मुजफ्फरपुर
मुजफ्फरपुर में राहत के लिए बाढ़ पीड़ितों का गुस्सा भड़का, एनएच-77 पर लगाया जाम
By Deshwani | Publish Date: 17/8/2017 1:09:05 PM
मुजफ्फरपुर में राहत के लिए बाढ़ पीड़ितों का गुस्सा भड़का, एनएच-77 पर लगाया जाम

मुजफ्फरपुर/दरभंगा, (हि.स.)। मुजफ्फरपुर में राहत के लिए बाढ़ पीड़ितों का गुस्सा भड़क उठा। बड़ी संख्या में पीड़ितों ने कटौझा पुल पर जाम लगा दिया। सड़क पर बांस-बल्लियां लगाकर और टायर जला शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। लगभग दो घंटे तक जाम लगा रहा। स्थानीय लोगों और पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद जाम खुलवाया। 
मनुषमारा नदी के तांडव से मधुबन बेसी गांव जलमग्न होने से लोग नाराज हैं। दो ग्रामीण सुभाष मांझी और जीमा मांझी को विषैले सर्प ने डंस लिया। सैकड़ों लोग बाढ़ में फंसे हुए हैं। उन्हें निकालने के लिए एक अदद नाव नहीं मिली। 
उधर, घनश्यामपुर, धरहरवा, नयागाव, भरथुआ में भी बाढ़ से लोग बेहाल हैं। बाढ़ पीड़ितों ने पंचायत समिति सदस्य ऋषिराज यादव के नेतृत्व में बुधवार को तीन बजे एनएच-77 पर कटौंझा चौक के समीप जाम कर दिया। इस बीच दो किलोमीटर की दूरी में लगभग पांच सौ छोटी-बड़ी गाड़ियों की कतारें लग गईं। बाढ़पीड़ित सुजीत सहनी, बबलू कुमार, रामबाबू राय, उमेश राय, हरिचरण राय, राजेश यादव, रामदरेश सहनी, राधेश्याम राय, कल्याणपुर, पंचायत समिति सदस्य नगीना देवी आदि का कहना था कि बाढ़ से सबकुछ तबाह हो गया है। गांव से निकलने के लिए कोई साधन नहीं है। चारों तरफ पानी है। कैसे घर से निकलें। नाव एवं अन्य राहत सामग्री की मांग बीडीओ अनसुना कर रहे हैं। लगभग साढ़े तीन बजे स्थानीय औराई विधायक डॉ. सुरेंद्र कुमार द्वारा श्यामबाबू राय के माध्यम से फोन पर कहा गया कि आपलोगों की सभी मागें अविलम्ब पूरी कर दी जाएंगी। तब जाकर लोग मानें और यातायात बहाल हो सका। 
उधर दरभंगा जिले में अभी भी बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है । जिले के अमूमन सभी 18 प्रखंड बाढ. की चपेट में हैं । नौ प्रखंड पूर्ण रूप से प्रभावित है । तकरीबन चार लाख की आबादी प्रभावित हुई है । बीते तीन दिनों में बाढ़ के पानी में डुबने से तीन लोगों की मौत हो गई । मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गत 15 अगस्त को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया । जिस दौरान उन्होंने अधिकारियों को राहत व बचाव कार्य में कोताही नहीं बरतने की सख्त हिदायत भी दी है । 
उधर जिले के प्रभारी मंत्री महेश्वर हजारी एवं कृषि मंत्री डा प्रेमकुमार ने भी बुधवार को प्रभावित क्षेत्रों दौरा किया । बाढ़ के पानी में डूबने से तारडीह में एक किशोर व एक शिक्षक समेत तीन लोगों की जान चली गई । तेज धारा में बहने से बथिया के राजकुमार महतो के तेरह वर्षीय पुत्र दिलखुश कुमार की मौत हो गयी । वहीं ककोढा के शिक्षक अकील अहमद (45वर्ष) गाँव में ही तेज धार में डूब गए । उनकी लाश एक दिन बाद बुधवार को बरामद हुई । 
प्रशासन छह प्रखंडों के 2.40 लाख की आबादी के प्रभावित होने की पुष्टि कर रहा है । साथ ही 112 गाँवों के घिरे होने की जानकारी दे रहा है । पिछले चार दिनों में जिले में कमला-बलान का तटबंध तीन जगहों पर टूटा है । साथ ही अधवारा समूह की खिरोई नदी का तटबंध भी तीन जगहों पर ध्वस्त हुआ है । घनश्यामपुर, तारडीह, किरतपुर, जाले, कुशेश्वरस्थान पूर्वी व पश्चिमी, गौडाबौराम व केवटी पूरी तरह से बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं । बिरौल, अलीनगर, बेनीपुर, हायाघाट, हनुमाननगर, सदर, सिंहवाडा एवं मनीगाछी प्रखंड के भी अधिकांशत: भाग बाढ़ की चपेट में हैं । शहर में भी बागमती के तटबंध पर दबाब बढ़ने एवं एकमी घाट के जर्जर स्लूइस गेट से पानी प्रवेश करने से बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है । उधर केवटी में सड़क पर दो से तीन फीट पानी के बहाव से एन एच-105 पर आवाजाही बाधित हो गयी है । इस बीच सुकून देने वाली बात यह है कि दरभंगा-सीतामढी रेलखंड पर ट्रेनों का जो परिचालन ठप था और गाड़ी कमतौल स्टेशन तक ही जा पा रही थी, उसका परिचालन गुरुवार की सुबह से सुचारु हो गया है । इस आशय की पुष्टि करते हुए एडीआरएम राजेश कुमार शाण्डिल्य ने बताया है कि दरभंगा-सीतामढी रेलखंड पर पिछले दिनों से ठप पड़ा रेल का परिचालन सीतामढ़ी तक फिलहाल प्रारंभ किया जा है । उससे आगे के परिचालन हेतु कार्य प्रगति पर है । शाम से लेकर सुबह तक उससे आगे के रेलखंड पर भी संबंधित परिचालन के प्रारंभ हो जाने की प्रबल संभावना है ।
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