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उप्र में मेडिकल सर्विस बोर्ड बनना चाहिए: मंत्री गोपाल टंडन
By Deshwani | Publish Date: 11/5/2017 12:40:20 PM
उप्र में मेडिकल सर्विस बोर्ड बनना चाहिए: मंत्री गोपाल टंडन

विद्या शंकर राय  

लखनऊ, (आईपीएन/आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और पेशेंट केयर (मरीजों की देखभाल) का बुरा हाल है। राज्य के मेडिकल कॉलेज प्रोफेसरों और चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे हैं। स्थिति में सुधार के लिए प्रदेश के प्राविधिक शिक्षा एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री गोपाल टंडन मेडिकल सर्विस बोर्ड के गठन की जरूरत महसूस कर रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि उप्र में इस बात की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं कि क्या उप्र में मेडिकल सर्विस बोर्ड का गठन किया जा सकता है? उन्होंने यह भी कहा कि विभाग इस बात पर भी विचार कर रहा है कि प्रोफेसरों की सेवानिवृत्ति की उम्र 65 से बढ़ाकर 70 कर दी जाए। विधानसभा स्थित अपने कार्यालय में मौजूद कैबिनेट मंत्री गोपाल टंडन ने आईएएनएस को दिए साक्षात्कार में कहा कि पिछली सरकारों की कार्यशैली की वजह से उप्र की चिकित्सा शिक्षा और पेशेंट केयर का काफी बुरा हाल है। इसको ठीक कराने और पटरी पर लाने में सरकार को कम से कम 2 साल लग सकते हैं।
टंडन ने कहा, “ चिकित्सा शिक्षा में फैकल्टी की बहुत कमी है। इस कमी को दूर करने के लिए कई जगह संविदा पर लोगों को रखा गया है। लेकिन वास्तव में हम इस कमी को दूर करने के प्रति काफी गंभीर हैं। हम इस बात के लिए प्रयासरत हैं कि मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में फैकल्टी की कमी को कैसे दूर किया जाए।“
उप्र के पूर्व दिग्गज मंत्री लालजी टंडन के पुत्र और लखनऊ से विधायक गोपाल टंडन अपने इलाके में काफी लोकप्रिय हैं। दूसरी बार विधायक बने टंडन को उनके दमदार व्यक्तित्व की वजह से ही प्रावाधिक शिक्षा एवं चिकित्सा शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन विभागों की बेहतरी के लिए वह काफी गंभीर दिख रहे हैं।
गोपाल कहते हैं, “पिछली सरकारों ने वाकई कुछ नहीं किया है। चिकित्सा शिक्षा का काफी बुरा हाल है। पिछली सरकार ने जो गड्ढे बनाए हैं, उन्हें भरने में ही कम से कम दो साल लग सकते हैं। लेकिन हमारा मानना है कि हमें भविष्य की ओर देखकर आगे बढ़ना है और चिकित्सा शिक्षा को उच्चस्तरीय बनाना है।“
कैबिनेट मंत्री ने कहा, “चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में प्रोफेसरों की काफी कमी है। हम इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या सरकार का अपना कोई मेडिकल सर्विस बोर्ड हो सकता है, जिसके तहत प्रोफेसरों की समय पर नियुक्ति हो सके। आलम यह है कि प्रोफेसरों की कमी की वजह से मेडिकल कॉलेजों में शिक्षा प्रभावित होने के साथ ही पेशेंट केयर (मरीजों की देखभाल) भी सही तरीके से नहीं हो पा रही है।“
गोपाल टंडन ने हालांकि इस बात पर खुशी जाहिर की है कि एमसीआई (मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया) ने एमबीबीएस में 150 सीटों को बढ़ाने की अनुमति दे दी है। इसे इसी सत्र से लागू किया जाएगा। इससे प्रोफेसरों की कमी कुछ हद तक दूर हो सकती है। पहले उप्र में कुल एमबीबीएस की 1840 सीटें थीं और अब 150 मिलने के बाद यह संख्या 1990 तक पहुंच गई है।
कैबिनेट मंत्री ने कहा, “हमारा प्रयास है कि मेडिकल कॉलेजों को और अधिक सुविधाएं दी जाएं, जिससे वहां गुणवत्तापरक शिक्षा मिले। साथ ही मरीजों की भी अच्छी तरह देखभाल हो सके। चुनाव के समय भाजपा ने अपने लोक कल्याण संकल्पपत्र में यह वादा किया था कि सरकार बनने के बाद उप्र में 25 नए मेडिकल कॉलेज और छह नए एम्स खोले जाएंगे। इस योजना पर काम शुरू हो गया है।“
गोपाल ने बताया, “जहां तक मेडिकल कॉलेजों का सवाल है, हम चाहते हैं कि जिन जिला अस्पतालों के पास पार्याप्त जमीन और सुविधाएं उपलब्ध हों, तो उन्हें मेडिकल कॉलेज के तौर पर विकसित किया जाए। इससे जिला अस्पतालों की गुणवत्ता में सुधार होगा। अलग से मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए जमीन लेने के साथ ही बिलिं्डग बनाने और फिर वहां उपकरण की व्यवस्था करने में काफी समय लगेगा।“
उन्होंने कहा कि जो जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज के मानकों को पूरा करेंगे, उन्हें उस स्तर पर विकसित किया जाएगा।
अस्पतालों में हो रही दवाओं की बिक्री को लेकर चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों के परिसरों में दवा की दुकानें खोलने की अनुमति दी जाती है। यहां से मरीज अपनी दवा लेते हैं। उन्होंने कहा, “हम इस बात पर विचार कर रहे हैं कि मेडिकल कॉलेज के हर विभाग के पास दवा की अपनी डिस्पेंसरी हो। मरीज जब वहां अपने चेकअप के लिए जाएं, तो उन्हें दवाइयां विभाग में ही मिल जाएं। बाहर भटकना न पड़े।“
कैबिनेट मंत्री ने कहा, “इसके साथ ही हम एक और नई पहल करने जा रहे हैं। सभी मेडिकल कॉलेजों और अस्प्तालों को निर्देश दिया गया है कि सभी लोग अपने यहां हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम लागू करें। इस व्यवस्था के तहत यदि कोई मरीज पहली बार संबंधित मेडिकल कॉलेज में दिखाने आता है, तो उसकी पूरी फाइल तैयार की जाए और उसे ऑनलाइन किया जाए, ताकि जब वह दोबारा दिखाने आए तो पहले से मौजूद जानकारी के आधार पर उसका इलाज किया जा सके।
उन्होंने कहा कि इस बात पर भी विचार किया जा रहा है कि अब सभी मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में लोगों को अपनी जांच रिपोर्ट के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। किसी तरह की जांच की रिपोर्ट अब मरीज को सीधे उसके मोबाइल पर मिलेगी। रिपोर्ट तैयार होने के बाद एक एसएमएस मरीज और संबंधित चिकित्सक, दोनों के पास जाएगा, ताकि दोनों को जांच रिपोर्ट के लिए भटकना न पड़े।
पिछली सरकार के दो प्रमुख कार्यो पर सवाल खड़ा करते हुए गोपाल टंडन ने कहा, “अखिलेश ने लखनऊ में कैंसर संस्थान और ट्रॉमा-2 का उद्घाटन तो कर दिया, लेकिन इनको चालू होने में अभी काफी समय लगेगा। उन्होंने कहा, “इन दोनों प्रमुख संस्थानों की केवल बिलिं्डग तैयार है। अंदर कुछ नहीं है। इसे सही तरीके से चलाने के लिए उपकरणों के साथ ही कर्मचारियों की नियुक्ति भी करनी पड़ेगी। सिर्फ बिलिं्डग खड़ा करने से संस्थान का कामकाज नहीं चलता है।“
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