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नगर परिषद चुनाव को लेकर अजब-गजब नजारा
By Deshwani | Publish Date: 18/4/2017 4:05:07 PM
नगर परिषद चुनाव को लेकर अजब-गजब नजारा

फारबिसगंज (अररिया), (हि.स.)। आगामी माह में नगर परिषद का चुनाव होना है । चुनाव की सारी प्रकिया अभी होना बांकी है मगर शहर में अजब-गजब नजारा देखने को मिल रहा है। भावी प्रत्याशियों में कई को मोदी की चाय पर चर्चा पर विश्वास है और वे वोटरों को अपने से चाय बना कर पिलाते हुए समर्थन की अपील कर रहे हैं । 

कइयों ने तो वोटरों के आधार कार्ड बनाने के लिये सुबह से अपने झोला में कागजात रख कर ऑफिस जैसा खोल लिया है। इतना ही नहीं जो लोग सालों से सोशल मीडिया पर गायब थे, वे अब अचानक सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। त्योहारों में जिन प्रत्याशियों से भेंट होना मुश्किल हो जाता वे व्हाट्सएप और फेसबुक पर शुभकामनाएं दे रहे हैं। इधर जिन उम्मीदवारों के पास अच्छा किस्म की मोबाइल नहीं है, वे नया मोबाइल खरीद कर व्हाट्सएप और फेसबुक से अपनों को संदेश भेज रहे हैं। 
त्योहारों में भावी उम्मीदवारों ने लोगों को खूब शुभकामनाएं दी। इससे एक तरफ कई वोटर परेशान दिखे तो दूसरी तरफ व्हाट्सएप संदेशों से वोटरों को अब यह निर्णय करने में परेशानी हो रही है की कौन प्रत्याशी हैं और कौन सपोर्टर, क्योंकि दोनों के ही जमकर संदेश आ रहे हैं। शहर में बिछने लगी जोड़ घटाव की शतरंज शहर में सुबह से ही हर वार्ड के क्षेत्रों में आसपास के दो से चार-पांच लोगों का जत्था चुनावी-रामायण बांच रहे हैं। 
चुनाव की घोषणा के पहले ही टीका-टिप्पणी व जोड़-घटाव का शतरंज बिछ चुका है। तमाम भावी प्रत्याशी उठते ही सपनों के ख्वाब बुनने लगे हैं एवं वोटरों के सच्चे सेवक के तौर पर पेश करने का रिहर्सल भी शुरू कर देते हैं। सर्दी खांसी होने पर भी पहुंच रहे भावी प्रत्याशी शहर में वार्ड वासियों को को ताज्जुब हो रहा है कि कल तक जो किसी बड़े हादसे के बाद भी पीड़ित का हाल जानने नहीं पहुंचते थे, वे आज सर्दी-खांसी होने पर भी कुशल-क्षेम पूछने लगे हैं। इस 'मौसमी आत्मीयता' को मतदाता खूब समझ हैं। वे भावी प्रत्याशियों के साथ अपने पुराने हिसाब-किताब को लिख-पढ़ कर तैयार कर रहे हैं। वक्त आने पर वे इन सवालों को प्रत्याशियों के सामने रखेंगे। मतदाता भी हो रहे परेशान शहर में वोटरों एवं आम लोगों की परेशानी यह है कि उन्हें प्रत्याशी ऐसे समय में वोट के लिए तंग कर रहें हैं जब वो या तो सो रहें होते हैं या किसी काम की तैयारी में लगे रहते हैं। दरवाजा खटखटाया की भावी प्रत्याशी हाजिर मिलेंगे।जिससे लोग परेशान हो जाते हैं क्योंकि मुख्य बातों को कहने में इन्हें घंटों समय लग जाता हैं। लेकिन वोटर बेचारा करे तो क्या, लोकतंत्र के पर्व का जो सवाल है।
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