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15 फरवरी 2021 तक नागरिक केन्द्रित सुधारों को पूर्ण करने वाले राज्यों को केन्द्र सरकार देगी अतिरिक्त वित्तीय सहायता
By Deshwani | Publish Date: 16/12/2020 8:06:13 PM
15 फरवरी 2021 तक नागरिक केन्द्रित सुधारों को पूर्ण करने वाले राज्यों को केन्द्र सरकार देगी अतिरिक्त वित्तीय सहायता

नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने राज्यों को विभिन्न क्षेत्रों में नागरिक केंद्रित सुधारों को पूर्ण करने के लिए समय-सीमा बढ़ा दी है। अब यदि सुधार के कार्यान्वयन के संबंध में नोडल मंत्रालय की सिफारिश 15 फरवरी, 2021 तक प्राप्त हो जाती है तो राज्य सुधार से जुड़े लाभों के लिए पात्र होगा। 

सुधारों को सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले राज्य दो लाभ प्राप्त करने के पात्र हैं। ऐसे राज्यों को प्रत्येक सुधार को पूरा करने के लिए उनके सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 0.25 प्रतिशत के बराबर अतिरिक्त ऋण की सुविधा मिलती है। इस सुविधा के तहत, सभी चार सुधारों को पूरा करने पर राज्यों को 2.14 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण का लाभ मिलता है।


भारत सरकार ने राज्यों द्वारा सुधार के लिए चार महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान की है:

•     एक राष्ट्र एक राशन कार्ड प्रणाली का कार्यान्वयन,

•     कारोबारी सुगमता सुधार,

•     शहरी स्थानीय निकाय/उपयोगिता सुधार और

•     विद्युत क्षेत्र में सुधार


इन सुधार के क्षेत्रों के संबंध में 17 मई, 2020 को राज्यों को सूचित किया गया था।


 चार में से तीन सुधारों को पूरा करने वाले राज्यों को उपलब्ध दूसरा लाभ "पूंजीगत व्यय के लिए राज्यों को वित्तीय सहायता की योजना" के तहत अतिरिक्त वित्तीय सहायता है। इस योजना के तहत, उन राज्यों के लिए 2,000 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है, जो चार में से कम से कम तीन सुधारों को पूरा करेंगे।



सुधारों को सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले राज्य दो लाभ प्राप्त करने के पात्र हैं। ऐसे राज्यों को प्रत्येक सुधार को पूरा करने के लिए उनके सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 0.25 प्रतिशत के बराबर अतिरिक्त ऋण की सुविधा मिलती है। इस सुविधा के तहत, सभी चार सुधारों को पूरा करने पर राज्यों को 2.14 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण का लाभ मिलता है।



कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए संसाधन की आवश्यकता के मद्देनजर, भारत सरकार ने मई, 2020 में राज्यों की ऋण सीमा को उनके जीएसडीपी के 2 प्रतिशत तक बढ़ाने का निर्णय लिया था। इसका उद्देश्य राज्यों को 4.27 लाख करोड़ रुपये तक के अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाने में सक्षम बनाना था। इस विशेष वितरण का आधा सुधारों से जुड़ा था। इसका उद्देश्य राज्यों को विभिन्न नागरिक केन्द्रित क्षेत्रों में सुधार करने के लिए प्रेरित करना था।

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