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झारखंड
लातेहार के ततहा गांव के पानी में फ्लोराइड की मात्रा बढ़ी, हड्डी की बीमारी से असमय बूढ़े हो रहे लोग
By Deshwani | Publish Date: 26/7/2017 7:22:28 PM
लातेहार के ततहा गांव के पानी में फ्लोराइड की मात्रा बढ़ी, हड्डी की बीमारी से असमय बूढ़े हो रहे लोग

लातेहार, (हि. स.)। सदर प्रखंड के पोचरा पंचायत का ततहा गांव बाहरी लोगों के लिए तो आकर्षण का केंद्र है लेकिन यहां रहनेवाले लोगों के लिए यह अभिशाप बन गया है। इस गांव के लोग असमय हड्डी की बीमारी से ग्रस्त हैं। लगभग 15 घरों के इस गांव में अब तक 15 से अधिक ग्रामीणों के हाथ, पैर और कमर की हड्डी टेढ़ी हो गयी है। कई ग्रामीण तो इस बीमारी के चपेट में आकर असमय दुनिया से चले गए।

ग्रामीणों ने बताया कि अधिकांश ग्रामीण 40 की उम्र तक पहुंचते- पहुंचते हड्डी में दर्द के रोग से ग्रसित हो जा रहे हैं। कई ग्रामीणों के तो रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो गयी है। वहीं लोग असमय बूढ़े हो जा रहे हैं। गांव की सुनीता देवी की उम्र मात्र 35 वर्ष है पर वह 60 वर्ष की बुढ़िया लगती हैं। ग्रामीणों के अनुसार हड्डी में दर्द होने के बाद कई डॉक्टरों से इलाज कराने पर भी दर्द कम नहीं होता है। 
ग्रामीण कृष्णकांत सिंह ने बताया कि उसने अब तक अपने इलाज में दो लाख रुपये से अधिक खर्च कर दिया लेकिन अब तक कोई सुधार नहीं हो पाया। इधर पूरे मामले की जानकारी जिला प्रशासन से लेकर पेयजल विभाग को है। इसके बाद भी यहां के चापानल में ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगाया गया। जानकारी के अभाव में ग्रामीण पानी पीते गए और बीमारी की चपेट में आते गए। इस संबंध में पेयजल विभाग के कार्यपालक अभियंता ने कहा कि विभाग को जानकारी मिली है। बचाव के उपाय किये जा रहे हैं।
लातेहार ततहा गांव के करमी देवी,चंद्रनाथ परहिया,मानती परहिया,सुनीता देवी,सकुंती देवी, लालमोहन सिंह, कृष्णकांत सिंह, नन्कु सिंह, राजाराम सिंह, जगदीश सिंह, बिलवसिया देवी,सुरती देवी, सोहबतिया देवी,सुजीता देवी, किस्मतिया देवी आदि की स्थिति अत्यंत खराब हो गयी है। ये लोग अब सीधे खड़े भी नहीं हो पाते हैं।
इस बीमारी के संबंध में डॉ हरेन महतो का कहना है कि गांव के पानी में फ्लोराइड की अधिकता हो सकती है। उन्होंने कहा कि फ्लोराइड के कारण हड्डी कमजोर हो जाती है। पानी की जांच के बाद बीमारी का पता चलेगा।
जारम गांव में बीमारी की सूचना के बाद वेदिक सोसाइटी ने चापानल के पानी की जांच की। इसमें काफी मात्रा में प्लोराइड पाया गया। ग्रामीणों को तत्काल चापानल का पानी पीने से मना किया गया।
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