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विश्व स्तनपान सप्ताह : केवल 40 प्रतिशत बच्चे ही पाते हैं पहले छह माह मां का दूध
By Deshwani | Publish Date: 1/8/2017 5:21:26 PM
विश्व स्तनपान सप्ताह : केवल 40 प्रतिशत बच्चे ही पाते हैं पहले छह माह मां का दूध

नई दिल्ली, (हि.स.)। दुनिया का कोई भी देश स्तनपान से जुड़े बताये गए मानकों के अनुरुप खरा नहीं उतरता है। यूनिसेफ और विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्तनपान दर बढ़ाने से जुड़े संयुक्त अभियान ‘ग्लोबल ब्रेस्टफीडिंग कोलेक्टिव’ की एक रिपोर्ट में उक्त बात सामने आई है। 
इसके मुताबिक 194 देशों में केवल 40 प्रतिशत बच्चों को पैदा होने के 6 माह के भीतर केवल मां का दूध दिया जाता है (उसके अलावा कुछ और नहीं) और केवल 23 देशों में यह आंकड़ा 60 प्रतिशत से ज्यादा है। 
शोध बताते हैं कि पहले छह माह में स्तनपान कराना जच्चा और बच्चा दोनों के लिए ही लाभदायक होता है। एक तरफ तो जहां यह बच्चे को गंभीर बीमारियों जैसे डायरा और निमोनिया से बचाता है वहीं उसकी माता को यह लाभ मिलता है कि उसे स्तन और योनि से जुड़े कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है। 
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ टेड्रोस अधानोम घेब्रियेसस का कहना है, ‘‘स्तनपान बच्चे के लिए पहली दवा का काम करता है, उसे गंभीर बीमारियों से बचाता है और उसे बढ़ने व बचे रहने के लिए पोषण प्रदान करता है।’’
आज से एक सप्ताह तक विश्व स्तनपान दिवस मनाया जायेगा। इस अवसर पर रिपोर्ट जारी करते हुए यह माना गया है कि हर वर्ष केवल 4.70 अमेरिकी डॉलर खर्च कर पहले छह माह केवल मां का दूध दिए जाने से जुड़े आंकड़ों को वर्ष 2025 तक 50 प्रतिशत तक पहुंचाया जा सकता है। 
यूनिसेफ के कार्यकारी निदेशक एंथनी लेक का कहना है, ‘‘स्तनपान में निवेश करने में नाकाम रहने पर हम माता और उनके बच्चों को खोकर दोहरा नुकसान उठायेंगे, एक तरफ जीवन और दूसरी तरफ अवसर खोयेंगे।’’
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि कई सतत विकास लक्ष्यों की उपलब्धि के लिए स्तनपान महत्वपूर्ण है। यह पोषण में सुधार लाता है, बाल मृत्यु दर कम करता है, गैर-संचारी रोगों के जोखिम को कम करता है और संज्ञानात्मक विकास व शिक्षा के लिए बेहतर साबित होता है। स्तनपान गरीबी समाप्त करने, आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और असमानता को कम करने के लिए एक संयोजक भी है।
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