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बदलती परिस्थितियों के साथ समय का कोई भरोसा नही, कब पलटी मार जाये
By Deshwani | Publish Date: 22/8/2019 3:15:32 PM
बदलती परिस्थितियों के साथ समय का कोई भरोसा नही, कब पलटी मार जाये

नई दिल्ली। संगीता कुमारी। कब किसका समय कब बदल जाये कहना मुश्किल है। इसलिये तो कहते हैं किसी को छोटा ना समझो। बदला व्यक्ति नहीं लेता है। बदला समय लेता है। हम सब तो केवल अपने अपने कर्म का पाठ पढ़ते रहते हैं। पाठ पढ़ना हमारे वश में है। इसलिये तो उसे सही से पढ़ना चाहिये नहीं तो कब खुद की खाट खड़ी हो जाये कहना मुश्किल। 

 
पिछले कुछ महीनों से देश में कुछ अजीबो-गरीब घटनायें घट रही हैं। ऐसा लगता है बहुत तेजी से परिस्थितियाँ बदल रही हैं। कश्मीर के अलगाववादी नेताओं ने सोचा भी ना होगा कि उनकी एकात्मक सत्ता को कुछ इस तरह झटका लगेगा। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है फिर भी वहां दोहरी नागरिकता चलती थी। मोदी सरकार दुबारा सत्ता में आते ही दो माह के भीतर अनुच्छेद ३७० को हटाकर पूरे देश को अनमोल तोहफा दे डाला। कश्मीर जन्नत से आतंकियों को खदेड़ डाला। कल्पना भी नहीं की थी किम इतनी तेजी से देश सुरक्षा के लिये कठोर मजबूत कदम सरकार उठा लेगी। विरोधी भी विरोध करने लायक नहीं रहे। 
 
दस वर्ष पूर्व गृहमंत्री रहे चिंदम्बरम जी ने अमित शाह जी पर सीबीआई कारावाई की थी। बेगुनाह अमित शाह तीन माह जेल में भी रहे। आज समय ने करवट बदला और अमितशाह जी देश के गृहमंत्री हैं। सीवीआई चिदम्बरम जी से पूछताछ कर रही है। कभी सोचा ना होगा यह दिन भी देखना पड़ेगा! तब भी यही न्याय व्यवस्था थी आज भी वही न्याय व्यवस्था है। हमें हमारे देश की न्याय व्यवस्था पर गर्व करना चाहिये कि देश के गृहमंत्री जैसे पद पर आसीन व्यक्ति के साथ भी आम नागरिक जैसा न्याय करती है। 
 
नारी सश्क्तिकरण की ओर सरकार के बहुत हितकारी कदम रहे हैं। मुस्लिम बहन बेटियों की शिक्षा हेतु करोड़ों रुपये दिये जा रहे हैं। तीन तालाक बिल पास करके महिलाओं पर हो रहे अत्याचार को दूर करने का अथक प्रयास किया जा रहा है। यह भारत की मुस्लिम महिलाओं के हित में बहुत ही सार्थक सराहनीय कदम है। बेटियों को रोजगार फार्म भरने हेतु एक रुपया भी नहीं देना होता है। मुफ्त में भरती हैं।
 
प्रधानमंत्री योजना के तहत अंग्रेजी दवाईयां बहुत सस्ते में मिल रही हैं। महंगे से महंगे इलाज गरीबों को मुफ्त में मिल रहे हैं। आयुष्मान योजना गांव गांव में तेजी से कार्य कर रहा है। स्वास्थ्य सफाई में मोदी सरकार ने अपार प्रयास किया है जो कि सराहनीय है। 
 
देश की बहुत सारी सरकारी/ पीएसयू संस्थाओं को तेजी से प्राइवेट किया जा रहा है। निजी संस्थानों को बेजा जा रहा है। जिन बच्चों ने अपनी जिंदगी के बाइस पच्चीस वर्ष दिन रात एक करके पढ़ाई की होगी। गेट्स क्लियर करके सरकारी/ पीएसयू में नौकरी ली होगी वो सब रातो रात प्राइवेट कम्पनी के कर्मचारी हो गये। अनेक संस्थानों से कर्मचारियों की छटनी भी हो रही है। कारण कई हो सकते हैं। कम्पनी भी तो घाटे में अपने आपको कब तक रखेगी। वह भी उभरने का प्रयास करेगी। बेरोजगारी पहले से ही अधिक थी अब और बढ़ रही है। सरकार व्यापार करने के लिये युवाओं को बैंक से आसानी से लोन भी दे रही है ताकि युवा अपने अपने स्किल के हिसाब से अपनी आजीविका कमा सके। 
 
ऐसा लगता है जैसे मोदी जी गांधी जी के सपनों को साकार करना चाहते हैं। इसलिये यह बालकों में बालकपन से ही कला कौशल का विकास करना चाहते हैं ताकि वह अपने सपनों की ऊँची उड़ान भर सके। एक जीवन मिला है उसे अपने तरीके से जी सके। 
 
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