ब्रेकिंग न्यूज़
नामकुम के पास भयंकर सड़क हादसा, बोलेरो-ट्रक की टक्‍कर में 7 लोगों की मौततीन चरणों में नहीं खुलेगा भाजपा का खाता: अखिलेश यादवआप-कांग्रेस में गंठबंधन को लेकर नहीं बनी बात, सिसोदिया ने कही ये बातफिल्म यारियां की एक्ट्रेस एवलिन शर्मा को याद आए पुराने दिन, शेयर की ये तस्वीरेंराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने म्यूलर जांच रिपोर्ट को पूर्णतया असत्य और निराधार बतायासुपौल में राहुल ने पीएम पर जमकर साधा निशाना, कहा- चौकीदार को ड्यूटी से हटाने वाली है जनताफारबिसगंज में बोले प्रधानमंत्री मोदी, जनता की तपस्या को विकास कर लौटाऊंगाबेकार गई राणा और रसेल की पारी, बेंगलुरु ने 10 रन से जीता रोमांचक मुकाबला
जरूर पढ़े
दिल के दौरे के बाद अकेले रहना खतरनाक
By Deshwani | Publish Date: 8/4/2017 3:39:48 PM
दिल के दौरे के बाद अकेले रहना खतरनाक

 नई दिल्ली, (आईपीएन/आईएएनएस)। दिल के दौरे के बाद अकेले रहना खतरनाक हो सकता है। इससे अगले चार सालों में मौत का खतरा भी मंडरा सकता है। यह जानकारी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल दी। अमेरिकन जरनल ऑफ कार्डियोलॉजी में प्रकाशित एक ताजा अध्ययन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि दिल के दौरे के एक साल बाद मौत होने की संभावना अकेले रह रहे व्यक्ति की भी उतनी ही होती है जितनी किसी के साथ रह रहे पीड़ित की होती है। लेकिन अकेले रह रहे मरीज की चार सालों में मौत होने की संभावना 35 प्रतिशत ज्यादा होती है।

आईएमए के महासचिव डॉ. आरएन टंडन ने बताया कि सामाजिक सहयोग बीमारी पर गहरा प्रभाव डालता है। यह न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ाता है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है। परिवार और दोस्तों का सहयोग ऐसे मरीजों को तंदरूस्त होने और अच्छी जिंदगी जीने में मदद करता है।

जो लोग अकेले रहते हैं उनके तंदुरुस्त होने में रुकावट आ जाती है, क्योंकि उन्हें दवाइयां लेने, बताए गए व्यायम करने के लिए प्रोत्साहन और चेकअप के लिए डॉक्टर के पास जाने के लिए जिस सहयोग की आवश्यकता होती है, वह उनके पास नहीं होता।

image
COPYRIGHT @ 2016 DESHWANI. ALL RIGHT RESERVED.DESIGN & DEVELOPED BY: 4C PLUS