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संपादकीय
शीशे में पाकिस्तान का बदरंग चेहरा : डॉ. दिलीप अग्निहोत्री
By Deshwani | Publish Date: 26/12/2017 3:20:54 PM
शीशे में पाकिस्तान का बदरंग चेहरा : डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

नरेंद्र मोदी ने नवाज शरीफ की माँ का सम्मान किया था। यह भारतीय संस्कार और संस्कृति की बानगी थी । मोदी के पहल की विश्व भर में सराहना की गई। पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव की माँ और पत्नी को समुचित सम्मान नहीं दिया ,यह उनकी तहजीब थी। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है। पाकिस्तान ने इसी तहजीब को अपना राष्ट्रीय चरित्र बना लिया है। पाकिस्तान की इस तहजीब में आतंकी हिंसा के प्रति सम्मान है , लेकिन मानवीय दृष्टिकोण के लिए कोई जगह नहीं है। इस मौके पर पाकिस्तानी निजाम के साथ वहां की मीडिया का भी बदरंग चेहरा उजागर हुआ। सैनिक और प्रशासनिक निजाम एक वृद्ध और दुखी मां व पत्नी से डर गया। कुलभूषण जाधव की माँ और पत्नी से मुलाकात तो कराई गई, लेकिन डर ऐसा की इनके बीच शीशे की दीवार बना दी गई। इंटरकॉम से बात कराई गई। इक्कीस महीने बाद एक माँ अपने बेटे से मिली ,लेकिन उसे गले नहीं लगा सकी। पाकिस्तानी मीडिया इस पर अट्टाहास कर रहा था। बेमानी और शरारत भरे सवाल कर रहा था। जो सवाल उसको अजहर मसूद सहित असंख्य इस्लामी आतंवादियों से पूछने चाहिए थे , वह जाधव की माँ से पूछे जा रहे थे। यह पाकिस्तानी मीडिया का चेहरा था। जो अपने मुल्क के आतंकियों से डरा ,सहमा था लेकिन बिना सबूत के गिरफ्तार व्यक्ति के परिजनों के प्रति सम्मान ,शिष्टाचार का कोई भाव नहीं था। पाकिस्तान की निजाम की दशा पर गौर कीजिए, पाकिस्तानी विदेशमंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि इस मुलाकात में जाधव को राजनयिक पहुंच दी गई। जबकि विदेश मंत्रालय का प्रवक्ता मोहम्मद फैजल कहता है कि राजनयिक पहुंच नहीं दी गई। फैसल यहीं तक नहीं रुका । बोला कि राजनयिक पहुंच की बात सियासत है । मतलब विदेश विभाग का प्रवक्ता अपने ही विदेश मंत्री पर सियासत करने का आरोप लगा रहा था।

इस दौरान पाकिस्तान की एक अन्य नापाक रंगत भी सामने आई। जिस समय जाधव के परिजन की मुलाकात चल रही थी , उसी समय वैश्विक आतंकी अजहर अपने सियासी कार्यालय का उद्घाटन कर रहा था। इसके बाद पाकिस्तान के आतंकी मुल्क होने में किसी को शक नहीं होना चाहिए। उसने जाधव से उसके परिजनों की मुलाकात मात्र दुनिया को दिखाने के लिए कराई थी। शीशे की दीवार हकीकत को रोकने के लिए थी। जाधव को ऐसे बढ़िया सूट पहनाया गया, जैसे उनका बड़ा खैरमकदम हो रहा है। सन्देह तो यह था कि उन्हें प्रताड़ित किया जाता रहा है। इस कारण उन्हें अपने पैरों खड़े होने और चलने में कठिनाई थी। शीशे की दीवार न होती तो यह सच्चाई सामने आ जाती। इससे बचने का पूरा इंतजाम किया गया था।

भारत के पूर्व राजनयिक कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान के सैनिकों ने ईरान सीमा से अवैध ढंग से गिरफ्तार किया था। सरकारी सेवा से अवकाश ग्रहण करने के बाद जाधव निजी व्यवसाय कर रहे थे। इसी सिलसिले में वह ईरान गए थे। वहां पाकिस्तान के सैनिकों ने उनका एक प्रकार से अपहरण किया था। यह वह समय था, जब अमेरिका आतंकवाद रोकने के लिए पाकिस्तान को चेतावनी दे रहा था। इससे पाकिस्तान परेशान था। अमेरिका सहायता देने बन्द कर दे तो पाकिस्तान बर्बादी की कगार पर पहुंच जाएगा। पाकिस्तान ने अमेरिका का ध्यान हटाने के लिए भारत का नाम घसीटने का प्रयास किया था। जाधव का अपहरण इसी साजिश का हिस्सा था। पाकिस्तान यह दिखाना चाहता था कि भारत उसकी सीमा पर आतंकवादी भेजता है। जाधव निःशस्त्र थे। उनके आतंकवाद में लिप्त होने के कोई सबूत नहीं थे। फिर भी उनके अपहरण के बाद पाकिस्तान ने उच्च स्तरीय साजिश रची। पहले कहा गया कि वह भारत के जासूस है। फिर उन्हें आतंकी बताया गया। सैनिक अदालत ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अवहेलना करते हुए उन्हें मौत की सजा सुना दी। 

अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से दूसरे देश के गिरफ्तार व्यक्ति की राजनयिक पहुंच या सहायता मिलनी चाहिए। पाकिस्तान ने ऐसा कुछ नहीं किया। जाधव को एक वीडियो के आधार पर मौत की सजा सुना दी गई। यह वीडियो भी फर्जी ढंग का था। इसमें जाधव अपना अपराध कबूल करते दिखाई दे रहे हैं। उस वीडियों में जाधव के बयान और हावभाव के बीच कोई तालमेल नहीं था । इसे कोई अनाड़ी व्यक्ति भी महसूस कर सकता था। केवल इस सन्दिग्ध वीडियो के आधार पर उन्हें सजा दी गई। यह केवल वैश्विक कानून का ही नहीं, पाकिस्तान के अपने कानून का भी उल्लंघन था। पाकिस्तान के कानून के मुताबिक सैनिक अदालत अपने सैनिकों के मसले पर ही सुनवाई कर सकती है। किसी विदेशी के मामले की सुनवाई का उसे अधिकार ही नहीं है। बिना अधिकार के उसने इतना बड़ा फैसला भी सुना दिया। यह भी पाकिस्तान का एक चेहरा है, जहां कानून, संविधान सब कुछ सेना की मर्जी से संचालित होते हैं। सेना ने तय किया कि तत्काल भारतीय व्यक्ति पर जासूसी का आरोप लगाकर सजा सुनानी है। सैनिक अदालत ने इस पर अमल करके दिखा दिया । 

पाकिस्तान ने भारत को बदनाम करने के लिए अपने और अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी की है। उसकी न्यायिक प्रक्रिया अन्याय पर आधारित थी । यही कारण था कि अंतरराष्ट्रीय अदालत ने जाधव को मिली सजा पर रोक लगा दी थी । भारत भी उन्हें राजनयिक पहुंच देने की मांग करता रहा है। लेकिन पाकिस्तान जनता है कि ऐसा करने से उसकी असलियत सामने आ जायेगी। दुनिया को पता चल जाएगा कि किस प्रकार मात्र दुष्प्रचार के लिए पाकिस्तान एक निर्दोष व्यक्ति का जीवन समाप्त करने पर आमादा है। वह यह भी जानता है कि इससे उसका चेहरा नहीं बदलेगा। विश्व में कोई इतना नादान नहीं कि भारत को आतंकवाद फैलाने वाला देश मान ले । यह पहचान तो पाकिस्तान की ही रहेगी। दुनिया जानती है कि भारत जिम्मेदार देश है। उसकी नीति विश्व में शांति और सौहार्द बढ़ाने की रहती है। यह भारत का मूल चिंतन है । सरकार बदलती रहती है किन्तु भारत की इस स्थाई नीति पर कोई फर्क नहीं पड़ता। इसके विपरीत पाकिस्तान की आतंकी मानसिकता उसकी स्थाई पहचान है। वहाँ सरकार बदलती है, लेकिन पाकिस्तान की आतंकी मानसिकता वाली छवि नहीं बदलती है, न सेना के वर्चस्व में कोई कमीं होती है। जाधव को मिली सजा और उनकी माँ ,पत्नी के साथ किया गया व्यवहार इसकी ताकीद करता है।

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