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होली धमाल: टीवी के आइटम ब्वॉय, लालू के लाल और अपुन की टाॅप-टेन लिस्ट
By Deshwani | Publish Date: 28/2/2018 8:06:07 PM
होली धमाल: टीवी के आइटम ब्वॉय, लालू के लाल और अपुन की टाॅप-टेन लिस्ट

बुरा ना मानो होली है।

By- सचिन कुमार सिंह


डिस्क्लेमर:-  प्रस्तुत लेख लिखते समय इसके कलमकार पर फागुन की उमंग, भंग की तरंग व होली का रंग चढ़ा हुआ था। दिमाग छुट्टी लेकर पिछले कई दिनोें से डांडिया खेलने गया हुआ था। वैसे होली के अवसर पर लोग तरह- तरह के कीचड़ का प्रयोग करते हैं, हम शब्दों के कीचड़ से कागज को काला करते हैं। इस चक्कर में किसी को बुरा लग जाए तो मैं क्या कर सकता हूं। वैसे कहा तो यह जाता है कि होली के अवसर पर सात खून भी माफ हो सकता है। आप पूरी बेशर्मी से किसी की बेइज्जती कर बस एक शब्द चिपका सकते हैं ‘बुरा ना मानो होली है’। साला मजाल है इसके बाद कोई एक पाव भी बुरा मान जाए। आपसे बस इतनी सी इल्तिजा है कि मैं होली के अवसर पर कुछ कूड़ा-कचरा लिख दूं, उसे होली का प्रसाद समझ कर ग्रहण कर लेंगे। इसके लिए रत्ती भर भी बुरा नहीं मानेंगे, अगर मान भी लिया तो इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। दरअसल खाली बैठे- बैठे अचानक यह रंगारंग ख्याल आया कि होली के होलियाना अवसर पर ऐसे महान-विभूतियों की टाॅपटेन लिस्ट बनाऊं, जिन्होंने पिछली होली से लेकर इस होली तब अपने काले- सफेद व लाल- पीले कारनामों से खूब सुर्खियां बिखेरी हो। भाइयों और बहनों, आपको बता देना चाहता हूं कि यह लेख लिखने के लिए हमने केवल और केवल अपनी मर्जी का इस्तेमाल किया है, तो वरीयताक्रम गड़बड़ा भी सकता है। किसी को आपत्ति हो भी तो वह अपनी सुविधानुसार क्रम सुधार कर पढ़ सकता है, होली में उसे पूरी छूट है।

बाकी किसी भी तरह का बुरा नहीं मानने का भाई।

लीजिए बगैर देर किए काउंट डाउन शुरू होता है अब।

10:  प्रिया प्रकाश वाॅरियर :  होय-होय क्या बात है, नाम सुनते ही आप सबकी बांछंे खिल गई होंगी, खिले भी क्यों नहीं इस बंदी की नैन-मटक्का ने जवान तो जवान बूढ़ों को भी फिर से अपनी पुरानी यादें ताजा करने का मौका जो दे दिया है। क्या कनखी-मनखी चलाती है बाप, दिल पे बिजलियां गिरने लगती है। अपनी नैन कटारी से सबको घायल करने वाली इस खूबसूरत बला को हमने दसवें पायदान पर बैठा रखा है। लोगों का मानना है कि अपने नाम से ही वाॅरियर इस प्रिया को बाॅर्डर पर बैठा दिया जाय तो बगैर किसी खून-खराबा के लाहौर फतेह। वैसे मैं इस बात से इत्तेफाक नहीं रखता, आपको रखना है तो रखो, अपनी बला से।

9ः नौ नंबर पर जो साहब विराजमान हैं, उसे लोग आजकल नीरव मोदी के नाम से जानते हैं। भई, भले ही यह बंदा देश छोड़ लंबरलेट हो चुका हो। इस पर घोटालाबाज होने की तोहमत लगी हो, मगर एक बात तो है बंदे में। क्या हाई-वोल्टेज दिमाग पाया है रे बाप। इसने जाते-जाते सबको इस बात का अहसास कराया कि पैसा सिर्फ आधार लिंक कराने से नहीं मिलता, बैंक अधिकारियों से लिंकअप होना जरूरी है। नहीं तो हजार-पांच सौ के लोन पर भी ये आपकी छाती पर चढ़े रहेंगे। इसे कहते हैं शाॅर्टकट में धनलक्ष्मी बरसाने का तरीका। आप चाहो तो ट्राई कर सकते हो, मगर कोई लफड़ा हो जाय तो मुझे दोष मत देना। मैं सिर्फ सुझाव दे सकता हूं, इसे मानना न मानना आपकी मर्जी।
8ः आठवें नंबर पर जो साहब लोटपोट कर रहे हैं, इनके नाम में ही शत्रु जुड़ा है। ये साहब भी कमाल के हैं। त्रेतायुग में एक थे विभीषण, कलियुग में ये उनके अवतार जैसे मालूम होते हैं। जिस थाली में खाते हैं, उसमें पहले छेद करते हैं। समय-समय पर उस छेद को बड़ा करते रहते हैं, मगर क्या मजाल जो थाली बदल दें। इस मामले में ये परम भक्त हैं। अगर खिलाड़ी से तुलना करें तो ये ऐसे खिलाड़ी हैं जो अपने ही पोस्ट में जानबूझकर गोल करता है। समय-समय पर इनका बयान बासी कढ़ी में उबाल जैसा साबित होता है, मगर इससे इनकी सेहत को कोई फर्क नहीं पड़ता। अगर कोई इन्हें इनका फर्ज याद दिलाता है तो ये उसे डपट कर कहते हैं- खामोश। लो जी हो गए खामोश। अब तो समझ ही गए होंगे,हम किसकी बात कर रहें है, अजी अपने श़त्रुघ्न भइया की।

7ः सातवें नंबर पर विराजमान होने का सौभाग्य लालू के लाल तेज-तेजस्वी को प्राप्त हो ही गया। पप्पा की मेहरबानी व चच्चा की रजामंदी से इन लालों को काफी कम उम्र में सत्ता की रसमलाई टपा-टप लीलने की परमिशन मिल गई, मगर बुरा हो चच्चाजान का जिन्होंने यकायक ऐसी पलटी मारी की दोनों लाल चारों खाने चित्त हो गए। इन बच्चों से सत्तारूपी खिलौना छीन गया, तबसे ये अपने चच्चा से इतने रूठे कि अभी भी खिलौना लौटाने की जिद कर रहे हैं, मगर चच्चा है कि सुनते ही नहीं। अब ऐसे में गुस्सा तो आएगा ही और गुस्से में मुंह से अल-बल नहीं निकलेगा तो क्या इंद्रासन के मोती झड़ेंगे। गलती इन बच्चों की नहीं, सरासर चच्चे की है। वैसे ये बच्चे मीडिया लाइट में रहना सीख गए हैं, इनका भविष्य उज्जवल है।

6ः बच्चे की बात चले तो चच्चा कैसे छूट सकते हैं। इसलिए हमने चच्चाजान को छठें पायदान पर बैठा रखा है। वैसे तो इनका ओरिजनल नाम नीतीश है, मगर आजकल इन्हें कई उपनामों से पुकारा जा रहा है। पलटूराम, बेवफा, नौटंकीबाज, राम-राम और कितने गिनाउं। इनके विरोधी तो यहां तक कहते हैं कि सबके मंुह में दांत होते हैं, इनके पेट में भी है। लोजी, इतनी राजदान बात आपको कैसे मालूम हो गई। खैर, साहब इसकी परवाह किए बगैर वहीं करते हैं जिससे सत्ता की कुर्सी पीछे से खिसक न जाय। इसलिए कभी-कभी नमो-नमो करते हैं तो कभी हे लालू-हे लालू। फिलवक्त तो ये अपनी जापान यात्रा को लेकर चर्चा में हैं। लोगों का कहना है कि ये जापानी तेल लाने गए थे, किसी मकसद से यह कोई नहीं बता रहा। इधर लालूजी अलगे खिसियाए हैं कि जापान जाना ही था तो एकबार उनसे भी मिल लेते, क्या हम अब इतने बेगाने हो गए। मगर साहब को इसकी भी परवाह कहां, इनको तो अभी दहेजबंदी व शराबबंदी से फुर्सत नहीं है।

5ः टीवी के आइटम ब्वाॅय मियां आबैसीः जिस तरह आजकल की फिल्में आइटम गर्ल के बगैर नहीं चलतीं, ठीक वैसे ही टीवी का कोई डिबेट मियां मौलाना श्री-श्री 108 औबैसी साहब के बिना हिट नहीं होता। ये साहब जब बोलते हैं तो पूरा देश कान लगाकर सुनता है, इसलिए नहीं कि ये बहुत समझदारी की बातें करते हैं, वरन इसलिए कि इससे उम्दा काॅमेडी फुल मनोरंजन और कोई नहीं हो सकता। भई, मान गए टीवी वालों की पारखी नजर को, भगवान ऐसे ही इनकी समझदारी बनाए रखे और खोज-खाज कर एक से बढ़कर एक नमूनों से डिबेट कराते रहें।

4ः लालू यादवः ये महाशय, जिस हाल में, जहां भी पड़े हो खबर बन ही जाती है। शर्त लगा लीजिए, पिछले 25-30 सालों में उनकी टक्कर का ऐसा नेता नहीं मिला जो घोटाला करके भी बड़ी सफाई से इसे जनसेवा से जोड़ दे। सच कहूं तो मुझे आजतक उनकी यह थ्योरी समझ में नहीं आई, मगर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता जी। अभी ये जेल में है, जज ने बेल नहीं दी तो अबकी होली में ये जेल में ही कुर्ता फाड़ेंगे। वैसे इनका यह संदेश तेजी से लोकप्रिय हो रहा है जिसका आशय यह है कि घोटाला करना गुनाह नहीं है, गुनाह तो सत्ता से बेदखल होना है। ऐसे में एक सैल्यूट तो बनता है, इस सोच को।

3ः बाबा रामदेवः कांग्रेसी राज में सलवार पहन जानबचाकर भागने वाले बाबा रामदेव वैसे तो हर रोज सुर्खी बटोरते हैं। जिस तरह मोदी साहब देश को कांग्रेस मुक्त करना चाहते हैं, वैसे ही ये बाबा देश को विदेशी कंपनियों से मुक्त। मगर अभी बाबा लकड़ी जब्ती मामले को लेकर चर्चा में हैं। मगर लोगों को इस बात का संतोष है कि ये ऐसा पहला बाबा है जो लड़की की जगह लकड़ी के चक्कर में फंसा है। इसलिए इन्हें शत-शत नमन करना चाहिए। वैसे भी बाबा ने जब अपने मिशन की शुरुआत की थी तो चंद दवाईयां बनाते थे, मगर आज के दिन में ये क्या नहीं बनाते। अब तो लोगों को बस इस बात का इंतजार है कि बाबा अपने स्वदेशी कंडोम से देश के नागरिकों का कब भला करते हैं। बाबा कंडोम लगाओ, आबादी को हर्बल तरीके से भगाओ।
 
2ः राहुल गांधीः इनके तो नाम में ही गांधी है, ऐसे में इन्हें टाॅप लिस्ट में शामिल न करू,ं ये कैसे हो सकता है। वैसे भी बंदे ने चर्चा में बने रहना सीख लिया है। धीरे-धीरे कंठी-जनेउ व मंदिर-मंदिर का चक्कर का खेल भी खेल रहे हैं। इनका सबसे बड़ा दर्द यह कि इनकी बातों को लोगा सीरियसली नहीं लेते। जबकि ये अपनी समझ से विद्वतापूर्वक बाते ही करते हैं। फिर भी पप्पू-जप्पू कहलाना पड़ रहा है। इन्हें तो ये भी नहीं पता कि ये पहले ऐसे आदमी हैं जो लोगों से जवाब का सवाल मांगते हैं। आलू से सोना निकालने की तरकीब बताते हैं। इसके बावजूद लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते। लीजिए भाई, भविष्य इनका ही है, कल को मोदी की जगह हथिया ली तो न चाहते हुए भी इनकी विद्वता से रोज-रोज वाकिफ होने की नौबत आ सकती है।

1. जुमलेबाज, फेंकू, बंडलबाज और न जाने कितनी उपाधियों से विभूषित पीएम मोदी को लोग चाहे जिस नाम से पुकारे, मगर बेचारे की कोशिश आज भी जारी है। देश को कैशलेस बनाने की। पहले नोटबंदी, फिर जीएसटी और अब पीएनबी घोटाला। ऐसा चलता ही रहा तो देश हमेशा के लिए कैशलेस हो जाएगा। वैसे मोदी सर की एक और शिकायत है कि इन्हें हर बुरे काम का जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है। हद तो यह है कि अदालती फैसले पर भी उन्हें ही जिम्मेदार ठहराया जाता है, जबकि वे ठहरे जन्मजात संत। वैसे ये संत अपने पकौड़ा ज्ञान को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय ख्याति बटोर रहे हैं। ऐसे में जिस संत के पीछे युवा फौज लगी हो, उनका नंबर स्थान तो पक्का, सही कहा न कक्का।

                                       

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