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संपादकीय
विजय संकल्प पत्र करेगा शहरों का कायाकल्प : सियाराम पांडेय ‘शांत’
By Deshwani | Publish Date: 14/11/2017 12:35:18 PM
विजय संकल्प पत्र करेगा शहरों का कायाकल्प : सियाराम पांडेय ‘शांत’

कार्य कोई भी हो, निरुद्देश्य नहीं होता। हर कार्य का अपना कारण होता है। बिना कारण के कार्य होता ही नहीं। गोस्वामी तुलसीदास की एक अद्र्धाली है-‘ स्वाथ लाई करय सब प्रीती।’ कार्य तो दूर की बात है। जिस प्रेम पर पूरी दुनिया रस्क करती है, वह भी बिना स्वार्थ के नहीं होता। अब प्रश्न उठता है कि चुनावी जंग क्या बिना किसी उद्देश्य के लड़ी जाती है। जनता के हित का नहीं तो अपने हित का तो ध्यान सभी को रहता है। किसान जानता है कि जो बीज वह जमीन में डाल रहा है, वह जमीन में गल जाएगा, सड़ जाएगा और उसके बाद वह अंकुरित होगा। बड़ा होगा और फिर उससे निकलेंगे कई वैसे ही दाने। जमीन में दाने डालना किसान के लिए घाटे का सौदा नहीं है। वह दूरगामी लाभ की सोचता है। अगर किसान को यह पता चल जाए कि बीज सड़ जाएगा लेकिन अंकुरित नहीं होगा तो वह खेत में बीज डालेगा ही नहीं। शिकारी को पता हो कि चिड़िया दाना लेकर उड़ जाएंगी तो वह दाना डालना ही छोड़ देगा। जीवन रिस्क है। संघर्ष है। जो संघर्ष नहीं करता, आगे बढ़ नहीं सकता। ‘संग्राम जिंदगी है, लड़ना उसे पड़ेगा, जो लड़ नहीं सकेगा आगे नहीं बढ़ेगा। भाजपा का विजय संकल्प पत्र यह बताने के लिए काफी है कि इस पर अमल के बाद ही इस प्रदेशों के शहरों का वास्तविक कायाकल्प होगा। भाजपा विकास को लेकर अपनी करनी की बदौलत जानी जा रही है और आगे भी जानी जाएगी। नीति आयोग के हालिया दावों की मानें तो अब तक प्रदेश के अधिकांश जिले इसलिए पिछड़े रहे कि पिछली सरकारों की कथनी और करनी में एकरूपता नहीं थी। 

भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पाण्डेय ने कहा है कि भाजपा बिना किसी उद्देश्य के चुनाव नहीं लड़ती। उसका उद्देश्य जनसेवा होता है, सत्ता का उपभोग नहीं। हर पार्टी इसी तरह के दावे करती है। सभी प्रत्याशी और उनके समर्थक, सभी राजनीतिक दलों के स्टार प्रचारक आजादी से लेकर आज तक जनसेवा की ही बात करते आ रहे हैं। सबने यही कहा है कि उन्हें सत्ता का मोह नहीं है। वे जनसेवा कर रहे हैं लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या उन्होंने अपने वायदे के अनुरूप उन्होंने जनसेवा की। चुनाव के दौरान वे मतदाताओं के चक्कर लगाते थे और चुनाव बाद मतदाता उनके चक्कर लगाते रहे। जनता का सेवक कब उसका मालिक बन जाता है, यह किसी से छिपा नहीं है। बिना मौसम की शहनाई अच्छी नहीं लगती। अगर राजनीतिक दलों ने अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभा दी होती तो आज इस देश का कायाकल्प हो चुका होता लेकिन जब जागे तभी सबेरा। भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव में भी संकल्पपत्र लेकर जनता के सामने आई है। प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भी वह संकल्पपत्र के साथ ही चुनाव मैदान में उतरी थी। जनता ने उसके संकल्पपत्र पर न केवल यकीन किया था बल्कि भारी बहुमत के साथ उसे सरकार बनाने का मौका भी दिया था। इसमें शक नहीं कि भाजपा ने अपने संकल्पों को पूरा भी किया है। कुछ को पूरा करने की दिशा में वह सतत सचेष्ट है। 

यह कहना कदाचित गलत नहीं होगा कि कुछ नया और अलहदा करना भाजपा का शगल रहा है। वह जो कुछ भी करती है, विस्मयकारी होता है। अभी तक नगर निकाय चुनाव में घोषणापत्र जारी नहीं किया जाता था लेकिन भाजपा ने इस बार न केवल विकास संकल्पपत्र जारी किया है बल्कि उस पर काम करने की वचनबद्धता भी जारी की है। संभव है, उसकी देखादेखी सपा और कांग्रेस भी कुछ इसी तरह की पहल करे। हालांकि इसकी उम्मीद कम है क्योंकि आनन-फानन में बिना तैयारी के की गई घोषणा कारगर नहीं होती। अपना दल ने अपना एजेंडा पहले ही स्पष्ट कर दिया है। उसके लिए अलग से घोषणापत्र जारी करने की जरूरत नहीं है। बसपा तो लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में भी लिखित घोषणापत्र जारी नहीं करती। उसके नेता का बयान ही पार्टी का मैनिफेस्टो माना जाता है। ऐसे में नगर निकाय चुनाव के लिए बसपा कोई घोषणापत्र जारी करेगी, इसकी उम्मीद तो नहीं ही है। 652 नगर निकाय और 16 नगर निगमों में हो रहे चुनाव में सभी राजनीतिक दलों ने अपनी ताकत झोंक दी है। 

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर महेंद्र नाथ पाण्डेय ने विजय संकल्प पत्र जारी करते हुए कहा कि भाजपा का उद्देश्य सिर्फ पार्षद बनाना नही है, वह नगरीय जीवन को श्रेष्ठ और बेहतर बनाना चाहती है। स्वच्छ शहर, स्वस्थ शहर और हरित शहर का नारा भी उन्होंने दिया और इस निमित्त अपनी पार्टी को सोच का भी इजहार किया। प्रमुख बाजारों में महिलाओं के लिए पिंक शौचालय, सार्वजनिक स्थलों पर निःशुल्क शौचालय, गौशाला निर्माण, नगर निगमों में आईटी व्यवस्था के माध्यम से टैक्स कलेक्शन, बेहतर इंतजाम, श्रमिकों, युवाओं और पटरी व्यवसायियों के लिए इंतजाम के वादे किए गए हैं। योगी सरकार के लिए यह चुनाव उसके सात महीने का काम का लिटमस टेस्ट माना जा रहा है। इस 28 सूत्रीय संकल्प पत्र में प्रदेश में बुनियादी सुविधा के सुधार पर जोर देकर भाजपा के प्रदेश नेतृत्व और योगी सरकार ने बेहद गंभीरता का परिचय दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नगरीय क्षेत्र में पेयजल, सफाई, पार्क आदि की व्यवस्था बेहतर करने, 13 शहरों को स्मार्ट सिटी और 61 को अमृत योजना का हिस्सा बनाने का दावा कर विकास के प्रति अपना दृष्टिकोण जाहिर किया है। उन्होंने इस प्रदेश को यह भी बताने-जताने का प्रयास किया है कि उनकी सरकार अपने स्तर पर भी बुनियादी सुविधाएं बेहतर करने के लिए सर्वे करा रही है। प्रदेश में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के साथ ही डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन पर काम हो रहा है। प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों में गौशाला के साथ कांजी हाउस की पुरानी व्यवस्था को बहाल किया गया है। सूबे के आठ महानगरों में मेट्रो के लिए डीपीआर और सर्वे का कार्य चल रहा है। रीजनल एयर कनेक्टिविटी पर भी काम कर रहे हैं। शहरों के एयर स्ट्रिप का विकास किया जा रहा है। सभी 75 जिलों के लिए एक जिला-एक उत्पाद की नीति लाई जा रही है जो वहां के एक परंपरागत उत्पाद के की ब्रांडिंग और उत्पादन पर केंद्रित होगी।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने प्रकारांतर से प्रदेश के पूर्व नगर विकासमंत्री पर दस नगर निगमों में तैनात भाजपा के महापौरों को काम न करने देने का भी आरोप लगाया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तो यहां तक कह दिया कि पिछली सरकारों ने शरारतपूर्ण ढंग से समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखने का आरोप लगाया। उन्होंने लखनऊ, मथुरा, वृंदावन, विंध्याचल, प्रयाग और अयोध्या को वायु सेवा से जोड़ने का भी दावा किया। इस अवसर पर उन्होंने अपनी सात माह की उपलब्धियां भी गिनाई हैं। जिला मुख्यालयों को 24 घंटे और तहसील स्तर पर 20 घंटे की बिजली आपूर्ति देने की बात करते हुए उन्होंने इस बात का भी दावा किया है कि नगरीय क्षेत्र के साथ देहात इलाकों में मुफ्त में बिजली कनेक्शन दिए जा रहे हैं। 20 लाख मुफ्त कनेक्शन दिए गए हैं। जितनी भी स्ट्रीट लाइट हैं, वे सभी एलईडी होंगी। इसकी शुरुआत वाराणसी, कानपुर और लखनऊ, मथुरा, वृंदावन, अयोध्या, प्रयाग, विंध्याचल, नैमिषारण्य, चित्रकूट, कुशीनगर और वाराणसी के कायाकल्प का दावा कर, उसे वायु सेवा से जोड़ने की बात कर उन्होंने पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने की अपनी मानसिकता भी जाहिर की है। 

स्वच्छता, स्वास्थ्य और पर्यावरण की चिंता इस संकल्प पत्र में प्रमुखता से देखने को मिली है। बेहतर पेयजल व्यवस्था, बेहतर स्ट्रीट लाइट, ई- टेंडरिंग, आदर्श नगर पंचायत की स्थापना जैसे विचार इस बात के द्योतक हैं कि भाजपा उत्तर प्रदेश को सर्वोत्तम प्रदेश बनाने के प्रति वाकई गंभीर है। पटरी दुकानदारों के लिए प्रभावी संरक्षण, पारदर्शी व उत्तरदायी शासन, जनशिकायतों के समयबद्ध, मुख्य सार्वजनिक स्थानों पर वाई-फाई की व्यवस्था के दावे योगी सरकार की विकास दृष्टि के ही परिचायक हैं। हर शहरी गरीब को प्रधानमंत्री आवास योजना से जोड़ना और पिछली सरकार द्वारा इस मिशन को पूरा न कर पाने की आलोचना योगी आदित्यनाथ की पीड़ा का ही अभिव्यक्तीकरण है। अन्त्येष्टि स्थलों का सुदृढीकरण का वादा अगर विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास है तो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व उनके आश्रितों को गृह कर में छूट,श्रेष्ठ कर्मियों को पुरस्कृत करने का वादा सबका साथ और सबका विकास का ही शंखनाद है। 

 

शहरों में वाटर एटीएम लगाने, गृहकर और जलकर को वाजिब बनाने और हर घर को निःशुल्क टैप वाटर कनेक्शन देने का वादा कर भाजपा ने साबित कर दिया है कि नगर निकाय के मतदाताओं के बीच अपना संदेश देने में भाजपा पहले ही बाजी मार ले गई है। देहात क्षेत्र में यह कहावत है कि ‘पहले मारै सो मीर।’ जो पहले प्रहार करता है, जीत उसी की होती है। प्रत्याशी तय करने के मामले में भले ही सपा अग्रणी रही हो लेकिन विकास का सर्वप्रथम चिंतन प्रकट कर भाजपा ने बाजी मार लिया है। विपक्ष उस पर आरोप लगा सकता था कि सबसे अधिक नगर निगमों और निकायों में उसके दल का ही कब्जा था। जब तक काम नहीं हुआ तो अब क्या होगा लेकिन भाजपा ने प्रदेश की सरकार में समान विचारधारा की सरकार को अपने प्रयासों की राह में बड़ा रोड़ा बताया है। अब वह विकास की गाड़ी को आगे बढ़ाने के लिए नगर निकाय में भी भाजपा का इंजन लगाना चाहती है। प्रधानमंत्री ने विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश को सलाह दी थी कि वे विकास का डबल इंजन लगाएं। योगी आदित्यनाथ और महेंद्र नाथ पांडेय की समान विचारधारा वाली राय में भी प्रच्छन्न सलाह विकास का डबल इंजन लगाने की ही है और मतदाता भी बहुत हद तक समझते हैं। उन्हें परस्पर खींचतान वाली शहर की सरकार नहीं चाहिए। उनकी दरकार है विकास। उनका प्यार है विकास। इस बात का उन्हें भी है पूर्वाभास। शहर में समान विचारधारा के ही लोग चाहिए। शहर को अड़चनों के न योग चाहिए। घोषणा तो कोई भी कर सकता है। घोषणा पूरी हो भी सकती है और नहीं भी हो सकती। घोषणापत्र सहूलियत का दस्तावेज है। वह वचनबद्धता नहीं है लेकिन संकल्प लेने से भी लोग डरते हैं क्योंकि उसे पूरा करना होता है। न करने पर लोक में उपहासास्पद तो बनना ही पड़ता है, अपनी आत्मा भी धिक्कारती है। वह चैन से बैठने नहीं देती है। भाजपा ने संकल्पपत्र जारी किया है। मतलब उसने प्रदेश के, शहरों के विकास का सपना देखा है और उसे वह दिली तौर पर पूरा करना चाहती है।

 

उम्मीद की जा सकती है कि उसकी यह अदा नगर निकाय के मतदाताओं को रास जरूर आएगी और ऐसा हुआ तो विपक्ष का एक बार पुनश्च मनोबल टूटेगा। हालांकि विपक्ष की रणनीति अभी भाजपा के तिलिस्म को तोड़ने की है और वे भी चुप बैठने वाले लोग नहीं हैं लेकिन जनता अब विकास की भाषा समझती है और उसे मौजूदा प्रदेश सरकार का विकास दिख भी रहा है। वह साठ साल और सात माह का फर्क तो समझती ही है। सरकार की नीति और नीयत भी उसे समझ आ रही है। ऐसे में विपक्ष को कुछ नए पैंतरे अपनाने होंगे। योगी के काम की आलोचना कर वे निकाय चुनाव का चक्रव्यूह भेद पाएंगे, इसके आसार बहुत कम हैं।

-लेखक हिंदुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।

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