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संपादकीय
औद्योगिक निवेश के लिए योगी सरकार का रोड शो : सियाराम पांडेय ‘शांत’
By Deshwani | Publish Date: 18/12/2017 11:29:57 AM
औद्योगिक निवेश के लिए योगी सरकार का रोड शो : सियाराम पांडेय ‘शांत’

विकास इस देश का सपना है। ऐसा सपना जो यहां के हर रहवासी की आंखों में पला-बसा है। विदेशी आक्रमणकारियों ने सोने की चिड़िया कहे जाने वाले इस देश को जमकर लूटा-खसूटा। यहां के ज्ञान-विज्ञान को प्रभावित किया। देश को आजाद कराने के पीछे क्रांतिकारियों का सपना ही यही था कि आजादी के बाद भारत का पुराना वैभव लौटेगा। भौतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक समृद्धि से वह फिर मालामाल होगा। भारत ने समृद्धि की भी लेकिन क्रांतिकारियों का सपना आज तक पूरा नहीं हो सका। आर्थिक और सामाजिक असमानत जिस तेजी के साथ बढ़ी, उसे नकारा नहीं जा सकता।

 

गांधी के सपनों का रामराज्य देश में आज तक स्थापित नहीं हो सका। लगभग 6 दशक तक देश पर कांग्रेस का शासन रहा लेकिन उसने भी विकास को लेकर सुनियोजित और सुचिंतित नीति नहीं अपनाई। विकास योजनाएं तो बनीं लेकिन क्रियान्वयन के मामले में वे फिसड्डी ही साबित हुईं। प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने विकास के पहिए को तेजी से घुमाने और देश से गरीबी मिटाने की दिशा में कार्य शुरू किया है। विदेशियों के लिए भारत में निवेश के दरवाजे तो मनमोहन सिंह ने ही उदारीकरण के बहाने खोल दिए थे लेकिन भारत में विदेशी पूंजी निवेश आकर्षित करने में कांग्रेस कुछ खास सफलता हासिल नहीं कर पाई।

 

नरेंद्र मोदी ने दुनिया के तमाम देशों की यात्रा कर वहां के उद्योगपतियों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया है। यहां के उद्योगपति विदेशी सरजमी पर अपना व्यापार फैला भी रहे हैं लेकिन ‘मेक इन इंडिया’ मिशन के तहत भारत में विदेशी निवेश हेतु जितनी भूमि की आवश्यकता है, उसके लिए मोदी सरकार अपेक्षित भूमि का अधिग्रहण नहीं कर सकी। इसके पीछे संसद के उच्च सदन में भाजपा सांसदों की अल्प तादाद भी बहुत हद तक जिम्मेदार रही लेकिन इसके बाद भी मोदी सरकार ने हार नहीं मानी। जिस तरीके से देश के अनेक राज्यों में भाजपा की सरकारें बनी हैं, उससे भाजपा राज्यसभा में भी मजबूत हो जाएगी तब देश में निवेश योग्य कानून बनाने और मनमुताबिक जमीन अधिग्रहण में उसे खास परेशानी नहीं आएगी।

 

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु की मानें तो खाद्य सुरक्षा और अन्य मुद्दों पर समर्थन जुटाने के लिए फरवरी में भारत विश्व व्यापार संगठन के कुछ सदस्य देशों की बैठक बुलाने जा रहा है। बैठक का उद्देश्य समान विचारधारा वाले देशों राष्ट्रों को एक साथ लाना है और सामान्य हित से जुड़े मुद्दों पर चिंता व्यक्त करने के साथ-साथ देश की स्थिति के बारे में जानकारी देना है। यह कदम उठाने का फैसला ऐसे समय आया है, जब विकसित देश निवेश सुविधा को बढ़ाने, ई-कॉमर्स के लिए नियम तैयार करने, लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और मत्स्य पालन पर सब्सिडी कम करने के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं। बैठक में भारत सदस्य देशों के समक्ष विभिन्न मुद्दों पर अपना पक्ष रखेगा और उन्हें सामूहिक कार्रवाई के लिए तैयार करेगा।

 

इसमें संदेह नहीं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विकास के सपने को पूरा करने के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत में पूंजी निवेश बढ़ाने के लिए दुनिया के अधिकांश देशों का भ्रमण कर चुके हैं। लाल किले की प्राचीर से वे विदेशी निवेशकों से ‘मेक इन इंडिया’ का आह्वान भी कर चुके हैं। उनकी अपील का असर देश के अन्य राज्यों पर भी पड़ा है। उत्तर प्रदेश की तत्कालीन अखिलेश सरकार ने भी ‘मेक इन यूपी’ मिशन आरंभ किया था। इस बावत निवेशक सम्मेलन भी आयोजित किए गए गए। निवेशक सम्मेलन में कई देशों के निवेशकों ने अनुबंध पर दस्तखत भी किए लेकिन अखिलश यादव इतना सब करने के बाद भी निवेशकों का विश्वास जीत पाने में विफल रहे। राज्य की खराब कानून व्यवस्था और उनके परिवार की आंतरिक कलह ने निवेश पूर्व ही उन्हें बैकफुट पर ला दिया। अमर सिंह जैसे चमत्कारी उद्योगपति नेता को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाकर भी अखिलेश इस मायने में घाटे में रहे। अपराधों की बढ़वार को लेकर वे निरंतर विपक्ष के निशाने पर रहे। यही नहीं, उनके पिता और तत्कालीन सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने तो उन्हें यहां तक नसीहत दे डाली कि अगर वे मुख्यमंत्री होते तो दिखा देते कि राज्य कैसे चलता है? निवेशक सुरक्षा पूर्ण माहौल तो चाहता ही है, वह सरकार की राजनीतिक स्थिरता भी देखता है। 

 

अब योगी आदित्यनाथ ने बतौर मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश में विदेशी निवेश का बीड़ा उठाया है। 21-22 फरवरी को उत्तर प्रदेश में वह निवेशक सम्मेलन आयोजित कर रही है। इसमें देश-विदेश के व्यापारिक घरानों और अन्य उद्योगपतियों को आकर्षित करने के लिए देश भर में रोड शो करने का निर्णय लिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस कार्यक्रम की शुरुआत करने वाले हैं। एक ओर जहां गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणाम आ रहे हैं, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में रोड शो की शुरुआत कर रहे हैं। फरवरी में होने वाले इन्वेस्टर्स मीट में ज्यादा से ज्यादा निवेशकों को उत्तर प्रदेश में लाने के लिए यूपी के औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। वे अपनी टीम के साथ देश भर में रोड शो कर रहे हैं। 

 

योगी आदित्यनाथ प्रदेश में अखिलेश सरकार जैसे हालात नहीं बनने देना चाहते। सभी जिलों में पर्याप्त बिजली देने के उसके वायदे को इसी रूप में देखा जा रहा है। प्रदेश में अपराध माफियाओं के एनकाउंटर भी यह बताने के लिए काफी है कि योगी सरकार उद्योगपतियों और व्यापारियों की सुरक्षा को लेकर बहुत गंभीर है। उसकी चिंता उत्तर प्रदेश की छवि को साफ-सुथरी, बिजनेस फ्रेंडली और सुरक्षित दिखाने की भी है, ताकि यहां पर अधिकतम औद्योगिक संयंत्र स्थापित हो सकें। सरकार जानती है कि प्रदेश में कल-कारखानों की तादाद बढ़ाकर ही बेरोजगारों हाथों को काम दिया जा सकता है। प्रदेश की गरीबी दूर करने का मार्ग भी यही है। 

 

योगी सरकार को विश्वास है कि इस सम्मेलन में देश-विदेश के तकरीबन 5 हजार उद्योगपति भाग लेंगे। मुम्बई, बेंगलुरु, गोवा, कोलकाता, दिल्ली, चंडीगढ़, पंजाब और हैदराबाद में रोड शो रखने का प्रयोजन निवेशकों की तादाद बढ़ाना और उन्हें उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए आकर्षित करना ही है। सरकार के दावों पर यकीन करें तो उत्तर प्रदेश में आयोजित निवेशक सम्मेलन में 1069 विदेशी निवेशकों ने भाग लेने की सहमति प्रदान कर दी है। इनमें अधिकांश प्रवासी भारतीय हैं जिनका दिल अपने देश के लिए कुछ करने को अनवरत धड़कता है। सरकार को उम्मीद है कि इस बहाने वह 1 लाख करोड़ का निवेश आमंत्रित कर सकेगी। यह सोने पर सुहागा वाली बात है। प्रदेश में जितने अधिक कल-कारखाने बनेंगे, उसका लाभ स्थानीय बेरोजगारों को उतना ही होगा। योगी सरकार निवैष आमंत्रित करने के मामले में यह पहला बड़ा आयोजन कर रही है। अभी तक वह चुनाव प्रचार के लिए रोड शो करती रही है लेकिन यह पहला मौका है जब प्रदेश के विकास के लिए वह देश के अन्य राज्यों की राजधानियों में रोड शो करने जा रही है। इससे उसकी विकास के प्रति प्रतिबद्धता का पता चलता है। 

 

सरकार लखनऊ को दुल्हन की तरह सजाना चाहती है।सम्मेलन से एक सप्ताह पहले ही पूरे प्रदेश को हाईअलर्ट पर रखा जाएगा, जिससे किसी भी तरह का माहौल न बिगड़ने पाए।सरकार की कोशिश है कि शहर में जितनी भी होर्डिंग्स लगे, सभी सुंदर और चित्ताकर्षक हो। यातायात व्यवस्था बेहतर हो। सड़कों को चाक-चैबंद किया जाए। योगी सरकार की चिंता वाजिब भी है। निवेशक को लगना चाहिए कि यहां निवेश करना सर्वथा निरापद है, तभी वह निवेश करेगा। इसके लिए सरकार को बेहद सतर्क रहना होगा। वैसे भी प्रदेश में जिस तरह गाहे-बगाहे आपराधिक घटनाएं हो रही हैं, उसने भी सरकार की चिंता का ग्राफ बढ़ा रखा है। 

 

मध्यप्रदेश, राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ और महाराष्ट जैसे भाजपा शासित राज्यों में भी विदेशी निवेश आमंत्रित करने के भरपूर प्रयास हो रहे हैं। पहल बुरी नहीं है। समग्र विवेक के साथ सरकार को इस दिशा में कदम उठाना चाहिए। भारत को रोजगार के साथ उसकी आर्थिक स्वायत्तता को बनाए रखना भी आज की सबसे बड़ी चुनौती है। देश और प्रदेश आगे बढ़ें, इसके लिए हर संभव प्रयास होने चाहिए लेकिन आकाश देखकर खेती नहीं की जानी चाहिए। भारत आर्थिक दृष्टि से बहुत उबरा नहीं है। इसलिए किसी भी कार्यक्रम पर धन खर्च करने से पहले उस धन की वापसी पर भी विचार होना चाहिए। ‘नौ की लकड़ी नब्बे खर्च’ वाली रीति-नीति ठीक नहीं है। मोदी और योगी सरकार की चिंता वाजिब है। इस देश और प्रदेश को आगे ले जाना है तो सभी को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। हर नागरिक का यह नैतिक धर्म भी है। सरकारों को भी वाजिब खर्च की रीति-नीति के साथ आगे बढ़ना होगा जिससे कि अविश्वास के हालात न बनें। विकास का माहौल बनाए रखकर ही सरकार इस देश और प्रदेश को गरीबी से निजात दिला सकती है।

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