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एलएनडी कॉलेज में द्विदिवसीय सेमिनार का समापन
By Deshwani | Publish Date: 10/7/2022 1:26:04 PM
एलएनडी कॉलेज में द्विदिवसीय सेमिनार का समापन

 डॉ कुमार राकेश रंजन।

मोतिहारी। जिले के एलएनडी कॉलेज में जंतु विज्ञान एवं वनस्पति विज्ञान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित द्विदिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन शनिवार को तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया। द्वितीय तकनीकी सत्र के अध्यक्ष प्राचार्य प्रो.(डॉ.) अरुण कुमार तथा उपाध्यक्ष एमिटी यूनिवर्सिटी, हरियाणा के स्कूल ऑफ अर्थ एंड एनवायरनमेंट साइंस विभागाध्यक्ष डॉ.कुशाग्र राजेंद्र थे। ख्याति प्राप्त विद्वानों, विदुषियों, शोधार्थियों व प्रतिभागियों द्वारा शोध-पत्रों का पठन किया गया। 
 
डॉ.कुशाग्र राजेंद्र ने मनुष्य और प्रकृति के संबंधों के विकास को रेखांकित करते हुए वर्तमान पर्यावरणीय समस्याओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने एक जानवर से पारिस्थितिकी तंत्र के सबसे ऊँचे पायदान तक सर्वाधिक चेतनशील वुद्धिमान प्राणी के रूप में मानव के सफर को समझाया। इसने पिछले दो सौ सालों में समूची प्रकृति को 'जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र के 'वैश्विक त्रिकुचक्र' में उलझा दिया है। इस 'वैश्विक त्रिकुचक्र' का समाधान मानव और प्रकृति के विशाल अंतरसंबंधों को जाने और समझे बिना असंभव होगा। 

आज विकेन्द्रित विकास और ट्रेडिशनल नॉलेज को पॉलिसी के केंद्र में रख के विकास के प्रतिमान को मूर्त रूप देने की आवश्यकता है।
बीसीए समन्वयक डॉ.सर्वेश दुबे ने इंपलीकेशंस ऑफ ग्लोबल वार्मिग ऑन ग्रीन अथ ऐंड कैरेंट ट्रेंड इन 2022 शोध पत्र का पठन करते हुए जीवाश्म ईंधन के अनियंत्रित दोहन से उत्पन्न कार्बनडाईऑक्साइड को वैश्विक तापमान में वृद्धि के लिए जिम्मेदार ठहराया। इन्होंने हीट आइलैंड्स सहित वर्ष 2022 में उठाए जानेवाले संभावित कदमों को भी रेखांकित किया।

इस तकनीकी सत्र में संगोष्ठी के आयोजन सचिव- सह-सर्प विज्ञानी डॉ. नीरज कुमार ने पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण द्वारा स्वास्थय संबंधी शोधपत्र पठित करते हुए बताया कि भारत में प्रतिवर्ष 58000 से 60000 लोग सर्पदंश का शिकार होकर मर जाते हैं। यहाँ कोबरा, कॉमन करैत, रसेल वाइपर एवं सॉस्केल्ड वाइपर- चार सर्वाधिक विषैले सांपों को बिग-4 की श्रेणी में रखा गया है। 


एक तरफ जहाँ इन्हीं साँपों के दंश से सर्वाधिक मृत्यु होती है वहीं इन विषैले साँपों के प्रोटीनयुक्त विष का चिकित्सीय महत्व भी होता है। साँपों के विष को हिमोटॉक्सिक एवं न्यूरोटॉक्सिक की श्रेणी में बांटा गया है। इन्हीं विष से सर्पदंश की दवा तैयार की जाती है जिसे एंटीवेनम सीरम कहा जाता है। यह सर्पदंश के इलाज की एकमात्र दवा है। 

बी.एड. विभागाध्यक्ष डॉ.परमानंद त्रिपाठी ने सर्वे भवन्तु  सुखिन: (समावेशी शिक्षा) की प्राप्ति में सतत विकास लक्ष्य की भूमिका विषय पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत करते हुए समावेशी विकास की अवधारणा, अर्थ, मापन, समस्याएं एवं समाधान को रेखांकित किया। 


जनसंख्या के सभी वर्गों के लिए बुनियादी सुविधाएँ अर्थात आवास, भोजन, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य के साथ-साथ एक गरिमा पूर्ण जीवन जीने के लिए आजीविका के साधनों को उत्पन्न कराना ही समावेशी विकास है। 

तकनीकी सत्र की समाप्ति उपरांत समापन सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में कॉलेज प्राचार्य प्रो.(डॉ.) अरुण कुमार तथा सत्र के उपाध्यक्ष डॉ. कुशाग्र राजेंद्र द्वारा पंजीकृत प्रतिभागियों बीच प्रतिभागिता  प्रमाण पत्र का वितरण किया गया। समापन सत्र का सफल संचालन सेमिनार समन्वयक डॉ. नीरज कुमार तथा धन्यवाद ज्ञापन मीडिया प्रभारी डॉ.कुमार राकेश रंजन द्वारा किया गया। 


विदित हो कि एनसीसी कैडेट्स एवं एनएसएस स्वयंसेवकों द्वारा शुक्रवार को मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा निदेशिका, प्रो.रेखा कुमारी को पायलटिंग/एस्कार्ट् कर बरियारपुर से महाविद्यालय तक लाने से आतिथ्य काफी सराहनीय रहा है। राष्ट्रगान वंदना के साथ द्विदिवसीय सेमिनार का समापन हो गया। ज्ञानवर्धन के इस मौके पर शिक्षकों की ओर से डॉ.राजेश कुमार सिन्हा, ले.दुर्गेशमणि तिवारी, डॉ.सर्वेश दुबे, प्रो.राकेश रंजन कुमार, डॉ.जौवाद हुसैन, डॉ. नीरज कुमार डॉ.परमानंद त्रिपाठी, डॉ.प्रीति प्रिया तथा प्रतिभागियों की ओर से डॉ.शालु तिवारी, लवली, प्रभात, प्रिंस, हिमांशु, रंधीर, नवीन कुमार झा, आदित्य श्रीवास्तव, अनुपम आलोक, शाईस्ता प्रवीण सहित काफी संख्या में छात्र उपस्थित थे।
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