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यह है भारत की वो पहली महिला पायलट जिन्होंने साड़ी पहनकर उड़ाया था विमान
By Deshwani | Publish Date: 30/5/2018 8:02:11 PM
यह है भारत की वो पहली महिला पायलट जिन्होंने साड़ी पहनकर उड़ाया था विमान

 पुराने समय में औरतो को घर से बाहर निकलने की भी इजाजत नहीं होती है। ऐसे में किसी महिला का विमान उड़ाना बहुत हैरानी की बात है लेकिन सरला ठकराल एक ऐसा नाम है, जिन्होने 21 साल की उम्र में अपनी साड़ी का पल्लू संभालते हुए जिप्सी मॉथ नामक विमान चलाया। इसी के साथ सरला ठकराल भारत की पहली महिला पायलट बनी। जिन्होने साल 1936 में लाहौर हवाई अड्डे पर दो सीटों वाले जिप्सी मॉथ विमान को चलाया। वह पहली भारतीय महिला विमान चालक होने के साथ तब एक चार साल की बेटी की मां भी थी। 

 
सरला का जन्म 15 मार्च को नई दिल्ली में हुआ था। उन्होने 1929 में दिल्ली में खोले गए फ्लाइंग क्लब में विमान चलाने की ट्रेनिंग ली। इस ट्रेनिंग में ही उन्होंने एक हजार घंटे का अनुभव भी लिया। इसी के साथ वह ‘A’ लाइसेंस प्राप्त करने वाली पहली भारतीय महिला बनी। इसी दौरान दिल्ली के फ्लाइंग क्लब में उनकी मुलाकात पी. डी. शर्मा के साथ हुई, जो खुद एक व्यावसायिक विमान चालक थे। उनके साथ सरला ने शादी कर ली। शादी के बाद उनके पति ने सरला को व्यावसायिक विमान चलाने के लिए प्रोत्साहित किया। पति का साथ और प्रोत्साहन पाकर वह जोधपुर फ्लाइंग क्लब में ट्रेनिंग लेने लगी। फिर उन्होने 1936 में पहली बार जिप्सी मॉथ नाम का विमान उड़ाया और पहली भारतीय विमान चालक बनीं। 
 
साल 1939 सरला के लिए बहुत दुख भरा रहा। जब वह कमर्शियल पायलेट लाइसेंस लेने के लिए कड़ी मेहनत कर रही थी, तब दूसरा विश्व युद्ध छिड़ गया। फ्लाइंट क्लब बंद हो गया औक फिर उन्हें अपनी ट्रेनिंग भी बीच में ही रोकनी पड़ी। इससे भी ज्यादा दुख की बात यह रही कि इसी साल एक विमान दुर्घटना में उनके पति का देहांत हो गया। इस हादसे ने उनकी जिंदगी बदल दी। 
 
 
पति की मौत के समय वह लाहौर में थी और तब उनकी उम्र सिर्फ 24 साल की थी। वहां से सरला वापिस भारत आ गई और मेयो स्कूल ऑफ आर्ट में दाख़िला ले लिया। जहां उन्होंने बंगाल स्कूल ऑफ पेंटिंग सीखी और फाइन आर्ट में डिप्लोमा भी किया। भारत का विभाजन होने के बाद सरला अपनी दो बेटियों के साथ दिल्ली आ गईं। यहां पर उनकी मुलाकात पी.पी.ठकराल के साथ हुई। ठकराल ने उनके साथ 1948 में शादी कर ली। यह सरला की जिंदगी की दूसरी पारी थी। जिंदगी की इस दूसरी पारी में सरला सफल उद्धमी और पेंटर बनीं। वह कपड़े और ज्वैलरी डिजाइन करती थी, वह अपनी डिजाइन की हुई चीजों को कुटीर उद्योगों को देती रहीं। 15 मार्च 2008 में उनकी मौत हो गई। सरला ठकराल का पहली भारतीय पायलट बनना और बाद में आर्ट के साथ जुड़ना हर महिला को प्रेरित करता है। 
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