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आज मनाया जा रहा है विश्वकर्मा पूजा, विधि विधान से करें पूजा घर और काम में मिलेगी सुख-समृद्धि
By Deshwani | Publish Date: 17/9/2020 8:51:26 AM
आज मनाया जा रहा है विश्वकर्मा पूजा, विधि विधान से करें पूजा घर और काम में मिलेगी सुख-समृद्धि

पटना। हिंदू धर्म में हम सभी हर त्यौहार को तिथि और पंचांग के अनुसार के मुताबिक मनाते हैं। लेकिन विश्वकर्मा जयंती उन चंद त्यौहारों में से ऐसी है जिसे हमेशा से ही 17 सितंबर को मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में आज विश्वकर्मा पूजा की जाएगी। बता दें कि इसी दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। 

मान्यता हैं कि विश्वकर्मा भगवान ने ही ब्रह्मा जी की सृष्टि के निर्माण में मदद की थी और पूरे संसार का नक्शा बनाया था।शास्त्रों के अनुसार विश्वकर्मा वास्तुदेव के पुत्र हैं। इसलिए इस दिन उद्योगों, फैक्ट्र‍ियों और हर तरह के मशीन की पूजा की जाती है। भगवान विश्वकर्मा ने ही देवी-देवताओं के लिए अस्त्रों, शस्त्रों, भवनों और मंदिरों का निर्माण किया था।  यह पूजा सभी कलाकारों, बुनकर, शिल्पकारों और औद्योगिक घरानों द्वारा की जाती है। 

आइए जानते है विश्वकर्मा पूजा करने के लिए शुभ समय और इस पूजा से जुड़ी पूरी जानकारी...


17 सितम्बर दिन गुरुवार का शुभ मुहूर्त
शुद्ध आश्विन कृष्ण्पक्ष अमावश्या शाम 04 बजकर 15 मिनट के उपरांत प्रतिपदा
श्री शुभ संवत -2077,शाके -1942,हिजरीसन -1442-43,
सूर्योदय -05:55
सूर्यस्य -06:05
सूर्योदय कालीन नक्षत्र -पूर्वाफल्गुन उपरांत उत्तराफाल्गुन, शुभ- योग, च -करण
सूर्योदय कालीन ग्रह विचार -सूर्य-सिंह, चंद्रमा-सिंह, मंगल-मीन, बुध-कन्या, गुरु-धनु, शुक्र-कर्क, शनि-धनु, राहु-मिथुन केतु-धनु
 
 
विश्वकर्मा पूजा विधि
विश्वकर्मा भगवान की पूजा करने के लिए सुबह स्नान करने के बाद अच्छे कपड़े पहनें और भगवान विश्वकर्मा की पूजा करें। पूजा के समय अक्षत, हल्दी, फूल, पान का पत्ता, लौंग, सुपारी, मिठाई, फल, धूप, दीप और रक्षासूत्र जरूर रखें। आप जिन चीजों की पूजा करना चाहते हैं उन पर हल्दी और चावल लगाएं।  साथ में धूप और अगरबत्ती भी जलाएं। इसके बाद आटे की रंगोली बनाएं। उस रंगोली पर 7 तरह का अनाज रखें। फिर एक लोटे में जल भरकर रंगोली पर रखें. फिर भगवान विष्णु और विश्वकर्मा जी की आरती करें।  आरती के बाद विश्वकर्मा जी और विष्णु जी को भोग लगाकर सभी को प्रसाद बांटें।  इसके बाद कलश को हल्दी और चावल के साथ रक्षासूत्र चढ़ाएं, इसके बाद पूजा करते वक्त मंत्रों का उच्चारण करें। जब पूजा खत्म हो जाए उसके बाद सभी लोगों में प्रसाद का वितरण करें।
 
भगवान विश्वकर्मा की पूजा का मंत्र
ॐ आधार शक्तपे नम: और ॐ कूमयि नम:, ॐ अनन्तम नम:, ॐ पृथिव्यै नम:
 
भगवान विश्वकर्मा जी की आरती
हम सब उतारे आरती तुम्हारी हे विश्वकर्मा, हे विश्वकर्मा।
युग–युग से हम हैं तेरे पुजारी, हे विश्वकर्मा...।।
मूढ़ अज्ञानी नादान हम हैं, पूजा विधि से अनजान हम हैं।
भक्ति का चाहते वरदान हम हैं, हे विश्वकर्मा...।।
निर्बल हैं तुझसे बल मांगते, करुणा का प्यास से जल मांगते हैं।
श्रद्धा का प्रभु जी फल मांगते हैं, हे विश्वकर्मा...।।
चरणों से हमको लगाए ही रखना, छाया में अपने छुपाए ही रखना।
धर्म का योगी बनाए ही रखना, हे विश्वकर्मा...।।
सृष्टि में तेरा है राज बाबा, भक्तों की रखना तुम लाज बाबा।
धरना किसी का न मोहताज बाबा, हे विश्वकर्मा...।।
धन, वैभव, सुख–शान्ति देना, भय, जन–जंजाल से मुक्ति देना।
संकट से लड़ने की शक्ति देना, हे विश्वकर्मा...।।
तुम विश्वपालक, तुम विश्वकर्ता, तुम विश्वव्यापक, तुम कष्टहर्ता।
तुम ज्ञानदानी भण्डार भर्ता, हे विश्वकर्मा...।।

विश्वकर्मा पूजा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संसार में जो भी निर्माण या सृजन कार्य होता है, उसके मूल में भगवान विश्वकर्मा विद्यमान होते हैं। उनकी आराधना से आपके कार्य बिना विघ्न पूरे हो जाएंगे। बिगड़े काम भी बनेंगे।
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