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संपादकीय
योगी-बिल गेट्स में 45 मिनट बात, द्रुत गति से होगा विकास : सियाराम पांडेय ‘शांत’
By Deshwani | Publish Date: 18/11/2017 1:18:24 PM
योगी-बिल गेट्स में 45 मिनट बात, द्रुत गति से होगा विकास : सियाराम पांडेय ‘शांत’

बड़ी हस्तियों के लिए 45 मिनट बहुत मायने रखते हैं। इतने में ही वे अपने काम की बात कर लेते हैं। अपना एजेंडा तय कर लेते हैं जबकि सामान्य व्यक्ति के लिए दिन, माह और साल भी कम पड़ जाते हैं। वे अपने जीवन का लक्ष्य तय नहीं कर पाते लेकिन नवाचार से जुड़े लोग अपने हर क्षण का इस्तेमाल करना जानते हैं। योगी आदित्यनाथ जबसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं तब से वे निरंतर प्रदेश के विकास की गाड़ी को आगे बढ़ा रहे हैं। बिल गेट्स जैसे प्रमुख उद्योगपति को उन्होंने 45 मिनट का समय दिया लेकिन इस 45 मिनट में बहुत सारी काम की बातें हो गईं। प्रदेश को आगे ले जाने की योजना क्या है और बिल गेट्स की उत्तर प्रदेश के विकास में, यहां की सामाजिक, आर्थिक, औद्योगिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान में क्या भूमिका हो सकती है। वे किस हद तक सरकार की सहायता कर सकते हैं। उनका सहयोग सशर्त होगा या बिना शर्त का, यह सब तय हो गया। इसे किसी उपलब्धि से कम नहीं माना जाना चाहिए। 

योगी की ईमानदारी, विकासमूलक सोच और जिम्मेदारी पूर्ण आचरण का ही प्रभाव है कि विदेशी कंपनियां भी उत्तर प्रदेश में निवेश करने को बेताब हैं। .22 अक्टूबर को कई अमेरिकी कंपनियों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से मुलाकात की थीं। 26 बड़ी अमेरिकी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने उनसे भेंट कर राज्य में निवेश की इच्छा जताई थी। मुख्यमंत्री से जिन कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भेंट की थी, उनमें फेसबुक, एडोब, कोका कोला, उबर, मास्टरकार्ड, हनीवेल, पीएंडजी, ओरैकल और जीई हेल्थ जैसी कंपनियां प्रमुख हैं। इस भेंट वार्ता को कायदे से एक माह भी नहीं हुए कि बिल गेट्स ने उनसे मिलकर राज्य में निवेश करने और चैरिटी के कामों को गति देने की इच्छा जाहिर की है। इसकी एक वजह राज्य की सुधरती कानून व्यवस्था भी है। हाल के दिनों में जिस तरह अपराधियों के एनकाउंटर हुए हैं और जिस तरह भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है, उससे विदेशी और देशी निवेशकों का राज्य की कानून व्यवस्था पर यकीन बढ़ा है। 

बिल गेट्स फाउंडेशन उत्तर प्रदेश में पहले से ही काम कर रही है। फाउंडेशन की मंशा रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराना है। 17 साल पहले 2000 में माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के सीईओ पद छोड़ने के बाद उन्होंने पत्नी मिलिंडा के साथ 32 हजार करोड़ रुपये लगाकर बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन बनाया था। इसमें संदेह नहीं कि आज की तिथि में यह दुनिया की सबसे बड़ी निजी स्वयंसेवी संस्था है। फाउंडेशन का मकसद अगले तीन साल में पूरी दुनिया को पोलियोमुक्त बनाने का है। स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना और गरीबी मिटाना भी उनका लक्ष्य है। गेट्स और बफेट ने 2010 में गिविंग प्लेज नाम से चैरिटी आरंभ की। इस निमित्त उन्होंने अपनी आधी प्रॉपर्टी दान देने का लक्ष्य रखा था। मार्क जुकरबर्ग, माइकल ब्लूमबर्ग और जॉर्ज लुकास समेत 170 बड़े अमीर इस जनसेवा संस्थान से जुड़ चुके हैं। बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन के जरिये बिल गेट्स गरीबी मिटाने, बीमारियों से लड़ने और हर व्यक्ति तक कंप्यूटर की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। 1994 से अब तक बिल और मिलिंडा गेट्स ने 2.25 लाख करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी दान कर दी है। वर्ष 1999 में उन्होंने एक लाख करोड़ रुपए के माइक्रोसॉफ्ट के अपने शेयर दान किए थे। स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता अभियान, कुपोषण और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में बिल गेट्स की सहयोग की इच्छा का सर्वत्र स्वागत किया जाना चाहिए। 

माइक्रोसॉफ्ट कम्पनी के सह संस्थापक और मिलिंडा एंड बिल गेट्स फाउंडेशन के चेयरमैन बिल गेट्स और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मिलन सामान्य नहीं है। इस मुलाकात में उत्तर प्रदेश के सम्यक विकास का सपना है। योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश को देश का सर्वोत्तम प्रदेश बनाना चाहते हैं और बिल गेट्स उनके इस पुनीत उद्देश्य में भामाशाह बनना चाहते हैं। उत्तर प्रदेश सचिवालय में इन बड़ी हस्तियों का मिलना लोकहित के क्रम में था। बिल गेूट्स चाहते हैं कि वे राज्य में निवेश करें और सामाजिक समस्याओं के निदान में भी सरकार का सहयोग करें। इस तरह के विचार सराहनीय तो हैं ही, लोकमानस को कुछ नया करने, नया सोचने की प्रेरणा भी देते हैं। बिल गेट्स अपने तीन बच्चों के नाम से कोई भी संपत्ति छोड़ने के पक्षधर नहीं हैं। पहले भी वे अपने अधिकांश शेयर का दान कर चुके हैं। आगे भी उनकी इसी तरह की योजना है। बच्चों की परवरिश बेहतरीन हो, यह हर माता-पिता का धर्म होता है लेकिन अपनी संतानों को आत्मनिर्भर बनाना अभिभावकों का कर्तव्य होता है। योग्य पिता अपनी संतानों को अच्छे संस्कार देता है। चुनौतियों से लड़ने का उत्साह और साहस देता है। बिल गेट्स और उनकी धर्मपत्नी मिलिंडा भी अगर ऐसा ही सोचते हैं तो इसमें बुरा क्या है? भारत में परिवारवाद की राजनीति कर रहे नेताओं और परिवार के लिए कई पुश्तों के लिए धन जुटाने में लगे नौकरशाहों को इस बावत सोचना चाहिए कि वे उस देश के लिए क्या करना चाहते हैं जहां का अन्न, जल, वायु का सेवन कर वे इतने बड़े हुए हैं। देश और समाज के लिए उनके अपने कर्तव्य क्या हैं? 

‘पूत कपूत तो का धन संचै। पूत सपूत तो का धन संचै।’ पुत्र कुपुत्र हुआ तो पिता द्वारा अर्जित संपत्ति को नष्ट कर देगा और पुत्र अगर सपूत निकला तो धन रहे या न रहे, विपरीत परिस्थितियों में भी वह धन के पेड़ लगा देगा। माइक्रोसॉफ्ट कम्पनी के सह संस्थापक और मिलिंडा एंड बिल गेट्स फाउंडेशन के चेयरमैन बिल गेट्स के साथ भी कुछ ऐसा ही है। मध्यमवर्गीय परिवार में उत्पन्न होने के बाद भी उन्होंने अपनी काबिलियत और आत्मविश्वास के बल पर विश्व के बड़े पूंजीपतियों के बीच अपनी जगह बनाई। उन्होंने बहुत ही मनोयोग के साथ धन कमाया और उसी मनोयोग के साथ उन्होंने अर्जित संपत्ति को लोकहित में दान भी किया। अपरिग्रह की उनकी इस वृत्ति से भारत के नेताओं को सबक लेनी चाहिए। धन कमाना बड़ी चीज नहीं है। बड़ी चीज है धन का सम्यक इस्तेमाल। वह धन ही क्या जो किसी जरूरतमंद के काम न आए। इससे पहले 2012 में तत्कालीन अखिलेश सरकार और मिलिंडा एंड बिल गेट्स फाउंडेशन के बीच सहयोग संबंधी एक अनुबंध हुआ था। इस अनुबंध की अवधि इसी साल समाप्त हो रही है। ऐसे में उस अनुबंध को जीवित रखने के लिए भी बिल गेट्स का मुख्यमंत्री से मिलना जरूरी था। अखिलेश सरकार और योगी सरकार की विकास संबंधी प्रतिबद्धताएं अलग-अलग हैं। मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान बिल गेट्स ने स्वास्थ्य और पोषण के अलावा आईटी सेक्टर को लेकर भी चर्चा की है। आईटी सेक्टर के कार्यक्रमों में उत्तर प्रदेश सरकार को अपना सहयोग बढ़ाने की बात कही है। 

.बिल गेट्स योगी सरकार को नवीनतम तकनीकों के माध्यम से मिट्टी की मैपिंग में मदद करना चाहते हैं। किसानों को बेहतर बीज के इस्तेमाल के लिए जागृत करना चाहते हैं। केंद्र सरकार के साथ पहले से ही काम कर रहे गेट्स का सपना यूपी सरकार के साथ भी काम करने का है। यह अलग बात है कि उनकी संस्था उत्तर प्रदेश में पहले से ही विकास कार्य कर रही है। उनका फाउंडेशन तपेदिक के मरीजों के उपचार के लिए दवा बना रहा है। उम्मीद है कि उनकी दवा शीध्र बाजार में आ जाएगी और अगर ऐसा होता है तो इससे तपेदिक के मरीजों के उपचार में मदद मिलेगी। वे जापानी बुखार से बच्चों की मौत को लेकर भी चिंतित हैं। जापानी बुखार के खात्मे के लिए भी वे सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। उनकी योजना उत्तर प्रदेश में नगर निगम के कचरे के निस्तारण और नदियों की साफ-सफाई में भी राज्य सरकार का हाथ बंटाने की है। उनकी संस्था जीवाणु जनित एवं जल जनित रोगों के नियंत्रण, पेयजल आपूर्ति, शौचालय, मातृ एवं शिशु पोषण तथा कृषि उत्पादकता में वृद्धि करने वाली तकनीकों के क्षेत्र में भी राज्य सरकार के हाथों को मजबूत करना चाहती है। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी चाहते हैं कि राज्य के लगभग 2 लाख आंगनबाड़ी केन्द्रों और उनमें तैनात 4 लाख आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के लिए उनकी संस्था तकनीक एवं सॉफ्टवेयर विकसित कराने में मदद करे। इससे आंगनबाड़ी केन्द्रों में आने वाले बच्चों एवं महिलाओं की स्वास्थ्य सम्बन्धी सटीक स्थिति जानी जा सकेगी और उनकी समस्याओं का त्वरित गति से निराकरण हो सकेगा। बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित विद्यालयों में मिड-डे मील योजना को और मजबूती देनेे के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत माइक्रो न्यूट्रियेण्ट युक्त फोर्टिफाइड राइस आदि उपलब्ध कराए जा रहे हैं। संस्था इस दिशा में भी सहयोग कर सकती है। संस्था के सहयोग से प्रदेश सरकार ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी दर्ज कराने में सफलता हासिल की है। उन्होंने संस्था से अन्य क्षेत्रों में सहयोग का आह्वान किया है।

सेवा भाव अच्छी चीज है। भारत स्नेह, सहयोग और सेवा के लिए ही जाना जाता रहा है। यहां के कई उद्योगपति अपने सेवा भाव के लिए देश भर में प्रसिद्ध रहे हैं लेकिन भारत में जनसेवा से जुड़े लोग जिस तरह आत्मकेंद्रित होकर रह गए हैं। जिस तरह उन पर अवैध तौर-तरीके से अकूत संपत्ति बनाने के आरोप लग रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई हो रही है, वह चिंताजनक है। अमेरिकी उद्योगपति जिस तरह अपनी संपत्ति का बहुत बड़ा हिस्सा जनसेवा के लिए दान कर रहे हैं, उससे नसीहत लेने की जरूरत है। भारत में धनपतियों का अभाव नहीं है लेकिन उनके मन में देश के लिए कुछ खास करने का भाव नहीं दिखता। कदाचित वे इस देश से गरीबी मिटाना चाहते तो कब का ऐसा हो गया होता क्योंकि इसके लिए अपने देश के धनपति ही काफी थे। तुलसीदास जी ने लिखा है कि ‘तुलसी पंछी के पिये घटै न सरिता नीर। धर्म किए धन ना घटै जो सहाय रघुवीर।’ वैसे धन की तीन गति है दान, भोग और नाश। जो लोग धन दान करते हैं। उससे दूसरों की तरक्की सुनिश्चित करते हैं, वे ही अपने यश और सम्मान को अक्षुण्ण रख पाते हैं। योगी और बिल गेट्स की मुलाकात से उम्मीद की जा सकती है कि जल्द ही उत्तर प्रदेश को विकास के नए पंख लगेंगे। उसकी कई समस्याओं का सद्य समाधान होगा।

(लेखक हिंदुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)

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