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2022 का अंतिम सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर को अपराह्न 4.41 से शाम 5.22 तक रहेगा
By Deshwani | Publish Date: 24/10/2022 7:29:48 PM
2022 का अंतिम सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर को अपराह्न 4.41 से शाम 5.22 तक रहेगा

स्थानीय संपादाक जितेन्द्र कुमार सिन्हा की फाइल तस्वीर। फोटो- देशवणी।

पटना। जितेन्द्र कुमार सिन्हा। 25 अक्टूबर को लगने वाला सूर्य ग्रहण वर्ष 2022 का अन्तिम सूर्य ग्रहण होगा। यह ग्रहण इस वर्ष दीपावली के ठीक दूसरे दिन लग रहा है। 


दीपावली कार्तिक कृष्ण पक्ष अमावस्या को मनाई जाती है। अमावस्या 24 अक्टूबर को शाम 05:27 बजे से 25 अक्टूबर की शाम 04:18 बजे तक रहेगी। सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर (मंगलवार) को लगेगा। यह सूर्य ग्रहण 2022 का दूसरा और भारत के पूर्वी भारत को छोड़कर पूरे देश में यथा- नई दिल्ली, बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई, उज्जैन, प्रयागराज, मुरादाबाद, गोरखपुर, वाराणसी, मथुरा आदि शहरों में आंशिक दिखाई देगा।


 ग्रहण भारत के अतिरिक्त  यूरोप, उत्तर-पूर्वी अफ्रीका और पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों से भी दिखाई देगा। आंशिक सूर्य ग्रहण को वलयाकार सूर्य ग्रहण भी कहा जाता है। इस ग्रहण के दौरान सूर्य और पृथ्वी की दूरी अधिक हो जाती है इसलिए सूर्य के प्रकाश को, पृथ्वी तक पहुंचने से पहले ही, दोनों के बीच में चंद्रमा आ जाता है, जिसके कारण सूर्य का कुछ भाग ही नजर आता है। इसे आंशिक सूर्य ग्रहण कहते हैं।




ज्योतिषाचार्य का मानना है कि सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर को दोपहर 4 बजकर 41 मिनट से शाम 5 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। ग्रहण का स्पर्श अपराह्न 04.41 बजे, मध्य- अपराह्न 05.02 बजे और मोक्ष- अपराह्न 05.22 बजे होगा।


शास्त्र के अनुसार ग्रहण लगने से 12 घंटे पहले के समय को सूतक काल कहते हैं जिसे अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि सूतक काल में कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते है और किसी व्यक्ति को इस समय में नए काम शुरू नही करने की सलाह दिया जाता है। 


सूतक काल ग्रहण खत्म होते ही समाप्त होता है। सूतक काल में कोई भी शुभ काम को शुरू करने से लोगों को बचना चाहिए। सूतक काल में खाना बनाना और खाना वर्जित माना गया है। अगर खाना बना हुआ हो तो उसमें तुलसी के पत्ते डालकर रखना चाहिए। सूतक काल और ग्रहण अवधि में भगवान की भक्ति करना चाहिए। ज्योतिष के अनुसार जहां ग्रहण दिखाई नहीं देता है, वहां सूतक नहीं माना जाता है। इस बार भारत में आंशिक सूर्य ग्रहण का सूतक पूर्वाह्न 04.27 बजे से शुरू होगा और अपराह्न 05.18 बजे खत्म होगा।


इस बार ग्रहण का प्रभाव मेष राशि वालों को स्त्री पीड़ा, वृषभ राशि वालों को सौख्य, मिथुन राशि वालों को चिंता, कर्क राशि वालों को व्यथा, सिंह राशि वालों को श्री, कन्या राशि वालों को क्षति, तुला राशि वालों को घात,वृश्चिक राशि वालों को हानि, धनु राशि वालों को लाभ, मकर राशि वालों को सुख, कुंभ राशि वालों को माननाश और मीन राशि वालों को मृत्युतुल्य कष्ट होने की आशंका है।


ज्योतिष का माने तो सूर्य ग्रहण तुला राशि एवं स्वाति नक्षत्र में लगेगा। इसलिए इस नक्षत्र के लोगों को इस ग्रहण को देखने से जरूर बचना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, वृषभ राशि वालों का मानसिक तनाव बढ़ सकता है, इसलिए सेहत का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है।


मिथुन राशि वालों को ग्रहण की अवधि में विशेष रूप से सतर्क रहने की आवश्यकता है, क्योंकि ऑफिस अथवा कार्यक्षेत्र में बड़ा नुकसान पहुंचाने की कोशिश, साख को ठेस पहुंचने,  आर्थिक नुकसान होने, बजट प्रभावित होने की प्रवल संभावना है।  तुला राशि वाले को विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है क्योंकि ग्रहण का सबसे ज्यादा प्रभाव इसी राशि पर पड़ेगा। आर्थिक नुकसान के साथ-साथ दुर्घटना होने की संभावना है, इसलिए ग्रहण की अवधि में वाहन चलाते समय सावधान रहने और वित्तीय कामकाज नहीं करना चाहिए। 

 

कन्या राशि वालों को संतान को कष्ट, मानसिक परेशानी, जीवनसाथी के साथ मनमुटाव होने की    संभावना है।  वृश्चिक राशि वालों के लिए निजता को बनाए रखने, अपनी गोपनीयता अथवा अपनी योजना किसी से भी शेयर नहीं करना चाहिए, क्योंकि आपके विरुद्ध प्रयोग हो सकता है। धन हानि होने की संभावना है इसलिए पैसों को लेकर सावधान रहना चाहिए।



विशेषज्ञों का कहना है कि सूर्यग्रहण के दौरान व्यक्ति को हमेशा देवी-देवताओं का बीज मंत्र और चालीसा का पाठ करते हुए अपने जीवन की कुशलता की कामना करनी चाहिए। मंत्रों का जाप भी मन में होना चाहिए और भगवान की प्रतिमा का स्पर्श बिल्कुल नहीं करना चाहिए। 


सूतक काल समाप्त होने के बाद सभी व्यक्ति को सबसे पहले स्नान करना चाहिए और फिर देवी-देवताओं की मूर्तियों को, अन्न को और घर के हिस्सों को गंगाजल छींटना चाहिए ताकि ग्रहण का प्रभाव कम हो सके। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के दौरान दीपक जलाकर गायत्री मंत्र अथवा महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए यह कई प्रकार के समस्याओं से व्यक्ति को दूर रखता है।


सूतक लगने के बाद भोजन के लिए खाना पकाना,  स्नान करने, सोने, तुलसी के पौधे छूने आदि से दूर रहना चाहिए। ऐसा नहीं करने से व्यक्ति के जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। बल्कि तुलसी के पत्ते को बचे हुए खाने अथवा फ्रिज में रखे खाने की सामग्रियों में डालकर रख देने पर, यह माना जाता है कि भोजन पर ग्रहण का प्रभाव नहीं पड़ता है।

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