ब्रेकिंग न्यूज़
स्ट्रीट डांसर 3d में ऐसा होगा श्रद्धा कपूर का लुक, वरुण धवन ने शेयर किया पहला पोस्टरसमस्तीपुर के दलसिंहसराय में महिला से दुष्कर्म के बाद हत्या, गेहूं के खेत में मिला शवराजधानी दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई इलाकों में भारी वर्षा, उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में रेड अलर्ट जारीपीएम मोदी ने संसद भवन पर आतंकी हमले में शहीदों को दी श्रद्धांजलिनागरिकता संशोधन विधेयक 2019 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दी मंजूरीझारखंड विधानसभा चुनाव 2019: तीसरे चरण में 1:00 बजे तक 45% से अधिक मतदानआज उच्‍चतम न्‍यायालय में दुष्‍कर्म और हत्‍या के चार आरोपियों की मुठभेड़ में मौत की एसआईटी जांच की याचिकाओं पर होगी सुनवाईएक संसदीय समिति ने कहा है कि सरकार को रसोई गैस पर अधिक सब्सिडी वाली एक और योजना शुरू करने के बारे में करना चाहिए विचार
बिहार
रक्सौल में चमकी बुखार पर कार्यशाला, खाली पेट व धूप से दूर रखें बच्चों को
By Deshwani | Publish Date: 18/6/2019 11:00:00 PM
रक्सौल में चमकी बुखार पर कार्यशाला, खाली पेट व धूप से दूर रखें बच्चों को

रक्सौल। अनिल कुमार।

एईएस/जेई दिमागी बुखार से बचाव के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रक्सौल यूनिसेफ कार्यालय के सभागार में उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बच्चों को खाली पेट व धूप से दूर रखने को बताया गया है।
 
वहीं इसके लक्षण पता चलते ही चिकित्सक के पास ले जाने का परामर्श दिया गया। प्राथमिक उपचार में बच्चों को ढंडा व ताजा पानी से पोछते रहने व ओआरएस घोल देते रहने को बताया गया है। बच्चों को हवादार जगह पर रखने की सलाह व कम्बल मेंं लपेटना से मना किया गया है।

 कार्यशाला की अध्यक्षता प्रखंड विकास पदाधिकारी कुमार प्रशांत एवं चिकित्सा पदाधिकारी डॉ शरत चंद्र शर्मा ने की। इस कार्यशाला में ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्र के विकास मित्रों को इस बीमारी से होने वाले लक्षणों व बचाव के बारे में जानकारी दी गई। इस कार्यशाला में एईएस/जेई बीमारी कब होती है, किसको होती है, इस बीमारी की पहचान तथा क्या कारण है। पहचान होने पर क्या नहींकरना है। इस बीमारी की रोकथाम में आशा, आंगनबाड़ी, सेविका, एएनएम विकास मित्र, जीविका कर्मी तथा स्वास्थ्य कर्मी की भूमिका, इस बीमारी से बचाव के लिए क्या सावधानी बरतें आदि पर विस्तृत जानकारी दी गई।

0 से 15 वर्ष तक के कुपोषित बच्चों अाते हैं चपेट में-
 कार्यशाला में बताया गया कि यह बीमारी अप्रैल माह से जुलाई माह तक पाया जाता है। जो 0 से 15 वर्ष तक के कुपोषित बच्चो को होता है। जो बच्चे इन दिनों में बिना खाये-पिये धूप में खेलते रहते है। जो रात में भर पेट भोजन के बिना ही सो जाते है। मस्तिक ज्वर के बच्चों की पहचान होने पर तेज बुखार होने पर, शरीर को ताजे पानी से पोछते रहे। बुखार का शिरप या पैरासिटामोल की गोली दें। बच्चा बेहोश न हो तो ओआरएस का ताजा घोल पिलाएं। बच्चो को हवादार जगह पर रखे। बीमार बच्चों को कंबल व गर्म कपड़ों में न लपेटें। एम्बुलेन्स सेवा की 102 नम्बर डायल कर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाए। ताकि बच्चों की जल्द इलाज हो सके व बच्चा स्वस्थ्य हो जाए। इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में वातानुकूलित एईएस वार्ड है।
 
image
COPYRIGHT @ 2016 DESHWANI. ALL RIGHT RESERVED.DESIGN & DEVELOPED BY: 4C PLUS