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अयोध्या पर फैसले से पहले CJI रंजन गोगोई ने उत्तर प्रदेश के DGP और मुख्य सचिव को किया तलब
By Deshwani | Publish Date: 8/11/2019 11:44:05 AM
अयोध्या पर फैसले से पहले CJI रंजन गोगोई ने उत्तर प्रदेश के DGP और मुख्य सचिव को किया तलब

नयी दिल्ली। अयोध्या विवाद पर फैसले को लेकर कयासों का दौर अपने चरम पर है। 17 नवंबर से पहले कभी भी सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में अपना फैसला सुना सकता है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने आज 12 बजे सुप्रीम कोर्ट में तलब किया है। दोनों अफसर विमान से दिल्ली जाएंगे। बता दें कि फैसले से पहले सीजीआई उत्तर प्रदेश की यथास्थिति की जानकारी लेंगे।

इससे पहले उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मंडलों एवं जिलों के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने अयोध्या सहित प्रदेश के अन्य जनपदों में कानून व्यवस्था की समीक्षा की। प्रदेश स्तर पर और प्रत्येक जिले में एक नियंत्रण कक्ष स्थापित कर तुरंत संचालित करने के निर्देश दिए। राज्य सरकार के प्रवक्ता के मुताबिक योगी ने कहा कि प्रदेश में शांति हर हाल में बनाए रखने के लिए अधिकारी पूरी तरह मुस्तैद और तत्पर रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। शरारती तत्वों एवं माहौल खराब करने वालों पर सख्त नजर रखी जाए।

अयोध्या विवाद पर फैसले को लेकर योगी सरकार से लेकर पूरा प्रशासनिक अमला हाई अलर्ट पर आ चुका है। अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर उत्तर प्रदेश और खास तौर पर अयोध्या में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। प्रवक्ता ने बताया कि योगी ने अयोध्या एवं लखनऊ जनपदों के लिए एक-एक हेलीकाप्टर की व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा  कि शांति समिति की बैठक के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों, धार्मिक गुरुओं, प्रबुद्धजनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं आदि के साथ संवाद स्थापित किया जाए और बारावफात के जुलूसों का शांतिपूर्ण संचालन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पर्वों एवं त्योहारों की आड़ में अव्यवस्था और अराजकता पैदा करने वालों को बख्शा न जाए और समय रहते कार्रवाई की जाए। उन्होंने सुरक्षा कड़ी किए जाने और सुचारू यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

गौरतलब है कि शीर्ष अदालत धार्मिक भावनाओं एवं राजनीति के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में 17 नवंबर से पहले फैसला सुना सकती है क्योंकि प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई उसी दिन सेवानिवृत्त हो रहे हैँ। वह राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में संविधान पीठ की अगुवाई कर रहे हैँ। बता दें कि प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता में पांच जजों की संविधान पीठ ने 40 दिनों से चली आ रही सुनवाई 16 अक्टूबर को पूरी करने के बाद अयोध्या भूमि विवाद मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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