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एक गांव ऐसा, जहां के ग्वाले नहीं बेचते दूध, जिसने की कोशिश वह हो गया बर्बाद
By Deshwani | Publish Date: 17/7/2019 5:07:51 PM
एक गांव ऐसा, जहां के ग्वाले नहीं बेचते दूध, जिसने की कोशिश वह हो गया बर्बाद

बैतूल। विश्वास और अंधविश्वास में एक महीन रेखा खींची होती है। यदि इसमें लोगों का परंपरागत विश्वास बना रहा तो इसे कुरीति या फिर अंधविश्वास का नाम दे दिया जाता है। जबकि इसे मानने वाले अपने विश्वास पर अटल रहते हैं क्योंकि उन्हें इस बात का डर रहता है कि यदि उन्होंने परंपरा तोड़ी तो उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। या यूं कहें कि उन्हें अपनी परंपरा और महापुरुषों- पूर्वजों की बात को मानना भगवान के आदेश की तरह होती है, जिसे वे छोड़ नहीं सकते हैं।

यही वजह है कि वर्षों से चली आ रही परंपराएं आज भी कायम हैं। ऐसी ही एक परंपरा बैतूल जिले के ग्राम चूड़िया में भी कायम है, जहां के ग्वाले दूध का व्यापार नहीं करते हैं। वह सिर्फ इसलिए क्योंकि एक सदी पहले यहां पर एक संत ने दूध का व्यापार नहीं करने का फैसला लिया था। आज भी ग्वाले इसी फैसले पर अटल हैं और इसे मानते आ रहे हैं। 


मुफ्त में मिलता है दूध
महंगाई और मार्केटिंग के इस दौर में जहां पानी भी मुफ्त में नहीं मिलता, वहीं ग्वालों का एक ऐसा गांव भी है, जहां मुफ्त में दूध मिलता है और वो भी जितना चाहे उतना। क्योंकि इस गांव में कई वर्षों से दूध बेचना प्रतिबंधित है। जबकि गांव में 90 फीसदी ग्वाले रहते हैं। यहां लोग दूध के बदले पैसे लेने के बारे में सोचते भी नहीं हैं। बैतूल के इस अनूठे गांव का नाम है चूड़िया। जहां लगभग एक सदी से ये अजब-गजब परंपरा चली आ रही है। इस गांव के हर घर में पालतू मवेशी हैं और रोजाना सैकड़ों लीटर दूध उत्पादित होता है, लेकिन ये लोग दूध मुफ्त में बांटते हैं और दूध बेचकर लखपति बनने से डरते हैं। 
 
प्रतिबंधित है दूध बेचना 
आपने टीवी पर पियो ग्लास फुल दूध का विज्ञापन तो देखा ही होगा। रोज़ाना एक ग्लास दूध पीने के लिए भी आपको पैसे तो खर्च करने ही पड़ेंगे। लेकिन बैतूल का चूड़िया गांव एक ऐसी जगह है, जहां दूध के बदले पैसे नहीं देने पड़ते और आप इस गांव से जितना जी चाहे उतना दूध मुफ्त में ले सकते हैं, क्योंकि ग्वालों के इस गांव में दूध बेचने पर प्रतिबंध है। गांव के एक संत ने एक सदी पहले यहां दूध बेचने पर प्रतिबंध लगाया था, जिसे लोग आज भी निभा रहे हैं।

1912 से बंद है दूध बेचना
एक किवदंती के मुताबिक सन् 1912 में इस गांव में चिन्ध्या बाबा नाम के एक संत रहा करते थे, जो एक बड़े गौसेवक थे। उन्होंने ग्रामीणों को सीख दी कि दूध में मिलावट करके बेचना पाप है। इसलिये गांव में कोई दूध नहीं बेचेगा और लोगों को दूध मुफ्त में दिया जाएगा। संत चिन्ध्या बाबा की बात  यहां के लोगों के लिये पत्थर की लकीर बन गईं और इसके एक सदी बाद आज भी चूड़िया गांव में दूध मुफ्त मिल रहा है। गांव के पुरोहित शिवचरण यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि गांव के संत चिन्ध्या बाबा ने एक सदी पहले गांव में दूध और उससे बनने वाली सभी वस्तुओं, आम और अन्य फलों को बेचने पर प्रतिबंध लगाया था। तभी से चूड़िया गांव में कोई भी चिन्ध्या बाबा की बनाई इस परंपरा को नही तोड़ता है और जो भी ग्रामीण इस परंपरा को तोड़ता है वो बर्बाद हो जाता है।
 
90 फीसद रहते हैं ग्वाले
गांव की सबसे हैरत वाली बात ये है कि यहां 90 फीसदी ग्वाले रहते हैं, जिनके पास हजारों गौवंश हैं। ये चाहें तो रोजाना सैकड़ों लीटर दूध बेचकर बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं, लेकिन परंपराओं ने इनके दिलों से लालच को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है। केवल दूध ही क्यों, इस गांव में तो आम,जामुन जैसे फल भी मुफ्त में ही मिलते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जिसने भी यहां दूध का व्यापार करने की कोशिश की वो बर्बाद हो गया। इसलिये यहां दूध बेचने का ख्याल भी किसी को नहीं आता है। 
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