए है। यहां कांग्रेस के 4 व समानुपातिक के 8 समेत कुल 12 सांसद हैं जिन्होंने लाबिंग भी शुरू कर दी है।
फिलहाल नेपाल में पहली बार राज्य सरकार बनने को लेकर कई तरह का कौतूहल है। मधेशी बहुल नेपाल में उन्हें सात में से सिर्फ एक प्रदेश में ही सरकार बना पाने का मौका मिला है जबकि वामपंथियों के हाथ कई राज्यों की सत्ता लगने जा रही है। इसके अलावा माओवादी भी दूसरा पॉवर प्वाइन्ट बनने की ओर अग्रसर हैं।
 
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