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संपादकीय
महिलाओं के उत्थान के लिए उद्यमिता सम्मेलन : सियाराम पांडेय ‘शांत’
By Deshwani | Publish Date: 29/11/2017 1:07:39 PM
महिलाओं के उत्थान के लिए उद्यमिता सम्मेलन : सियाराम पांडेय ‘शांत’

अमेरिका के पूर्व प्रेसिडेंट बराक ओबामा के नेतृत्व में विश्व भर में सात वैश्विक उद्यमिता सम्मेलन हुए। इनमें कारोबार से जुड़ी नई सोच को हमेशा आगे बढ़ाने के प्रयास हुए लेकिन भारत में शुरू हुआ उद्यमिता सम्मेलन इन सबसे जरा अलग है क्योंकि यह सम्मेलन महिलाओं को आगे बए़ाने की बात करता है। उन्हें तरक्की के अगले पायदान पर रखता है। यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। पूर्व के सम्मेलनों में सबकी समृद्धि का भाव था। इस सम्मेलन में भी सबकी समृद्धि का भाव निहित है लेकिन पहले महिलाओं को महत्व दिया जा रहा है, यही इस सम्मेलन की अलौकिकता भी है, विलक्षणता भी है। अगर गृह खर्चों में बचत के मोर्चे पर महिलाएं अग्रणी हैं तो जब उनका खुद का कारोबार होगा तो वे कितनी बचत करेंगी, इसकी कल्पना सहज ही की जा सकती हैं। इस सम्मेलन की दूसरी बड़ी खासियत यह है कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भी एक महिला कर रही है। ऐसी महिला जो अमेरिका के प्रथम नागरिक की बेटी भी है और सलाहकार भी है। जिस सम्मेलन में 50 प्रतिशत से अधिक महिलाएं मौजूद हों, उस सम्मेलन की विशेषता सहज ही स्थापित हो जाती है। 

भारत ही वह देश है जहां महिलाओं को मातृस्वरूपा, शक्तिस्वरूपा कहा जाता है। जहां धर्मग्रंथ भी कहते हैं कि ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।’ अर्थात जहां नारियों की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। भारत को देवताओं का देश कहा गया है। यहां की 33 करोड़ आबादी को तैंतीस करोड़ देवता कहा गया था। भारत कर्मोपासना का देश है। गीता का एक अध्याय कर्मयोग है। भारत आविष्कारों का देश है। आविष्कारों को ही प्रकारांतर से चमत्कार कहा गया है। भले ही इवांका ट्रम्प द्वारा अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के नेतृत्व को लेकर अमेरिका में नाराजगी का माहौल हो। लोग इस परंपरा का उन्मूलन भी करार दे सकते हैं लेकिन जब महिला हितों की बात आती है तो यह कहने में शायद ही किसी को गुरेज हो कि महिलाओं की भावनाओं को महला ही बेहतर समझती हैं। इस लिहाज से अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प के निर्णय की सराहना की जानी चाहिए कि उन्होंने भारत में अपनी बेटी को भेजा। यह कुछ उसी तरह का निर्णय है जैसा कि सम्राट अशोक ने लिया था। उन्होंने अपने बेटे और बेटी को बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए श्रीलंका भेजा था। देखा जाए तो इससे भारत और अमेरिका के संबंध और प्रगाढ़ हुए हैं। 

क्हना न होगा कि भारत में आठवें वैश्विक उद्यमिता सम्मेलन की शुरुआत हो गई है और इसी के साथ महिलाओं के अभ्युदय पर चर्चा का दौर भी आरंभ हो गया है। यह तीन दिवसीय सम्मेलन महिलाओं के लिए खास है। इसमें उन्हें उद्योग-धंधे की कई बारीकियों को सीखने और उन सरीखी दूसरी महिला उद्यमियों के अनुभव-संस्मरण जानने-सुनने और समझने के मौके मिलेंगे। नए विचारों का मिलना भी बेहद अहम हैं। विचार ही हैं जो व्यक्ति को फर्श से अर्श तक ले जाते हैं। यह सम्मेलन महिलाओं के सपनों की उड़ान भरने का सम्मेलन है। यह सम्मेलन उनकी आत्मनिर्भरता का है। इस लिहाज से भी यह बेहद प्रशंसनीय है और देश-विदेश के बंद पड़े आंख-कान को खोलने वाला है। 

 

अमेरिकी राष्टपति की सलाहकार इवांका ट्रम्प और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के शुभारंभ के अवसर पर देश-विदेश की तरक्की में महिलाओं के योगदान का प्रमुखता से जिक्र किया। दोनों ने तहेदिल से इस बात को स्वीकार किया कि महिलाओं की आत्मनिर्भरता में ही देश-जहान का कल्याण है। इवांका ट्रम्प ने जहां भारत को व्हाइट हाउस का सच्चा दोस्त बताया,वहीं संयुक्त राज्य अमेरिका और 150 देशों की ओर से भारत के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। हैदराबाद के तेजी से इनोवेशन सिटी में तब्दील होने पर भी उन्होंने प्रसन्नता जाहिर की। सबके लिए समृद्धि मगर महिलाएं प्रथम की थीम पर आयोजित इस सम्मेलन में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश के करोड़ों लोगों के जीवन में लाए जा रहे बदलाव की भी प्रशंसा की। उन्होंने भारत को दुनिया की सबसे तेज रफ्तार से बढ़ती अर्थव्यवस्था करार दिया। इस तरह के विचार उनके पिता और अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प पहले ही व्यक्त कर चुके हैं। वे प्रधानमंत्री की प्रशंसा तक ही सीमित नहीं रहीं। उन्होंने भारतीय चिकित्सकों द्वारा जीवन रक्षक दवाओं के निर्माण और अनुसंधान कार्य को मुक्त कंठ से सराहा। उन्होंने माना कि भारत के लोग हमेशा अच्छे कल के लिए प्रयत्नरत रहते हैं। उद्यमिता से ही कोई भी देश आर्थिक दृष्टि से समृद्ध होता है। जब महिलाएं तरक्की करती हैं तभी देश अपने शिखर पर पहुंचता है। 2014 से 2016 के बीच दुनिया भर में महिला उद्यमियों की तादाद में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाएं भी अपना उद्योग लगा रही हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में 10 लाख उद्यमी हैं जो 90 लाख लोगों को नौकरी दे रहे हैं। महिलाएं आज बेमिसाल मुकाम हासिल कर रही हैं। महिलाएं गैप को भरने में बहुत बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। वे अपना व्यवसाय शुरू करने, उसे बढ़ाने में कामयाब हो सकती हैं। सम्मेलन में 1500 महिलाओं को देखकर उनको गर्व महसूस किया। हैदराबाद को उन्होंनी तकनीकी दुनिया में चमकने वाला ऐतिहासिक शहर बताया। 

जब हमारी महिलाएं सशक्त होगीं, तभी हमारे परिवार, हमारी अर्थव्यवस्था और हमारा समाज पूरी तरह से अपनी पूरी सामथ्र्य हासिल कर पाएगा। यूएस स्मॉल बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन ने इस साल महिलाओं को दिए जाने वाले कर्ज को बढ़ाकर 50 करोड़ डॉलर से ज्यादा कर दिया है। कुछ देशों में महिलाओं के प्रॉपर्टी रखने, अकेले फैसले लेने या बिना पुरुषों के बाहर जाने पर पाबंदी रहती है लेकिन अमेरिका में ऐसा नहीं है। इस साल जी-20 समिट में अमेरिका ने विश्वबैंक के साथ मिलकर वुमन आंत्रप्रेन्योरशिप इनीशिएटिव शुरू किया है। उनका यह भी मानना था कि महिला उद्योगपति नौकरी देने के मामले में ज्यादातर महिलाओं को वरीयता देती हैं। देश की तरक्की महिलाओं से ही होगी। अगर भारत में कार्यबल में लैंगिक विभेद कम हो जाए तो अर्थव्यवस्था पर 150 अरब डॉलर का फर्क पडे़गा। वर्षा जल संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रही 15 वर्षीय रेयान की तारीफ करना भी वे नहीं भूलीं। महिला और पुरुष बड़ा सपना देखने और बड़े मकसद को हासिल करने के लिए बने हैं। वे दोनों मिलकर दुनिया को बदल सकते हैं।

2010 से लेकर 2016 तक जहां-कहीं यह ग्लोबल समिट हुई, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगुआई या तो बराक ओबामा करते रहे या विदेश मंत्री जॉन कैरी लेकिन इस बार यूएस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व इवांका कर रही हैं। इवांका के साथ अमेरिका के 38 राज्यों से 350 लोग आए हैं। दक्षिण एशिया में पहली बार तकनीक की राजधानी हैदराबाद में हो रहे इस वैश्विक सम्मेलन में 127 देशों की तकरीबन 1500 महिला उद्यमी और 300 निवेशक भाग ले रहे हैं। 2010 में वैश्विक उद्यमिता सम्मेलन की शुरुआत पूर्व अमेरिकी प्रेसिडेंट बराक ओबामा ने की थी। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्यमिता सम्मेलन को भारत-अमेरिका का साझा मकसद बताया। भारतीय धर्मदर्शन के हवाले से उन्होंने महिलाओं को दुर्गा का अवतार तो बताया ही, इस सिद्धांत पर भी मुहर लगाई कि महिलाओं को मजबूत करने से ही देश और समाज की तरक्की होगी। उन्होंने महिला दार्शनिक गार्गी से लेकर रानी अहिल्याबाई होलकर और रानी लक्ष्मीबाई के संघर्ष की चर्चा कर भारत में महिलाओं के मजबूत इतिहास की बानगी पेश की। हैदराबाद में साइना नेहवाल, सानिया मिर्जा और सिंधु जैसी खिलाड़ियों की बात कर उन्होंने हैदराबाद को विश्व परिदृश्य से जोड़ने का प्रयास किया। 

लिज्जत पापड़ बनाने वाली महिलाओं के सहकारी योगदान की चर्चा करना भी वे नहीं भूले। उन्होंने यह भी बताया कि भारत हमेशा से नये विचारों, नई सोच और उद्यमिता को बढ़ावा देता रहा है। चरक संहिता ने आयुर्वेद को बढ़ावा दिया। योग भी पुरातन खोज है। पूरी दुनिया अब 21 जून को योग-डे मनाती है। दुनिया में शून्य का आविष्यकार एक भारतीय आर्य भट्ट ने किया था। कर प्रणाली, लोक वित्त योजना जैसे मुद्दों का कौटिल्य के अर्थशास्त्र में जिक्र है। इस सम्मेलन के जरिए नरेंद्र मोदी ने भारत का नजरिया प्रस्तुत किया। महिलाएं जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। अगर वे अपने औद्योगिक उपक्रम लगाती हैं तो इससे उन सरीखी अन्य महिलाओं को भी प्रेरणा मिलेगी। 

महिलाएं विकसित होंगी तो देश-दुनिया को आगे बढ़ते देर नहीं लगेगी। इस लिहाज से भी इस सम्मेलन का वैश्विक महत्व है। इस सम्मेलन का संदेश पूरी दुनिया में जाएगी। इससे हैदराबाद ही नहीं, भारत के अन्य शहर की उद्यमाकांक्षी महिलाओं को प्रेरणा मिलेगी। इस उपलब्धि को कमतर नहीं आंका जा सकता।

-लेखक हिंदुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।

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