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हम लोग लूटने के लिए नहीं, कुछ करने के लिए आये हैं : स्वतंत्रदेव
By Deshwani | Publish Date: 7/10/2017 1:51:00 PM
हम लोग लूटने के लिए नहीं, कुछ करने के लिए आये हैं : स्वतंत्रदेव

(साक्षात्कार)लखनऊ, (हि.स.)। आमतौर पर परिवहन विभाग का जिक्र आते ही भ्रष्टाचार और खाऊ-कमाऊ जैसे शब्द सामने आने लगते हैं। आम आदमी से सीधे तौर पर जुड़े इस विभाग के बारे में कभी भी आम जनता की ही राय बहुत अच्छी नहीं रही। आरटीओ का सीधा अर्थ रिश्वतखोरी माना जाता है और विभागीय मंत्री से लेकर आलाधिकारी आरोपों से घिरे रहते दिखायी देते हैं, लेकिन बीते छह महीनों में इस विभाग में ऐसा आमूलचूल परिवर्तन हुआ है, जो साफ नजर आ रहा है।
परिवहन मंत्री के तौर पर स्वतंत्र देव सिंह कभी स्वयं बसों की धुलाई करते दिखे तो कभी बस अड्डे पर शौचालय सफाई की कमान उन्होंने संभाली। बसों की सीट से लेकर आपातकालीन खिड़कियों की जांच, उसके रूट और सुरक्षा को लेकर उन्होंने अचानक पहुंचकर यात्रियों से सीधा संवाद किया और उनसे मिले फीडबैक को अमल में लाने के निर्देश दिये।
स्वतंत्र देव सिंह की यह पहल जहां जनता को रास आ रही है, वहीं उनका दावा है कि विभाग में भ्रष्टाचार पर 90 प्रतिशत अंकुश लग चुका है। दूरदृष्टि के कारण उसी सीमित संसाधनों में करीब छह हजार गांवों में बस सेवा मुहैया करायी गयी है। परिवहन के क्षेत्र में आए बदलावों और भविष्य की योजनाओं पर विभागीय मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह से हिन्दुस्थान समाचार के उत्तर प्रदेश के ब्यूरो प्रमुख ने विस्तृत बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंशः-
 
छात्र राजनीति, पत्रकारिता, पार्टीगत राजनीति, अब सरकार का भार, इसे किस रुप में देखते हैं?
मेरे जीवन में बचपन से ही समाज के लिए कुछ करने का भाव रहा। जब मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का 1988 में तृतीय वर्ष करने नागपुर गया तो मेरे जीवन में आमूलचूल बदलाव आया। उस समय तृतीय वर्ष के लिए यूपी से प्रभारी श्री संकठा प्रसाद जी थे। मुझे वर्ग के दौरान साक्षात ‘‘भारत माता’’ का दर्शन करने का एहसास हुआ। 
कानपुर में विस्तारक, प्रचारक, फिर संगठन मंत्री के नाते समाज के सभी बन्धुओं के बीच काम करने का अवसर मिला। कानपुर के संघचालक बैरिस्टर साहब के आवास में कार्यालय चलता था। वहीं रहता था, आदिवासी बन्धुओं का छात्रावास भी था। उनके साथ रहना, खाना-पीना पहले तो अटपटा लगा, फिर साथ रहने व भोजन करने के बाद जो आनन्द मिला, लगा कि पूरा समाज अपना है। वहीं से धीरे-धीरे मेरे जीवन में परिवर्तन होता चला गया।
 
राजनीति में पद पाने की लालसा होना स्वभाविक है, आपके मन में ऐसा कोई विचार?
(गंभीर मुद्रा में) हमने कभी, किसी से, यहां तक की भाजपा नेताओं से भी कभी कोई पद मांगा नहीं, सब घर बैठे-बैठे सबकुछ ईश्वर देता चला गया। छोटा, बड़ा, कैसा भी देता गया, लेकिन देता ही चला गया। संगठन में विश्वास-समर्पण-ईमानदारी ने सबकुछ दिया। मुझे परिवहन विभाग मिला, यहां भी ईमानदारी व समर्पित होकर परिवहन विभाग सुधरे, कर्मचारी खुशहाल हों, यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, दिन-रात उस काम में लगा हूं।
 
आरटीओ व एआरटीओ पर अक्सर भ्रष्टाचार का आरोप लगता है, आपका क्या मानना है?
प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद परिवहन निगम के एआरटीओ और आरटीओ कार्यालयों की कार्यसंस्कृति में आमूलचूल परिवर्तन हुआ है। राज्य में ओवरलोडिंग, डग्गामार (अवैध) वाहनों पर 90 प्रतिशत पूर्णतः रोक लगायी जा चुकी है। राज्य में कहीं भी आरटीओ महीना (मासिक घूस) लेते हुये नहीं मिलेगा। कोई ट्रक या बस मालिक यह नहीं कह सकता है कि आरटीओ महीना ले रहा है। एक भी केस नहीं मिलेगा।
 
भ्रष्टाचार को किस तरह रोकेंगे ?
(बेबाक) भ्रष्टाचार रोकने के लिए शुरूआत अपने से की। मंत्री पहले ‘पैसा’ लेता था। हम भी लेना शुरू कर दें, तो फिर से शुरू हो जायेगा। भ्रष्टाचार ऊपर से चलता है। मैं 100 प्रतिशत करूंगा, नीचे 200 प्रतिशत हो जायेगा। जब 30 प्रतिशत करूंगा तो नीचे 70 हो जायेगा। 
आपके विभाग पर डीजल चोरी का आरोप है, वर्तमान में क्या स्थिति है?
 
योगी सरकार बनने के बाद मुझे जब यह विभाग मिला तो ऐसी जानकारी मुझे भी दी गई। हमने छह माह के भीतर प्रदेश के 73 डिपो में ‘‘ऑटोमैट्रिक फ्यूल सिस्टम’’ लागू कर दिया है, इससे डीजल चोरी पर पूरी तरह रोक लग गयी है।
उ.प्र. के सभी गांवों को बस से जोड़ने का वादा कब तक पूरा करेंगे?
परिवहन निगम के उसी सीमित संसाधनों से अपने बेहतर काम किया है। कोई नई बस नहीं ली गई है। इसके बावजूद 100 दिन में 3750 गांवों को तथा छह माह में करीब 4766 गांवों को बस सेवा से जोड़ा जा चुका है। इसी क्रम में ऐसे गांवों में जहां अभी तक बसें नहीं पहुंच रही थीं, उनका कारण समझ कर 533 नए रूट बनाये जा रहे हैं, जिससे कम से कम 7,000 और गांवों को हम परिवहन सेवा से जोड़ पाएंगे।
 
यह कैसे संभव हुआ?
जो बसें तहसीलों से चल रही थीं, उसे ब्लॉकों से चलाया जा रहा है। बुलन्दशहर, सहारनपुर, मेरठ, हापुड़, गाजियाबाद, नोएडा के आस-पास के सभी गांवों को बस सेवा से जोड़ा जा चुका है। आगामी वर्षो में प्राइवेट व परिवहन की बसों से यूपी के सभी गांवों को जोड़ने का लक्ष्य पूरा करेंगे।
 
एक तरफ ए.सी. बसें, दूसरी ओर खटारा, इससे कब-तक यात्रियों को निजात मिलेगी?
50 नई बसें बेड़े में शामिल होने जा रही हैं। इसके साथ ही स्थिति में पहले से काफी सुधार हुआ है। बसों की आपातकालीन खिड़कियां, स्पीड मीटर, वायपर, स्वच्छता के क्षेत्र में काफी काम हुआ है। जहां तक सीटों की स्थिति है उसमें भी काफी सुधार हुआ, जल्द ही सब ठीक करा लिया जायेगा।
 
सड़क दुर्घटना रोकने के लिए कोई पहल?
हम सभी बसों में सीसीटीवी कैमरा लगवाने जा रहे हैं, इससे बहुत सारी आइडिया का पता चल जायेगा। हमारा ड्राईवर बस का संचालन कैसे कर रहा, क्या स्पीड थी, कैसे चला रहा था, इससे दुर्घटना पर रोक लगेगी।
 
यात्रियों की सुविधा व सुरक्षा, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कोई विशेष योजना?
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर 100 स्थानों पर सीसीटीबी कैमरा लगाने की योजना है। दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए बस स्टेशनों पर एयरपोर्ट की भांति ‘‘व्हीलचेयर एक्सेस’’ बनाने की योजना है। जो महिलाएं 65-70 वर्ष से ऊपर हैं, उनकी यात्रा निःशुल्क करने पर विचार चल रहा है। लम्बी दूरी की साधारण श्रेणी की बसों में भी अग्रिम आरक्षण की सुविधा प्रदान करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा सभी श्रेणी की बसों में पहले से यात्रा प्लान कर ऑनलाइन बुकिंग करने पर 5-15 प्रतिशत डिस्काउंट मिलेगा।
 
पिंक बसें कब-तक चलेंगी और विद्यार्थियों के लिए कोई योजना?
पिंक बसें महिलाओं के लिए हैं, इसमें महिलाएं अपने पति और बच्चों के साथ सफर कर सकती हैं। इसके रूट चयन पर काम चल रहा है, शीघ्र ही पिंक बसें सड़कों पर दौड़ती हुई दिखेंगी। वहीं अगर विद्यार्थियों की बात करें तो परिवहन एक अलग है और व्यवस्था परिवहन निगम अलग बात है। यह विभाग नो प्रॉफिट व नो लॉस पर चलता है। देश का अधिकांश परिवहन विभाग घाटे में ही रहता है। पिछले प्रॉफिट के आधार पर अगर स्थिति ठीक रहेगी तो विद्यार्थियों को सुविधा देने पर हम आगे विचार करेंगे।
 
घाटे से उबारने का कोई उपाय?
हम लोग घाटे से उबारने के लिए रात-दिन काम कर रहे हैं। योगी सरकार में परिवहन विभाग प्रॉफिट में आये, नित्य नये-नये प्रयोग किये जा रहे हैं। 11 राज्यों से अनुबंध करने जा रहे हैं। राजस्थान से अनुबंध हो चुका है। प्रमुख राज्यों में जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, पंजाब, बिहार, झारखण्ड, मध्य प्रदेश, छतीसगढ़ है। यह विभाग गांव-गिरांव व आम जनमानस से जुड़ा हुआ है। यह बिजनेस के लिए नहीं सेवा के लिए है।
 
पं. दीनदयाल उपाध्याय की जन्म शताब्दी पर ‘अंत्योदय’ बस सेवा शुरू करने का प्रस्ताव था, क्या स्थिति है?
इस नाम से कोई बस सेवा शुरू करने का प्रस्ताव नहीं था। एक बस सेवा शुरू करनी है। उसका ‘अंत्योदय’, परिवहन बस सेवा, आम जनमानस से जुड़ा कोई भी नाम हो सकता है।
 
किराया बढ़ोत्तरी की कोई संभावना?
योगी सरकार बनने के बाद कोई किराया नहीं बढ़ा है। यात्रियों को आत्याधिक सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। अब किराया बढ़ाना आवश्यक है। डीजल भी महंगा है।
 
डिजिटल इंडिया का परिवहन निगम पर प्रभाव?
आज के डिजिटल इंडिया युग में परिवहन के ट्विटर अकाउंट से निगम एवं विभाग से जुड़ी समस्याओं को सुना जा रहा है और त्वरित कार्यवाही की जा रही है। अभी 19 सितम्बर से परिवहन से जुड़ी जानकारियों को जनता तक सीधे पहुंचाया जा रहा है।
 
लखनऊ मेट्रो की ओर से बस और मेट्रो में सफर के लिए ‘स्मार्ट कार्ड’ का प्रपोजल है, क्या प्रगति है?
इस पर हम विचार कर रहे हैं। कोशिश है कि आने वाले समय में कागज रहित व नगदी का प्रयोग कम से कम हो। इससे पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होगा। हमने सुधार के लिए एक नई पहल की है। आरटीओ व परिवहन निगम में एक ‘सुझाव टीम’ बनाया है, जो नये-नये सुझावों पर अमल कर सुधार करेंगे।
 
परिवहन निगम में विगत 12 वर्षो से कोई नई नियुक्तियां नहीं हुई हैं, इस पर कोई पहल?
स्थायी नियुक्तियों पर चुप्पी साधते हुए, संविदा के माध्यम से नई नियुक्तियां होती रही हैं। पिछली सरकार में भी काफी नियुक्तियां हुई हैं, हम भी करने जा रहे हैं।
कर्मचारियों की हड़ताल पर आगामी छह माह तक रोक लगाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
इसके पीछे का हेतु कुछ नहीं है। कर्मचारी परिश्रम की पराकाष्ठा करेंगे। सरकार ने इतनी बसें दी हैं, इससे परिवार भी पालो, स्वयं अपने को खुशहाल रखो, यात्री को खुशी रखो, यात्रा मंगलमय व सुखद हो, सुरक्षित हो, इसकी भी चिंता करनी चाहिए। हड़ताल से क्या मिलने वाला है। कुछ समस्या हो बताओ, समाधान किया जायेगा।
 
2019 में प्रयाग में अर्धकुम्भ है, परिवहन निगम की क्या तैयारी है?
प्रयाग में होने वाले अर्धकुम्भ को लेकर हमारी तैयारी शुरू है। बस स्टेशन व बस डिपो की मरम्मत का काम चल रहा है। हम सुविधानुसार अन्य बस स्टेशनों का निर्माण करने वाले हैं। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी, इसके लिए योगी सरकार कटिबद्ध है। वहां हजारों बसों का बेड़ा लगा दिया जायेगा।
 
यूपी के सभी तीर्थ स्थलों को बस सेवा से कब-तक जोड़ेंगे?
सभी तीर्थ स्थलों के लिए बसों का आवागमन शुरू हो चुका है, बांदा से हरिद्वार, बांदा से हमीरपुर, चित्रकुट से हरिद्वार, चित्रकुट से अयोध्या, लखनऊ से नैमिषारण्य शुरू हो चुका है, अन्य तीर्थस्थलों पर भी बस सेवाएं जल्दी ही शुरु हो जायेंगी। दीपावली पर्व को देखते हुये सभी जगहों से बस सेवाओं को बढ़ा दिया गया है। 
 
अपने विभाग को लेकर आपकी संकल्पनाएं क्या है?
आने वाले समय में हमारे दोनों विभाग (परिवहन निगम तथा आरटीओ) भ्रष्टाचार मुक्त हो, गांव तक बसों का ठीक ढंग से संचालन, बसें साफ-सुथरी व समय से चलें, यात्रियों को हर प्रकार की सुविधा मिले, आरटीओ ऑफिस दलालों के चंगुल से मुक्त हो, जनमानस को सुविधा मिले और उनकी समसस्याओं का समय से निस्तारण हो जाय, यही हमारी संकल्पना है।
 
मंत्री स्वतंत्रदेव, स्वतंत्र प्रभार से संतुष्ट हैं?
(मुस्कारते हुए) बेहतर है, जो पार्टी दे दे, उसे लेकर काम करना है। अपेक्षाएं ज्यादा कम होना स्वाभाविक है। दुखी आत्मा भटकती रहती है, पार्टी जिसे तीन बार एमएलसी बना दे तो तब भी व्यक्ति दुखी रहता है। हमारे लिए संगठन सर्वोपरी है।
 
कांग्रेस सिंह से स्वतंत्रदेव बनने का रहस्य क्या है?
एमएलसी का पहला चुनाव ‘कांग्रेस सिंह’ के नाम से ही लड़ा था। यह नाम मेरे लोगों को पंसद नहीं था, बाद में संघ की प्रेरणा से नाम बदलकर स्वतंत्रदेव सिंह कर लिया।
 
अपने मंत्रालय के प्रमुख परिवर्तन बतायें?
अपने विभाग को ‘भ्रष्टाचार मुक्त’ बनाने के लिए प्रमुख पविर्तन किया है। ई-चालान, ई-पेमेंट, वेब बेस्ड सारथी 4.0 एप्लीकेशन, 63 बस स्टेशनों पर वाई-फाई सुविधा, बस सेवा की अपडेट जानकारी के लिए मोबाईल एप्प ‘‘ट्रैक योर बस’’, रूट रेशनलाइजेशन साफ्टवेयर, 10 स्टेशनों पर वाटर एटीएम, कानपुर बरेली मे ‘‘आटोमेटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक’’ समेत कई प्रमुख परिवर्तन किया है।
 
यदि आपसे योगी सरकार के छह माह और अपने विभाग की स्थिति का मूल्यांकन कराया जाए तो कितने प्रतिशत अंक देंगे?
(संभलते व बेबाक लहजे में) योगी सरकार में भ्रष्टाचार पर लगाम, गुण्डों व बदमाशों का एनकाउण्टर, किसानों की ऋणमाफी व उनके हित में निर्णय, गन्ना बकाया भुगतान, प्रधानमंत्री आवास योजना, ओडीएफ, स्वच्छता, बिजली समेत अन्य जनकल्याणकारी कामों को देखकर 100 प्रतिशत से अधिक अंक देंगे। ऐसा नहीं कि हम कह रहे हैं, दिख भी रहा है। नीयत भी साफ है और हम लोग गरीबों का कल्याण भी कर रहे हैं।
योगी सरकार के मंत्री, विधायक तथा भाजपा के कार्यकर्ता गरीबों की सेवा में लगे हुये हैं। हम लोग लूटने के लिए नहीं, कुछ करने के लिए आये हैं। राजनीति हमारा ‘व्यापार’ नहीं, मिशन है। मेरे विभाग की स्थिति अच्छी है, सुधार हो रहा है। आमूलचूल परिवर्तन हुआ है, जिसकी हम कल्पना नहीं कर सकते।
 
अंत में क्या कहना चाहेंगे?
गांव-गरीब-किसान, झुग्गी-झोपड़ी, आदिवासी-वनवासी-गिरिवासी, शोषित-वंचित के कल्याण के लिए मोदी और योगी का जो सपना है, उसे साकार करें। सबको भरपेट भोजन, रहने को छत, गांव की सीसी सड़कें, दवाईं और शिक्षा फ्री हो और इनके ऊपर आत्याचार न हो, उन्हें न्याय मिले, उनकी सेवा हो, सबका कल्याण हो, यह हम सबकी इच्छा है।
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