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संपादकीय
सच्चे किसान हितैषी थे शीशराम ओला : रमेश सर्राफ धमोरा
By Deshwani | Publish Date: 14/12/2017 3:37:14 PM
सच्चे किसान हितैषी थे शीशराम ओला : रमेश सर्राफ धमोरा

शीशराम ओला एक ऐसे नेता रहे हैं जिन्हें सदैव किसानों के सच्चे हितैषी के रूप में याद किया जाता रहेगा। झुंझुनू लोकसभा क्षेत्र से लगातार पांच बार चुनाव जीतकर रिकॉर्ड बना चुके ओला का राजनीतिक जीवन 1957 से शुरू हुआ था। उनका जन्म 30 जुलाई 1927 को राजस्थान के झुंझुनू जिले के अरड़ावता गांव में किसान मंगलाराम के घर हुआ था। आर्थिक अभाव के कारण शीशराम ओला ने मैट्रिक की पढ़ाई करने के बाद भारतीय सेना में भर्ती हो गये। उन्होंने सेना की ओर से द्वितीय महायुद्व में भाग लिया। उस समय समाज में महिलाओं की स्थिति अच्छी नहीं थी जिसका मूल कारण था महिलाओं का अशिक्षित होना। समाज में महिलाओं की दशा सुधारने का संकल्प कर ओला ने सेना से त्यागपत्र देकर समाजसेवा के क्षेत्र में कदम रखा।

उन्होंने महिला शिक्षा की दिशा में कार्य करने का बीड़ा उठाते हुये 1952 में अपने पैतृक गांव अरड़ावता में इन्दिरा गांधी बालिका निकेतन के रूप में क्षेत्र में पहली बालिका स्कूल की स्थापना की जिसका उद़्घाटन 10 अक्टूबर 1952 को देश के प्रथम थलसेना अध्यक्ष जनरल केएम करिअप्पा के हाथों करवा कर राजस्थान में महिला शिक्षा के क्षेत्र में एक नई मशाल जलाई। मात्र तीन बालिकाओं से शुरू किया गया वही स्कूल आज डिग्री कॉलेज बन चुका है जहां कई व्यावसायिक व अन्य उच्चतर विषय पढ़ाए जाते हैं। वर्तमान में वहां तीन हजार से अधिक छात्राएं अध्ययनरत हैं तथा लाखों छात्राएं अपनी शिक्षा पूरी कर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं।

ओला की समाजसेवा व सक्रियता को देखकर कांग्रेस ने उनको 1957 में पहली बार खेतड़ी से विधानसभा का टिकट दिया, जिसमें वे विजयी हुए। ओला ने 1957 से 1993 तक लगातार दस बार राजस्थान विधानसभा का चुनाव लड़ा जिसमें आठ बार जीत दर्ज की। ओला 18 फरवरी 1981 से 1990 तक राजस्थान सरकार में जगन्नाथ पहाड़िया, शिवचरण माथुर, हीरालाल देवपुरा और हरिदेव जोशी के नेतृत्व वाली सरकारों में जलदाय, वन एवं पर्यावरण, पंचायतीराज एंव ग्रामीण विकास, सैनिक कल्याण, इन्दिरा गांधी नहर परियोजना, परिवहन, यातायात, सहकारिता, आबकारी, भू-जल, सिंचाई सहित कई विभागों को मंत्री के रूप में संभाला। ओला 1962 से 1977 तक दो बार झुंझुनू के जिला प्रमुख रहे। ओला अपने जीवन में आठ बार विधायक, पांच बार सांसद व दो बार जिला प्रमुख का चुनाव जीत कर कुल 15 चुनाव जीतने वाले देश के एकमात्र राजनेता थे। 

वर्ष 1996 में ओला ने 11वीं लोकसभा के लिए कांग्रेस से टिकट मांगा, मगर टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने कांग्रेस छोड़कर झुंझुनू लोकसभा क्षेत्र से तिवारी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर कांग्रेस प्रत्याशी व केन्द्रीय मंत्री कैप्टन अयूब खान को हराकर लोकसभा में प्रवेश किया। उसके बाद बाद उन्होंने लगातार पांच बार लोकसभा चुनाव जीत कर रिकॉर्ड बनाया। ओला को 28 जून 1996 को प्रधानमंत्री देवेगौड़ा की सरकार में स्वतंत्र प्रभार के उर्वरक एंव रसायन राज्य मंत्री बनाया गया। 1997-98 में गुजराल सरकार में उन्हें स्वतंत्र प्रभार का जल संसाधन राज्य मंत्री बनाया गया। 23 मई 2004 से 27 नवम्बर 2004 तक यूपीए-वन की सरकार में श्रम एवं रोजगार विभाग के कैबिनेट मंत्री तथा 27 नवम्बर 2004 से 22 मई 2009 तक खान विभाग के कैबिनेट मंत्री रहे। उन्हें 2010 में लोकसभा में कांग्रेस कांग्रेस संसदीय दल का उपनेता मनोनीत किया गया था। सितम्बर 2013 में उन्हे पुन: केन्द्रीय मंत्रिमंडल में श्रम व रोजगार मंत्री बनाया गया था।

ओला को उनके द्वारा सामाजिक क्षेत्र में किये गये विशेष कार्यों के लिए सरकार द्वारा उन्हें 1968 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। वे राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के कोषाध्यक्ष व किसान सेल के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 15 दिसम्बर 2013 को ओला का केन्द्रीय सरकार में कैबिनेट मंत्री पद पर रहते हुए नई दिल्ली में निधन हो गया था। ओला के बड़े पुत्र बृजेन्द्र सिंह ओला वर्तमान में झुंझुनू से विधायक हैं। ओला ने अपनी जिन्दगी में एक सपना देखा था कि झुंझुनू जिले में नहर के पानी से खेतों में फसलों की सिंचाई हो सके, ताकि हरियाणा की तरह राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के किसान भी खुशहाल बन सकें, मगर उनके जीते-जी नहर का पानी झुंझुनू जिले में नहीं आ सका। अब देखते हैं कि ऐसा कौन भागीरथ बनता है जो उनके सपने को पूरा कर सके।

 
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