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बिहार
बीएड कॉलेजों में प्राचार्य बनने के लिए नेट परीक्षा पास करना अनिवार्य
By Deshwani | Publish Date: 3/7/2017 12:28:21 PM
बीएड कॉलेजों में प्राचार्य बनने के लिए नेट परीक्षा पास करना अनिवार्य

छपरा, (हि.स.)। बीएड कॉलेजों में सिर्फ एमएड करने मात्र से प्राचार्य के पद पर नियुक्ति संभव नहीं हो पाएगी।अब प्राचार्य पद के अभ्यर्थी को पूर्व के मापदंड के साथ पीएचडी व शिक्षा के क्षेत्र में पांच साल के अनुभव के साथ ही यूजीसी द्वारा आयोजित किए जाने वाले राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा(नेट) की परीक्षा क्लीयर करना जरूरी होगा। बीएड कॉलेजों में प्राचार्य नियुक्ति मामले में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद(एनसीटीई) ने रेगुलेशन 2014 में बदलाव कर बीएड कॉलेजों में प्राचार्य पद पर नियुक्ति के लिए अभ्यर्थी के लिए यूजीसी नेट को अनिवार्य कर दिया है। 

नए मापदंड के कारण बीएड कॉलेजों में प्राचार्य बनने का सपना देख रहे कई अभ्यर्थियों को झटका लग सकता है। एनसीटीई ने रेगुलेशन 2014 के अध्यादेश में बदलाव कर इसे तत्काल लागू भी कर दिया है। नए अध्यादेश में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ी जातियों और दिव्यांग व्यक्तियों समेत केंद्र व राज्य सरकार द्वारा जारी सेवा के लिए वर्तमान आरक्षण नियम का पालन करना होगा। एनसीटीई ने न्यूनतम मानक को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2009 के अनुसार पीएचडी उपाधि ग्रहण करने वालों को इस शर्त से छूट देने की बात कही गई है।

जेपीविवि अंर्तगत पूरे सारण प्रमंडल में एक सरकारी बीएड कॉलेज के साथ ही छपरा, सीवान व गोपालगंज में कुल 15 प्राइवेट बीएड कॉलेजों का संचालन किया जा रहा है। सूत्रों की माने तो संचालकों द्वारा बीएड कॉलेजों में शिक्षक व प्राचार्यों की नियुक्ति संबंधी सभी कार्य कॉलेज संचालक द्वारा ही किया जाता है। अधिकांश कॉलेजों में प्राचार्य रबर स्टांप की तरह काम करते हैं। सूत्रों की माने तो जेपीविवि प्रशासन एनसीटीई के नए नियमों का पालन करने के प्रति यदि प्राइवेट बीएड कॉलेजों पर दबाव बनाता है तो कई बीएड कॉलेजों के प्राचार्यों को अपना पद गंवाना पड़ेगा। संबंधित कॉलेज प्रशासन के समक्ष भी नए नियम के अनुसार सभी वांछनीय योग्यता पूरा करने वाले प्राचार्य अभ्यर्थी की तलाश काफी मुश्किल होगी।

बीएड कॉलेजों में प्राचार्य पद पर नियुक्ति के लिए एक ओर जहां यूजीसी नेट को अनिवार्य कर दिया गया है। तो दूसरी ओर प्राचार्य पद के लिए आठ साल के अनुभव को कम कर निम्नतम पांच साल के शैक्षणिक अनुभव को अनिवार्य कर दिया गया है। एनसीटीई के नए निर्देश से जहां नए चेहरों को लाभ हो सकता है। तो नए नियम से पूर्व में नियुक्त प्राचार्यों को अपना पद छोड़ना पड़ सकता है वहीं कॉलेज संचालकों के समक्ष तय मानक के अनुरूप नए प्राचार्य की तलाश आसान नहीं होगी। डा.केदारनाथ,पीआरओ,जेपी विवि,छपरा के कहा कि इस संबंध में अभी मुझे जानकारी नहीं मिली है। नये गाइड लाइन मिलने के बाद उसके अनुसार नियम का पालन किया जायेगा।

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