ब्रेकिंग न्यूज़
मोतिहारी के मधुबन में बारात में चली गोली, गोढ़वा के युवक की मौत, आर्म्स के साथ एक गिरफ्तारमोतिहारी के चकिया ट्रक की चपेट में आकर बाइक सवार दो की मौके पर मौत, तीसरा घायल, लोगों ने रात में ही कर दी सड़क जामसमस्तीपुर में मौत बनकर गिरी आकाशीय बिजली, आठ लोगों की मौतअमेरिकी कांग्रेस की हाउस सलेक्ट कमेटी ने 2050 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन का रोड़मैप किया जारीगोपालगंज में शिक्षा विभाग के क्लर्क को अपराधियों ने दिनदहाड़े मारी गोली, मौतदेश में 347978 कोविड-19 रोगी हुए स्वस्थ, स्वस्थ होने वालों की दर 59.43 प्रतिशत हुईअनलॉक-2 को लेकर देश में नये दिशा-निर्देश जारीपश्चिम चंपारण: बाढ़ की संभावना के मद्देनजर सभी पदाधिकारी रहें सतर्क- कुंदन कुमार
जरूर पढ़े
शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को लगाएं खीर का भोग, जानिए पूजा विधि, मंत्र, स्तोत्र पाठ और आरती
By Deshwani | Publish Date: 1/10/2019 10:56:10 AM
शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को लगाएं खीर का भोग, जानिए पूजा विधि, मंत्र, स्तोत्र पाठ और आरती

नई दिल्‍ली। शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन दुर्गा मां के चंद्रघंटा रूप की पूजा की जाती है। नौ दिनों तक चलने वाली नवरात्रि के दौरान मां के नौ रूपों की पूजा की जाती है। मां का तीसरा रूप राक्षसों का वध करने के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि वह अपने भक्तों के दुखों को दूर करती हैं इसीलिए उनके हाथों में तलवार, त्रिशूल, गदा और धनुष होता है। इनकी उत्पत्ति ही धर्म की रक्षा और संसार से अंधकार मिटाने के लिए हुई। मान्‍यता है कि मां चंद्रघंटा की उपासना साधक को आध्यात्मिक और आत्मिक शक्ति प्रदान करती है। नवरात्री के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की साधना कर दुर्गा सप्तशती का पाठ करने वाले उपासक को संसार में यश, कीर्ति और सम्मान मिलता है। 
 
यहां जानिए मां दुर्गा के इस तीसरे रूप के बारे में... 
मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत सौम्यता एवं शांति से परिपूर्ण है। मां चंद्रघंटा और इनकी सवारी शेर दोनों का शरीर सोने की तरह चमकीला है। दसों हाथों में कमल और कमडंल के अलावा अस्त-शस्त्र हैं। माथे पर बना आधा चांद इनकी पहचान है। इस अर्ध चांद की वजह के इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। अपने वाहन सिंह पर सवार मां का यह स्वरुप युद्ध व दुष्टों का नाश करने के लिए तत्पर रहता है। चंद्रघंटा को स्वर की देवी भी कहा जाता है। 
 
कैसे करें चंद्रघंटा की पूजा
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा के लिए खासकर लाल रंग के फूल चढ़ाएं। इसके साथ ही फल में लाल सेब चढ़ाएं। भोग चढ़ाने के दौरान और मंत्र पढ़ते वक्त मंदिर की घंटी जरूर बजाएं, क्योंकि मां चंद्रघंटा की पूजा में घंटे का बहुत महत्व है। मान्यता है कि घंटे की ध्वनि से मां चंद्रघंटा अपने भक्तों पर हमेशा अपनी कृपा बरसाती हैं। मां चंद्रघंटा को दूध और उससे बनी चीजों का भोग लगाएं और और इसी का दान भी करें। मां चंद्रघंटा को मखाने की खीर का भोग लगाना श्रेयस्कर माना गया है। मान्‍यता है कि ऐसा करने से मां खुश होती हैं और सभी दुखों का नाश करती हैं।
 
मां चंद्रघंटा का मंत्र
पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥
 
ध्यान
वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्।
सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥
मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
खंग, गदा, त्रिशूल, चापशर,पदम कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर हार केयूर, किंकिणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥
प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुगं कुचाम्।
कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम्॥
 
स्तोत्र पाठ
आपदुध्दारिणी त्वंहि आद्या शक्तिः शुभपराम्।
अणिमादि सिध्दिदात्री चंद्रघटा प्रणमाभ्यम्॥
चन्द्रमुखी इष्ट दात्री इष्टं मन्त्र स्वरूपणीम्।
धनदात्री, आनन्ददात्री चन्द्रघंटे प्रणमाभ्यहम्॥
नानारूपधारिणी इच्छानयी ऐश्वर्यदायनीम्।
सौभाग्यारोग्यदायिनी चंद्रघंटप्रणमाभ्यहम्॥
 
मां चंद्रघंटा की आरती 
नवरात्रि के तीसरे दिन चंद्रघंटा का ध्यान।
मस्तक पर है अर्ध चन्द्र, मंद मंद मुस्कान॥
 
दस हाथों में अस्त्र शस्त्र रखे खडग संग बांद।
घंटे के शब्द से हरती दुष्ट के प्राण॥
 
सिंह वाहिनी दुर्गा का चमके सवर्ण शरीर।
करती विपदा शान्ति हरे भक्त की पीर॥
 
मधुर वाणी को बोल कर सब को देती ग्यान।
जितने देवी देवता सभी करें सम्मान॥
 
अपने शांत सवभाव से सबका करती ध्यान।
भव सागर में फसा हूं मैं, करो मेरा कल्याण॥
 
नवरात्रों की मां, कृपा कर दो मां।
जय माँ चंद्रघंटा, जय मां चंद्रघंटा॥
 
नवरात्रि व्रत के नियम-
नवरात्रि के व्रत में इन नियमों का पालन जरूर करना चाहिए। 
- नवरात्रि के 9 दिनों तक पूरी श्रद्धा भक्ति से मां की पूजा करें। 
- नवरात्रि के दौरान भोजन नहीं करना चाहिए। व्रती दिन के समय फल और दूध का सेवन कर सकता है। 
- शाम के समय मां की आरती करके परिवार के लोगों को प्रसाद बांटकर खुद भी प्रसाद ग्रहण करें। 
- नवरात्रि के दौरान भोजन ग्रहण न करें सिर्फ फलाहार ग्रहण करें। 
- अष्‍टमी या नवमी के दिन नौ कन्‍याओं को भोजन करवाकर उन्‍हें उपहार और दक्षिणा दें। 
- अगर संभव हो तो हवन के साथ नवमी के दिन व्रत का पारण करें।
image
COPYRIGHT @ 2016 DESHWANI. ALL RIGHT RESERVED.DESIGN & DEVELOPED BY: 4C PLUS