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मुजफ्फरपुर
मुजफ्फरपुर जिलेे में बाढ़ से बागमती परियोजना की परिकल्पना हुई ध्वस्त
By Deshwani | Publish Date: 18/8/2017 4:36:28 PM
मुजफ्फरपुर जिलेे में बाढ़ से बागमती परियोजना की परिकल्पना हुई ध्वस्त

मुजफ्फरपुर, (हि.स)। इस बार जिले में आई के कारण बाढ़ बागमती परियोजना की परिकल्पना ध्वस्त हो गई है। सीतामढ़ी जिले के बैरगिनिया से मुजफ्फरपुर जिले के कटरा तक बागमती तटबंध के टूटने के अलग-अलग कारण हो सकते हैं, लेकिन यह बात अब साफ हो गई है कि सीतामढ़ी-मुजफ्फरपुर और दरभंगा जिलों को बाढ़ से बचाने में बागमती तटबंध कारगर नहीं है। 

इस बार आई बाढ़ में उफान मारती बागमती ने बैरगिनिया में तटबंध को तोड़ दिया वहीं, बेलवा घाट पर निर्माणाधीन हाई डैम के कार्यस्थल को ध्वस्त कर दिया, आगे बढ़कर उसने सीतामढ़ी के मेजरगंज, रुन्नीसैदपुर में इब्राहिमपुर-भादा डीह में भी तटबंध को तोड़ दिया और आगे मुजफ्फरपुर के कटरा में धनौर रिंग बांध व मोहनपुर गांव में तटबंध को तोड़ा। इसके कई कारण गिनाए जा रहे हैं जिसमें समय पर तटबंध की मरम्मत नहीं कराना, अभियंताओं द्वारा लापरवाही बरता जाना और नदी में पानी बेहिसाब आना, लेकिन तटबंध टूटने के इस बड़े कारण पर कोई चर्चा नहीं हो रही है कि बागमती दोनों तटबंधों के बीच उथली हो चुकी है। 

गौरतलब है कि बागमती दुनिया में सर्वाधिक सिल्‍ट बहाकर लाने वाली नदियों में से एक है। मुजफ्फरपुर जिले में तो बागमती के दोनों किनारे तटबंधों के निर्माण का अभी एक दशक भी पूरा नहीं हुआ है। इस बीच नदी में मिट़टी- बालू की इतनी ऊंची परत जमा हो गई कि अब बागमती तटबंधों के बाहर की जमीन से अधिक ऊंचाई पर बह रही है। आने वाले वर्षों में बागमती जहां चाहेगी, जिस किनारे को चाहेगी, तोेड़ डालेेगी | इस स्थिति में यह बात कहना बेमानी होेगी जिसमें कहा गया है कि सीतामढ़ी में ढेंग-बैरगिनिया, शिवहर में बेलवा घाट- दोस्तियां से लेकर मुजफ्फरपुर में औराई-कटरा और गायघाट के गांव इस बाढ़ की चपेट में नहीं आएंगे। 

उत्तर-बिहार में किसी जिले से बागमती नदी की ओर बढ़िए, 10 किलोमीटर पहले से ही बागमती की कई पुरानी धाराएं मिल जाएंगी। सर्वाधिक सिल्‍ट बहाकर लाने के साथ-साथ बागमती कदम-कदम पर धारा बदलने के लिए भी कुख्यात है। तटबंध बनाए जाने के बावजूद बागमती मनमानी कर रही है। 

धाराओं को नियंत्रित करने के लिए तटबंध बनाए गए हैं। तटबंधों के अंदर इस नदी की धाराओं के लिए 1 से 2 किलोमीटर की चौड़ाई का अंतर रखा गया है। हर साल बरसात में बेहिसाब पानी आने के कारण दोनों तटबंधों के बीच काफी दूरी रखी गई है। तटबंधों के बीच सैकड़ों गांव, पीपल-पनघट, स्कूल-अस्पताल, मंदिर बाढ़ के पानी में समा गए। बाढ़ के कारण विस्‍थापन की पीड़ा झेल रहे लाखों लोेग तबाह हो चुके हैं।

करीब दो दशक पहले बाल बागमती प्रोजेक्ट के तहत शिवहर के बेलबा घाट पर एक पुल का निर्माण शुरू किया गया। जब चार पाया बनकर तैयार हो गया और तीन पायों का निर्माण अधूरा ही था तभी नदी ने अपनी धारा इस कदर बदल लिया कि अब वहां पुल की जरूरत ही नहीं रह गई। 

अब जब नदी ही दूसरी जगह चली गई तो सरकार ने करोड़ों रुपये झोंकनेे के बावजूद अधूरे पुल का निर्माण बंद कर दिया। पिछले दो दशकों से प्रत्येक वर्ष शिवहर और ढाका के बीच बेलवा घाट के पास 3 महीने के लिए संपर्क सड़क संपर्क टूट जाता है। बेलवा घाट से कुछ ही दूरी पर बागमती की दो धाराएं बन जाती हैं। इन दोनों धाराओं में पानी के बहाव पर नियंत्रण के लिए सरकार ने हाल में एक हाईडैम का निर्माण शुरू किया है। 

इस बार की बाढ़ में वही निर्माण स्थल ध्वस्त हो गया। इस बात की गारंटी कोई नहीं दे सकता है कि भविष्य में बागमती फिर एक बार अपनी धारा की दिशा बदल कर बेलवा घाट पर हाईडैम को बेकार साबित नहीं करेगी। जब आप मुजफ्फरपुर- सीतामढ़ी रोड में खतरनाक पुल पर से बागमती को देखेंगे तो पाएंगे कि वहां भी बागमती की दोनों धाराएं तटबंधों को निशाना बना रही हैं। 

बागमती के पैंतरा बदलने के कारण ही कटरा के बसघट्टा में करोड़ों की लागत से निर्मित पुल ध्वस्त हो गया। अभियंताओं ने जिस दिशा से पानी के बहाव का आकलन करते हुए पुल निर्माण का डीपीआर तैयार किया, उससे अलग हटते हुए मुख्य धारा की दिशा कुछ तिरछी हुई। पुल का निर्माण होते ही धारा उसके पाया से टकराने लगी। पुल के उद्घाटन से पहले ही पानी की तेज धारा पाया के चारों ओर की मिट्टी को काटती चली गई और अभियंता - ठेकेदार की मिलीभगत से की गई कोताही की पोल खुल गई। दरअसल, डीपीआर के अनुसार पाया की गहराई नहीं रखी गई और बीच का पाया धंसने से पुल ध्वस्त हो गया। तो अब एक बात साफ हो चुकी है कि दो-तीन साल के अंतराल पर जब-जब नेपाल में भारी बारिश होगी, बागमती अपने तटबंधों को तहस-नहस करती रहेगी। 

जितनी मात्रा में बागमती हर साल मिटटी और बालू बहा कर ला रही है, उससे यह तय है कि अगले 10 वर्षों में दोनों तटबंधों के बीच तटबंधों की ऊंचाई के बराबर मिटटी और बालू भर जाएगा। फिर बागमती विकराल रुप धारण कर विनाश लीला करती रहेगी। जहां तक कटरा के मोहनपुर में निर्माणाधीन स्लुइस गेट के पास तटबंध टूटने का सवाल है, इसके लिए बागमती प्रोजेक्ट के अभियंताओं और निर्माण एजेंसी की आपराधिक लापरवाही सामने आई है। एजेंसी लखनदेई और बागमती नदियों के संगम स्थल पर 4 सालों में स्लुइस गेट का निर्माण नहीं कर सकी है और अधूरे स्लुइस गेट के पास तटबंध को भी अधूरा छोड़ दिया गया है। इस निर्माण स्थल से महज 50 फीट की दूरी पर बागमती की तेज धारा उफान मारती है और स्लूइस गेट के पास कोई बांध है ही नहीं। इस बार आनन-फानन में बांध बनाने के नाम पर वहां पास के ही तटबंध को काटकर कुछ मिटटी डाली गई।

स्लुइस गेट के पास निर्मित कच्चे बांध की ऊंचाई 15 फीट कम रह गई। 30 फीट के बजाय 10 फीट चौड़ा बांध बनाया जा सका। यहां बांध की ऊंचाई भी कम रह गई, साथ ही चौड़ाई भी कम रह गई ,वहीं मिट़टी गीली थी और इस कारण बागमती उफान मारने लगी। 

देखते देखते बागमती इस कच्चे तटबंध पर ओवरफ्लो करते हुए लखनदेई नदी में उतर गई। महज एक घंटे के बाद बागमती ने स्लुइस गेट के पास 30 फीट की चौड़ाई में तटबंध को तोड़ डाला और औराई- कटरा के गांवों में कहर बरपा दिया ।

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