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झारखंड
डायन-बिसाही का आरोप लगकार तीन लोगों को जलाया था जिंदा, 22 दोषियों को मिली आजीवन कारावास की सजा
By Deshwani | Publish Date: 8/8/2019 5:54:49 PM
डायन-बिसाही का आरोप लगकार तीन लोगों को जलाया था जिंदा, 22 दोषियों को मिली आजीवन कारावास की सजा

रांची। लोहरदगा जिले के कैरो थाना क्षेत्र के चिपो ठेका टोली में अंधविश्वास में डायन-बिसाही का आरोप लगाकर तीन लोगों को जिन्दा जलाने के मामले में आज लोहरदगा कोर्ट के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम गोपाल पांडे की अदालत ने 22 आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा सुनायी।

 
न्यायालय ने इस चर्चित मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद दो अगस्त को 22 लोगों को दोषी करार दिया था और सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिये 8 अगस्त तय की थी। सुनवाई के बाद न्यायालय ने सभी दोषियों को अलग-अलग धाराओं में आजीवन कारावास की सजा दी। अभियोजन पक्ष से प्रभारी लोक अभियोजक सतीश सिन्हा, अपर लोक अभियोजक मनोज झा और सहायक लोक अभियोजक सिद्धार्थ सिंह ने न्यायालय में दलीलें पेश कींं।
 
उल्लेखनीय है कि लोहरदगा जिले के कैरो थाना क्षेत्र के चिपो ठेकाटोली में 17 अप्रैल 2106 को अंधविश्वास में डायन-बिसाही के शक में एक ही परिवार के चार लोगों को घर में बंदकर जिंदा जला दिया गया था। इससे मौके पर ही गोवर्धन उरांव (60), मादो भगताइन (55) और सुखमनिया भगताइन (30) की मौत हो गई थी। परिवार के एक अन्य सदस्य लालादेव भगत को एसपी लोहरदगा ने जान पर खेल कर बचा लिया था।ग्रामीणों का आरोप था कि चिपो ठेकाटोली निवासी गोवर्धन भगत ओझा-गुणी का काम करता था। उन्हें संदेश था कि गोवर्धन भगत बच्चा चोरी कर उसकी बलि देता है। इसी शक के चलते लगभग 500 से ज्यादा ग्रामीणों ने गोवर्धन भगत सहित परिवार के चार सदस्यों को घर में बंद कर आग लगा दी थी। जानकारी मिलते ही देर रात तत्कालीन लोहरदगा एसपी कार्तिक एस दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे। इस दौरान उग्र ग्रामीणों ने एसपी की गाड़ी पर भी हमला कर दिया था। इसके बावजूद एसपी कार्तिक साहस का परिचय देते हुए आग में कूद गये और गोवर्धन भगत के पुत्र लालदेव भगत को बचा लिया था। आग इतनी तेज थी कि अग्निशमन विभाग के कर्मियों को आग पर काबू पाने में घंटोंं लग गये थे। 
 
घटना के बाद चेरगा भगत के पुत्र राजेश भगत के बयान पर कैरो थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया गया था। इस घटना में धनी उरांव के पुत्र बीरू उरांव सहित 24 नामजद और लगभग 500 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले में दो सेशन ट्रायल चला था। अदालत ने लगभग तीन साल तक ट्रायल और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद गुरुवार को 22 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
 
इन 22 लोगों को मिली सजा
गुरुवार को अदालत ने जिन 22 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी है, उनमें कैरो थाना क्षेत्र के चिपो निवासी दल्लु मुंडा का पुत्र एतवा पाहन, गुड़ी सिंभूटोली निवासी ओजीला कुजूर का पुत्र अमन कुजूर, चिपो डिपा टोली निवासी गुरमा उरांव का पुत्र राजू उर्फ राजकुमार उरांव, चिपो बगीचा टोली निवासी गोवर्धन उरांव का पुत्र संदीप उरांव, सोहन यादव का पुत्र विजय यादव, मकू यादव का पुत्र झरी उर्फ झरिया यादव, महली उरांव का पुत्र मन्ना उरांव, बाघी निवासी सुलेमान खाखा का पुत्र माइकल खाखा, जीवन मिंज का पुत्र प्रवीण मिंज, बोनीफास मिंज का पुत्र जीवन मिंज, लोरेंस खाखा का पुत्र मुनित खाखा, फिलिप तिर्की का पुत्र इरकान तिर्की, एडवर्ड तिर्की का पुत्र नोवेल तिर्की, रूपस खाखा का पुत्र मिराज खाखा, उदय साहू का पुत्र रामपूजन साहू, बिरसा उरांव का पुत्र धुरी उरांव, गुड़ी गांव निवासी गोवर्धन साहू का पुत्र पारस साहू, मुंशी साहू का पुत्र देसी मुन्ना साहू, धनेश्वर साहू का पुत्र दिवाकर साहू, धनी उरांव के पुत्र बीरू उरांव, दशरा उरांव का पुत्र सोमनाथ उरांव और महादेव उरांव का पुत्र राम उरांव शामिल हैं।

दोषियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए थी: पीड़ित परिवार
कोर्ट के फैसले पर पीड़िता परिवार ने संतुष्टि जाहिर की। हालांकि उनका कहना है कि दोषियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए थी। क्योंकि अपराध जघन्य था। परिवार के मुताबिक साजिश के तहत डायन-बिसाही का अफवाह उड़ाकर गांव के कुछ लोगों ने घटना को अंजाम दिया था।
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