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छपरा
''कर्माग्नि'' पुस्तक महिला उत्पीड़न निवारण के लिए मील का पत्थर होगा: आयुक्त
By Deshwani | Publish Date: 22/8/2017 11:08:28 AM
''कर्माग्नि'' पुस्तक महिला उत्पीड़न निवारण के लिए मील का पत्थर होगा: आयुक्त

छपरा, (हि.स.)| जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के सभागार में आयोजित ’महिला सशक्तीकरण में कर्माग्नि पुस्तक की भूमिका’ परिचर्चा का शुभारंभ करते हुए आयुक्त नर्मदेश्वर लाल ने कहा कि कर्माग्नि पुस्तक महिला उत्पीड़न निवारण के क्षेत्र में मिल का पत्थर साबित होगा। जीवन मूल्यवान है। जीवन में कभी हार नहीं मानना चाहिए। जीवन है तो सब कुछ है, जीवन नहीं है तो कुछ नहीं है। लोगों को हमेशा अपने स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति जीवन लीला समाप्त करना चाहता है, तो शरीर उसे जीवित रहने के लिए बाध्य करता है। आयुक्त ने कहा कि कर्माग्नि पुस्तक वास्तविक घटनाओं पर आधारित लेखिका के जीवन संघर्ष की गाथा है, यह कल्पना नहीं है। जीवन को जब सच्चाई से सामना होता है, तो वह संघर्षशील होता है। इसमें जहां एक ओर प्रेम, संकल्प, संघर्ष और समर्पण है| वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा न्याय प्राप्त होने की वजह से पुस्तक की नायिका की आत्मबल की अभिव्यक्ति है। यह पुस्तक सभी उत्पीड़ित, शोषित एवं संघर्षशील महिलाओं के जीवन में नई उर्जा के साथ एक नया रास्ता दिखाने में मददगार साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के टारगेट में प्रायः पुरूष ही रहता है। ऐसी बात नहीं है कि जो पढ़े लिखे लोग है, वे ही इस तरह की घटनाओं को अंजाम देते है, बल्कि ऐसी घटनाएं तो समाज में घटित हो रही है। यह पूरे समाज की समस्या है। उन्होंने कहा कि जब पति-पत्नी में सामंजस्य नहीं रहेगा, तो घर टूटेगा। घर टूटेगा तो परिवार नहीं रहेगा, अगर परिवार नहीं हो, तो देश एवं राज्य का क्या होगा। जिस घर में पति-पत्नी सदैव झगड़ते रहते हैं , उनके संतानों का जीवन भी सुखद नहीं होता है। उनके भी परिवारिक जीवन में सामंजस्य बनाने में काफी कठिनाई होती है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को किसी भी परिस्थिति में अपने संघर्ष से घबराना नहीं चाहिए। संघर्ष का सामना करते हुए जीवन में आगे बढ़ते रहना ही जिन्दगी है। हमें कर्मग्नि की नायिका अर्पणा त्रिपाठी के जीवन से सीख लेनी चाहिए, क्योंकि जीवन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। अगर हम स्वस्थ्य है तभी संघर्ष कर सकते हैं । जीवन को अंत करने के बारे में कभी सोचना भी नहीं चाहिए। अर्पणा त्रिपाठी को अपने परिवार एवं मित्रों से सहयोग मिला होगा। इसलिए उनका संघर्ष यहां तक पहुंचा। आयुक्त ने कहा कि किसी भी घर में कोई भी पीड़ित नहीं रहें। अगर पीड़ित है, तो आने वाली पीढ़ी संकट में होगा। आज का परिवार न्यूक्लीयर परिवार है। आज हमारा जीवन सुख-सुविधाओं से भरपूर है। फिर भी हम पूर्वजों की तरह न तो सुखी है और न ही संतुष्ट। कहीं न कहीं कोई कमी है, जिसे आपसी प्रेम, सामंजस्य एवं परस्पर सहयोग से दूर किया जा सकता है। 
इस अवसर पर जिलाधिकारी हरिहर प्रसाद ने कहा कि नारी का संघर्ष की गाथा वैदिक काल से चला आ रहा है। नारी के प्रति समानता का भाव वैदिक काल से ही कमजोर पड़ते रहे है। उन्होंने कहा कि न्याय परक संघर्ष होना चाहिए। जो इस सृष्टि में जन्म लेता है, उसके कर्तव्य का समय सीमा बंधा हुआ है। समय का बेहतर उपयोग करें। सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने में सार्थक प्रयास करें। कर्माग्नि पुस्तक से महिला सशक्तिकरण को बल मिलेगा। इस अवसर पर कर्माग्नि की नायिका अर्पणा त्रिपाठी ने कहा कि पुरूष प्रधान व्यवस्था के खिलाफ संवैधानिक सत्यनिष्ठ तथा अहिंसक तरीके से नेतृत्व कर यथास्थिति बाद में जीने वाली महिलाओं के लिए जीवन को रौशन करने का कर्माग्निी एक नूतन प्रकाश है। यह उन महिलाओं के लिए वरदान साबित होगा, जो महिलाओं घरेलू हिंसा और सामाजिक परिस्थितियों तथा पति के द्वारा प्रताड़ित होकर जीवन समाप्त कर लेती है या घुट-घुटकर जीवन जीने को बाध्य होती है, वे अब संघर्ष कर न्याय प्राप्त करेंगी। उन्होंने अपनी आप-बीती सुनाते हुए पूरी सभा का ध्यान अपने तरफ आकृष्ट किया।
इस अवसर पर आयुक्त नर्मदेश्वर लाल ने कमाग्नि पुस्तक का विमोचन किया तथा कर्माग्नि के नायिका और लेखिका अर्पणा त्रिपाठी को प्रतीक चिन्ह् के रूप में गांधी चरखा देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर साहित्यकार एवं समाजसेविका कश्मीरा सिंह, प्रख्यात चिकित्सका डाॅ0 विजया रानी सिंह एवं समाजसेविका सुनिता गुप्ता ने भी अपनी-अपनी तर्क संगत बाते रखी। बृजेन्द्र कुमार सिन्हा, शिक्षाविद् ने सभा की अध्यक्षता की। मंच संचालन मनोहर मानव ने किया, जबकि उपविकास आयुक्त सुनिल कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर आयुक्त के सचिव राजेश कुमार, उपनिदेशक जनसम्पर्क अनिल कुमार चौधरी समेत सभी प्रखंडों के बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, जीविका के पदाधिकारी एवं जीविका दीदी तथा महिला हेल्पलाईन के पदाधिकारी एवं कर्मचारीगण, प्रमुख साहित्यकार एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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