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पारंपरिक कलाओं का ऑक्सीजन बना भोपाल हाट
By Deshwani | Publish Date: 16/4/2017 4:33:29 PM
पारंपरिक कलाओं का ऑक्सीजन बना भोपाल हाट

 भोपाल/रायसेन। प्रदेश की पारंपरिक कलाओं को जीवित रखने में भोपाल हाट महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यहां सालभर चलने वाले मेलों में प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के हैण्डलूम संचालकों, शिल्पकारों और दस्तकारों को अपना हुनर दिखाने का अवसर मिलता है। साथ ही उनके द्वारा निर्मित सामान के विक्रय के लिए भोपाल हाट एक अच्छा बाजार भी है।

भोपाल हाट में रायसेन जिले के दीवानगंज के शिल्प कुटी स्व-सहायता समूह का भी एक स्टॉल लगा है। इस स्टॉल में जूट से बनी सामग्री विकाय के लिए उपलब्ध है। इन वस्तुओं में पर्स, झूले, डोरमैट, पेन स्टैण्ड, तोरण, झूमर, के साथ ही गृह सज्जा की अनेक वस्तुएं हैं। यह स्टॉल मेले में आने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र हैं। यहां उपलब्ध विभिन्न डिजायनों के लेडीज पर्स महिलाओं द्वारा पसंद किये जा रहे हैं। मेले में आई लीना देहारे ने बताया कि इनके विविध रंगों और डिजायनों के पर्स वाकई आकर्षक हैं।
शिल्प कुटी स्व-सहायता समूह की संचालिका अनीशा बी ने बताया कि वे विगत 25 वर्षों से जूट का सामान बनाने का काम कर रही हैं। इस स्वसहायता समूह से 60 महिलाएं जुड़ी हैं। दस्तकारी की यह कला रायसेन जिले में केवल दीवानगंज में जीवित है। हाल ही में गैरतगंज जनपद के हरदौट में भी इसे स्थापित करने का जिला प्रशासन द्वारा प्रयास किया जा रहा है। 
अनीशा बी बताती हैं कि एक महिला रोज 6-7 घंटे काम करे तो लगभग 100 से 150 रूपए रोजाना आमदनी हो सकती है। अनीशा बी कई जिलों में प्रशिक्षण देने जाती हैं। वह कहती हैं कि जो महिलाएं घर के बाहर काम के लिए नहीं जाना चाहतीं, यह उनके लिए रोजगार का अच्छा माध्यम है।
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