झारखंड
समाज : श्रोत्रिय समाज में शादी के लिए दूल्हे को कराना होता है मुंडन
By Deshwani | Publish Date: 7/6/2017 11:43:25 AM
समाज : श्रोत्रिय समाज में शादी के लिए दूल्हे को कराना होता है मुंडन

जमशेदपुर, (हि.स.)। शादी तय होते ही दूल्हा हो या दुल्हन उन्हें सजाने के लिए लोग अच्छे ब्यूटी पार्लर की तलाश में जुट जाते हैं जिससे शादी के दिन दूल्हा-दुल्हन देखने में सुंदर लगें। लेकिन मैथिल ब्राहमण श्रोत्रिय समाज में लड़के शादी के दिन अपने सिर को मुड़वा कर जाते हैं। यही नहीं लड़कियों को भी घर में ही सजाया जाता है जिसे पसाईन कहा जाता है। वहीं शादी के दिन आने वाले बारातियों का पैर धोकर स्वागत किया जाता है। इस समाज में बारातियों को बिना नमक का खाना खिलाया जाता है। शादी के दिन दूल्हे का अपने सर के बाल मुंड़ाकर आना अनिवार्य है। पंडित माधव झा बताते हैं कि शादी एक यज्ञ होता है जिसमे दो परिवार का मिलन होता है। जो परिवार एक-दूसरे को नहीं जानते हैं वे एक होते हैं। इस यज्ञ में भगवान स्वयं विराजमान होते हैं। चूंकि शादी में शुद्धीकरण की जरूरत होती है। इसलिए यह माना जाता है कि शादी में अगर लड़का बाल कटवा ले तो वह शुद्ध हो जाता है। इस वजह से लड़के को बाल कटवाना पड़ता है। वहीं दूल्हे को शादी से लेकर लगातार चार दिनों तक धोती पहन कर रहना पड़ता है। और धोती पहन कर ही सारा विधि विधान करना पड़ता है। दुल्हन को भी घर में ही सजाया जाता है। घर में मौजूद औरतें ही दुल्हन को सजाती हैं जिसे पसाईन कहते हैं। शादी के दिन दूल्हा और दुल्हन जब तक शादी नहीं हो जाती तब तक वे उपवास रहते हैं। शादी के बाद लगातार चार दिनों तक दोनों को बिना नमक का भोजन खाना पड़ता है। इस समाज में दूल्हा और दुल्हन के लिए शादी से पहले एक फोटो तक देखना मना है।
लड़की के परिजन रिश्ता लेकर वर पक्ष के पास जाते हैं और लड़की के गुण की जानकारी देते हैं। इसके बाद रिश्ता पक्का हो जाता है। पर वह चाह कर भी वह कन्या को नहीं देख पाते हैं। जब वर पक्ष वाले कन्या पक्ष वाले को हां कह देते हैं तो उसे हरधरी कहते हैं और वर पक्ष वाले लोग कन्या पक्ष वाले लड़के की ऱाशि और नक्षत्र देते हैं जिससे विवाह की तारीख तय की जा सके। 
इस समाज में दहेज का लेन-देन मना है। यदि कन्या पक्ष वालों को कुछ देना भी है तो वे अपनी खुशी से बेटी और दमाद को देते हैं। हालांकि शादी में बड़े-बड़े कांसे के बर्तन देने का रिवाज इस समाज में है।
इस समाज में जो भी बाराती आते हैं उन सभी का पैर धुलाकर स्वागत किया जाता है। पैर उन्हीं का धुलाया जाता है जो पारंपरिक ड्रेस धोती-कुर्ता और पाग पहन कर आते हैं। पैर धुलाने के बाद उनकी आरती भी उतारी जाती है। 
इस शादी में आने वाले बारातियों को बिना नमक का खाना मिलता है। इसमें कन्या पक्ष के लोग अपने सामर्थ्य के अनुसार 9, 13, 21 या 56 प्रकार के व्यंजन बनाते हैं। यही नहीं कम से कम पांच तरह के अचार भी खाने में शामिल रहता है। लेकिन जो भी खाना मिलता है सब बिना नमक का होता है। हां ये जरुर है कि अलग से नमक दिया जाता है। इस संबंध में पंडित माधव झा ने कहा कि जो शादी हो रही है उसमें दोनों परिवार एक-दूसरे को जानते नहीं है और जो एक-दूसरे को जानते नहीं हैं वे नमक कैसे खायेंगे। 
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