किशनगंज
कैशियर के सुसाइड नोट के सकेतों से एसबीआई में करोड़ों की हेराफेरी का अंदेशा
By Deshwani | Publish Date: 8/2/2018 8:25:25 PM
कैशियर के सुसाइड नोट के सकेतों से एसबीआई में करोड़ों की हेराफेरी का अंदेशा

किशनगंज । किशनगंज जिला के भारत-नेपाल सीमा के गलगलिया एसबीआई शाखा के कैशियर रतन झा की मंगलवार को हुई मौत के बाद मिले सुसाइड नोट से शाखा में करोड़ों रुपये की हेराफेरी एवं उपभोक्ताओं के खाते से अवैध निकासी का खुलासा हुआ है। कैशियर रतन झा के परिजनों ने इस मामले में पुलिस से न्याय की गुहार लगाई है और कहा है कि मामले को सिर्फ आत्महत्या के नजरिये से नहीं देखा जाये बल्कि हत्या की दिशा में भी जाँच की जाये व उसके भी सुराग ढूंढे जाये | 

पुलिस अधीक्षक राजीव मिश्रा ने एसबीआई बैंक गलगलिया प्रकरण में आज बताया कि कैशियर रतन झा के परिजनों ने बुधवार को सदर थाने में कैशियर द्वारा लिखित सुसाइडल नोट पेश किया, जिससे इस शाखा से करोड़ों रुपये की हेराफेरी होने का अंदाजा लगाया जा रहा है। एसपी ने कहा कि मामले की गंभीरता पर सीबीआई जांच के लिए संपर्क किया गया है । उन्होंने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए शाखा प्रबंधक सुजीत कुमार दास एवं सफाई कर्मी राजीव झा को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। उनके घरों की भी तलाशी की जा रही है। तलाशी में सफाई कर्मी राजीव झा की दरभंगा सहित बिहार के कई जिले में घर मकान होने की जानकारी मिली है। उन्होंने बताया कि बैंक में भी तहकीकात जारी है, जांच में उपभोक्ताओं के खाते से भी अवैध निकासी का खुलासा हुआ है। मामले में सीबीआई से जांच के लिए संपर्क साधा गया है । 
गौरतलब है कि गलगलिया एसबीआई बैंक के कैशियर रतन झा का शव मंगलवार को शहर के रूईधाशा स्थित रेल लाइन पर पाया गया था। मौके पर पहुंची पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया था। घटना के खुलासा होने से शहर में चर्चा का बाजार गर्म है। घटना से उक्त बैंक शाखा में करोड़ों का घोटाला ही नहीं बल्कि नोटबंदी के दौरान बड़े पैमाने पर काले धन को सफेद करने में बड़ी हेराफेरी की बात चर्चा में आयी है। यह भी चर्चा में है कि घटना सुनियोजित हत्या भी हो सकती है। 
इधर कैशियर रतन झा के परिजनों ने पुलिस से न्याय की गुहार लगाई है | परिजन आत्महत्या के कारणों पर कुछ भी स्पष्ट नहीं कह पा रहे हैं| रतन झा के परिजनों ने कहा कि सफाई कर्मी राजीव झा व शाखा प्रबंधक सुजीत कुमार दास हमारे पति को लगातार प्रताड़ित किया करते थे। कई ऐसे दस्तावेजों पर भी उनसे हस्ताक्षर लिया गया था, जिसके लिए वे सहमत नहीं थे| 
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