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बिहार
भगाने को आए अपराधियों की गोली का ही शिकार हुआ इंजीनियर्स दोहरे हत्याकांड के आरोपी कैदी अभिषेक!
By Deshwani | Publish Date: 16/7/2018 11:52:32 PM
भगाने को आए अपराधियों की गोली का ही शिकार हुआ इंजीनियर्स दोहरे हत्याकांड के आरोपी कैदी अभिषेक!

अभिषेक की फाइल फोटो व डेड बॉडी। फोटो- देशवाणी न्यूज नेटवर्क।

मोतिहारी। देशवाणी न्यूज नेटवर्क।

पूर्वी चम्पारण के ढाका स्थित सिकरहना अनुमंडलीय न्यायालय परिसर में हुए हत्याकांड के सजायाफ्ता कैदी अभिषेक झा की गोली से सोमवार की दोपहर हुई हत्या में सीसीटीवी फूटेज सामने आ गया है। इस फूटेज दो देखने के बाद यह बताया जा रहा है कि अपराधी उसे छुड़ाने आए थे और अभिषेक झा ने ही गार्ड की आंखों में मिर्च का पाउडर झोंककर भागने का प्रयास किया। फिर धात लगाए अपराधियों ने पुलिस बल पर फायरिंग शुरू की। जिससे उनकी गोली से अभिषेक ही शिकार हो गया।
 
अपराधी दो बाइक पर सवार तीन की संख्या में बताए जा रहे हैं। इससे भी शंका हो रही है कि अभिषेक को छुड़ाने के बाद चारों दो बाइक पर सवार होकर भाग जाते। इधर दो पुलिस कर्मी भी घायल हैं। एक पुलिसकर्मी की आंखों में मिर्च पावडर झोंका गया है और दूसरे को पिस्टल के बट से सिर पर मारा गया है।
 
अफरातफरी में घबड़ाकर अपराधियों ने अपनी पिस्टल छोड़ हुए फरार-
 
सूत्रों के अनुसार इसमें स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि मृत अपराधी अपने साथियों के ही गोली का शिकार हो गया।
अपराधी अभिषेक झा पुलिस के चेहरे पर मिर्च पाउडर फेंक कर भागने का प्रयास कर रहा था, तभी पहले से घात लगाये दो अपराधी दौड़ कर आते हैं और फायरिंग शुरू कर देते हैं। इस दौरान अभिषेक के एक साथी का गोली उसे लग जाती है और वह जख्मी हो जाता है। उसे अनुमंडलीय अस्पताल में इलाज के बाद मोतिहारी सदर अस्पताल रेफर किया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
 
अभिषेक मुजफ्फरपुर सेन्ट्रल जेल में था बंद व हाल ही में लाया गया था मोतिहारी-
 
शिवहर जिले के डुमरी गांव का रहने वाले कुख्यात अपराधी अभिषेक झा की पेशी ढाका थाना कांड संख्या 41/16 में सिकरहना अनुमंडलीय न्यायालय में आया था। कांड संख्या 41/16 मामला एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के ठीकेदार से रंगदारी मांगने के मामले से है। लिहाज वह दोहरे हत्याकांड में मुजफ्फर जेल में बंद था। हाल ही में ढाका कांड संख्या 41/16 में सिकरहना अनुमंडल कोर्ट में पेशी के लिए मोतिहारी सेन्ट्रल जेल लाया गया था।
 
पुलिस वैन के रुकते ही कैदी ने शौच की इच्छा जाहिर की-
यहां बता दे कि ढाका स्थित सिकरहना अनुमडलीय न्यायालय में पेशी के लिए कोई हाजत नहीं है। यहां पर पेशी के लिए पुलिस वैन से ही एक-एक कर पेशी के लिए भेजा जाता है। जहां पुलिस वैन रुकते ही उसने शौच जाने की इच्छा जतायी। हवलदार और अन्य सुरक्षा गार्ड के साथ वह सिकरहना डीएसपी कार्यालय की तरफ शौच के लिए गया। 
शौच से लौटने के दौरान कोर्ट परिसर के गेट पर अभिषेक झा अपने पॉकेट में रखे मिर्च के पाउडर को सुरक्षा में चल रहे हवलदार के ऊपर फेंक कर हाथ छुड़ाकर भागने का प्रयास कर रहा है। तभी सामने से हाथों में हथियार लिए अभिषेक के दो साथी सामने से आते हैं और फायरिंग करने लगते है। उसी फायरिंग के दौरान अभिषेक को अपने साथियों की गोली लग जाती है, जिसमें वह घायल होकर गिरता है।

बता दें कि रंगदारी के एक मामले में पेशी के लिए आये अभिषेक एक कुख्यात अपराधी था, जिसे दरभंगा के बहेड़ी में 26 अक्टूबर 2015 को हुए दोहरे इंजीनियर हत्याकांड में वह आजीवन कारावास सजा हुयी थी। उसे मुजफ्फरपुर जेल में बंद किया गया था। उसके ऊपर दर्ज कुल दस मामलो में मोतिहारी में एक, शिवहर में तीन, गोपालगंज एक, सीतामढ़ी में तीन और मुजफ्फरपुर जिले में एक मामला ट्रायल में था। जिसमें हत्या,रंगदारी और आर्म्स एक्ट समेत कई मामले दर्ज थे। उसकी हत्या के बाद पुलिस मिले सीसीटीवी फूटेज के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।
 
अभिषेक की नेपाल में हुई थी शादी-
2014 में नेपाल की में अभिषेक शादी रौशनी झा से हुई थी। वह नेपाल में ही अपने मायके में रहती है। उसके 3 वर्ष का एक पुत्र शिवाजी है।
 
पोस्टमॉर्टम के बाद शव को लेने आए थे भाई व बहनोई-
सदर अस्पताल में मेंडिकल बोर्ड का गठन कर अभिषेक के शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया। मेडिकल बोर्ड में डीएस डॉ मनोज कुमार, डॉ गगन देव सिंह व डॉ केपी सिंह शामिल थे। मजिस्ट्रेट सीओ चौधरी बसंत सिंह के समक्ष पोस्टमॉर्टम कराया गया। पोस्टमॉर्टम के बाद छोटे भाई बाल मुकुंद झा, बहनोई विकास कुमार और एक अन्य रिश्तेदार को अभिषेक का शव सौंप दिया गया।
 
इसके पहले भी कोर्ट परिसर में हुई थी हत्या व हमला-
इसके पहले भी मोतिहारी के कोर्ट परिसर में हत्याएं हुई हैं। जिसमें एक मोतिहारी के संेट्रल जेल में भी हत्या की गई है। लिहाज कुछ हमले में लोग बाल-बाल बच भी गये हैं।
 1992 में सत्येन्द्र मणि त्रिपाठी पर बम से हमला हुआ जिसमें वे बाल-बाल बच गये
1994 में नेता देवेन्द्र नाथ दूबे पर गोली चलाई गई जिसमें वे बाल-बाल बच गये।
1994 में मठिया जिरात निवासी प्रदुम्न श्रीवास्तव पर बम से हमला किया गया था। इस हमले में श्री श्रीवास्तव तो बच गये लेकिन तोता से भाग्य बांच रहे एक व्यक्ति की मौत हो गई थी
2007 में कोर्ट हाजत के पास छोटे लाल सहनी की हत्या गोली मर कर कर दी गई थी।
2008 में कैदी मुन्ना सिंह की हत्या मोतिहारी सेंट्रल जेल में कर दी गई थी।

 
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